
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 18 अक्टूबर 2026, रविवार
कालगणना
युगाब्द – 5128
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948 (पराभव)
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – शरद
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – आश्विन (अमांत), आश्विन (पूर्णिमांत)
पक्ष – शुक्ल
तिथि – सप्तमी प्रातः 08:29 AM तक, तत्पश्चात् अष्टमी
वार – रविवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – पूर्वाषाढ़ा दोपहर 12:49 PM तक, तत्पश्चात् उत्तराषाढ़ा
योग – सुकर्मा रात्रि 11:56 PM तक, तत्पश्चात् धृति
करण – वणिज प्रातः 08:29 AM तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा) रात्रि 09:43 PM तक, तत्पश्चात् बव
सूर्य, काल एवं मुहूर्त
सूर्योदय – 06:12 AM
सूर्यास्त – 05:40 PM
चन्द्रोदय – 12:52 PM
चन्द्रास्त – 11:25 PM
चन्द्र राशि – धनु सायं 07:23 PM तक, तत्पश्चात् मकर
अभिजित मुहूर्त – 11:33 AM से 12:19 PM तक
विजय मुहूर्त – 01:51 PM से 02:37 PM तक
अशुभ काल
राहुकाल – 04:14 PM से 05:40 PM तक
यमगण्ड – 11:56 AM से 01:22 PM तक
गुलिक काल – 02:48 PM से 04:14 PM तक
दुर्मुहूर्त – 04:08 PM से 04:54 PM तक
कंटक – 10:02 AM से 10:48 AM तक
शुभ चौघड़िया
उद्वेग – 06:12 AM से 07:38 AM तक
चर – 07:38 AM से 09:04 AM तक
लाभ – 09:04 AM से 10:30 AM तक
अमृत – 10:30 AM से 11:56 AM तक
शुभ – 01:22 PM से 02:48 PM तक
दिशाशूल एवं यात्रा विचार
दिशाशूल – पश्चिम
यात्रा उपाय – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा टालें। यदि अनिवार्य हो, तो दलिया, घी या पान खाकर अथवा भगवान भास्कर (सूर्यदेव) को अर्घ्य देकर प्रस्थान करें।
व्रत-पर्व एवं विशेष योग
शारदीय नवरात्रि (महाअष्टमी – माँ महागौरी पूजन एवं कन्या पूजन)
आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को नवरात्रि का प्रमुख दिन ‘महाअष्टमी’ (दुर्गाष्टमी) के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। प्रातः 08:29 के बाद अष्टमी तिथि व्यापिनी होने से आज माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप ‘माँ महागौरी’ की पूजा और कन्या पूजन (कंजक पूजन) का विधान रहेगा। माँ महागौरी भक्तों के समस्त संचित पापों का क्षय कर परम कल्याण और सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
पूर्वाषाढ़ा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र योग
दोपहर 12:49 तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, जिसके उपरांत उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के स्वामी सूर्यदेव और अधिपति ‘विश्वेदेवा’ हैं। रविवार के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का संयोग मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि करने वाला होता है।
विशेष ज्योतिषीय विश्लेषण
प्रातः 08:29 से रात्रि 09:43 तक भद्रा (विष्टि करण) का प्रभाव रहेगा, यद्यपि यह स्वर्ग/पाताल लोक की भद्रा होने के कारण धार्मिक अनुष्ठानों व पूजा-पाठ में बाधक नहीं होती, फिर भी सांसारिक नवीन कार्यों की शुरुआत टालें। सायं 07:23 पर चन्द्रमा शनिदेव की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। रात्रि 11:56 तक सुकर्मा योग रहने से किए गए पुण्य व दान-धर्म का स्थायी फल प्राप्त होगा।

आज का राशिफल – 18 अक्टूबर 2026 रविवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
शाम तक भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। सायं 07:23 के बाद दशम भाव में चन्द्रमा के आने से कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त होगा और पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – माँ महागौरी को नारियल या हलवे-चने का भोग लगाएं।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
दिन में थोड़ा संयम रखें और स्वास्थ्य का ध्यान दें। शाम के बाद नवम भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भाग्य प्रबल होगा और रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।
उपाय – छोटी कन्याओं को खीर या सफेद मिठाई भेंट करें।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दाम्पत्य जीवन में सुख और व्यापार में लाभ रहेगा। शाम के बाद अष्टम भाव में चन्द्रमा के जाने से खानपान और वाहन चलाते समय सतर्कता बरतें।
उपाय – माँ दुर्गा को लाल चुनरी अर्पित करें और दुर्गा चालीसा पढ़ें।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
विरोधियों पर आपका दबदबा बना रहेगा। सायं 07:23 के बाद सप्तम भाव में चन्द्रमा के आने से जीवनसाथी के साथ तालमेल बढ़ेगा और साझेदारी के कार्य सफल होंगे।
उपाय – कन्याओं को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
बौद्धिक कार्यों में उत्कृष्ट सफलता मिलेगी। शाम के बाद षष्ठ भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से विरोधियों पर विजय मिलेगी और नौकरीपेशा जातकों को मेहनत का उत्तम फल मिलेगा।
उपाय – सूर्यदेव को अर्घ्य दें और माँ दुर्गा को अनार अर्पित करें।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
दिन में पारिवारिक सुख-सुविधाओं पर ध्यान रहेगा। शाम के बाद पंचम भाव में चन्द्रमा के आने से रचनात्मक कार्यों में मन लगेगा और संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त होगा।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं और ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ का जप करें।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, टी, तू, ते)
पराक्रम और साहस में वृद्धि रहेगी। सायं 07:23 के बाद चतुर्थ भाव में चन्द्रमा के गोचर से पारिवारिक वातावरण सुखद रहेगा और माताजी का स्नेह मिलेगा।
उपाय – माँ महागौरी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और वाणी से लाभ होगा। शाम के बाद तृतीय भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
उपाय – हनुमान चालीसा का पाठ करें और सिन्दूर अर्पित करें।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
शाम तक चन्द्रमा आपकी राशि में रहेंगे, जिससे मानसिक स्पष्टता बनी रहेगी। शाम के बाद धन भाव में चन्द्रमा के आने से आर्थिक समृद्धि और धन संचय में सहायता मिलेगी।
उपाय – मस्तक पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
दिन में धार्मिक कार्यों में व्यय हो सकता है। सायं 07:23 पर चन्द्रमा आपकी ही राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मानसिक ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा।
उपाय – कन्या पूजन करें और कन्याओं को उपहार दें।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आय के नवीन स्रोत बनेंगे और मित्रों का सहयोग मिलेगा। शाम के बाद द्वादश भाव में चन्द्रमा के प्रभाव से अनावश्यक खर्चों और भागदौड़ पर थोड़ा संयम रखें।
उपाय – भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा और प्रभाव बढ़ेगा। शाम के बाद एकादश भाव में चन्द्रमा के आने से व्यावसायिक लाभ में तेजी आएगी और महत्वपूर्ण योजनाएं पूरी होंगी।
उपाय – भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की संयुक्त आराधना करें।
॥ शुभम भवतु ॥

