भारत के खिलाफ नहीं होगा श्रीलंका की जमीन का इस्तेमाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कोलंबो दौरे में हुए तीन बड़े रक्षा समझौते

संवाद 24 नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को लेकर भारत और श्रीलंका के रिश्तों में एक नया और मजबूत अध्याय जुड़ा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उच्चस्तरीय वार्ता में स्पष्ट भरोसा दिया है कि श्रीलंका की जमीन का इस्तेमाल कभी भी भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। रक्षा मंत्री की तीन दिवसीय कोलंबो यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने समुद्री और सामरिक संबंधों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर औपचारिक हस्ताक्षर किए हैं।

एल-70 एयर डिफेंस गन का आधुनिकीकरण और अहम करार
दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित समझौतों में सबसे प्रमुख रक्षा करार श्रीलंका वायु सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भारत निर्मित एल-70 (L70) एयर-डिफेंस गन को आधुनिक बनाने से जुड़ा है। भारत सरकार द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता के अंतर्गत कुल छह एल-70 एयर-डिफेंस गन को अत्याधुनिक तकनीकों से अपग्रेड किया जाएगा। इस कदम से श्रीलंका के सामरिक और महत्वपूर्ण सरकारी व सुरक्षा प्रतिष्ठानों की हवाई रक्षा प्रणाली काफी मजबूत होगी।
इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के सैन्य अकादमिक संबंधों को बढ़ाने के लिए भारत और श्रीलंका के नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC) के बीच अकादमिक सहयोग को लेकर समझौता हुआ है। साथ ही दोनों देशों के नेशनल कैडेट कोर (NCC) के बीच युवाओं के आदान-प्रदान से जुड़े ‘यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम’ को औपचारिक रूप देने के लिए एक अलग समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी और भारत की सुरक्षा चिंताएं
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता और उसके कर्ज के जाल की नीतियों को लेकर भारत लंबे समय से सतर्क रहा है। वर्ष 2017 में भारी कर्ज न चुका पाने के कारण श्रीलंका को अपना बेहद महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह और उसके आसपास की लगभग 15,000 एकड़ जमीन 99 साल की लीज पर चीन को सौंपनी पड़ी थी।
ऐसे संवेदनशील रणनीतिक परिदृश्य के बीच श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भारत की सुरक्षा चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और अपनी जमीन का दुरुपयोग न होने देने का यह लिखित और मौखिक आश्वासन सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष बात यह भी है कि करीब 38 वर्षों के अंतराल के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री का यह श्रीलंका दौरा हुआ है, जिसने नई दिल्ली और कोलंबो के बीच आपसी भरोसे को नई दिशा दी है।

‘ऑपरेशन सागर बंधु’ और बेली पुलों का लोकार्पण
उच्चस्तरीय बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रपति दिसानायके ने भारतीय सेना द्वारा श्रीलंका में निर्मित तीन नए बेली पुलों का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। राष्ट्रपति दिसानायके ने हाल ही में आए चक्रवात डिटवाह के बाद भारत द्वारा चलाए गए मानवीय सहायता अभियान ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ और व्यापक पुनर्वास पैकेज के तहत दी गई त्वरित मदद की सराहना करते हुए भारत के प्रति आभार व्यक्त किया।
वार्ता के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एक करीबी समुद्री पड़ोसी और जिम्मेदार साझेदार के रूप में भारत और श्रीलंका अपने नागरिकों के विकास, कल्याण और पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की शांति, सुरक्षा व समृद्धि के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह द्विपक्षीय साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।

Madhvi Singh
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