
संवाद 24 उत्तर प्रदेश। 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के महासंकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार ने वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक नया और ऐतिहासिक कदम उठाया है! भारत और जापान के बीच गहरे होते रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों के बीच जापान के 200 से अधिक शीर्ष सीईओ, उद्योगपति, वित्तीय प्रतिनिधि और नीति निर्माताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पांच दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुंचा है। यह बड़ा प्रतिनिधिमंडल जापान के यामानाशी (Yamanashi) प्रांत के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में आया है। राज्य में औद्योगिक विकास, अत्याधुनिक तकनीक के हस्तांतरण और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के मकसद से ‘यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट’ का आयोजन किया गया है। 18 अगस्त से 23 अगस्त तक चलने वाले इस 5 दिवसीय भव्य कार्यक्रम का केंद्र नई दिल्ली, लखनऊ, आगरा, ग्रेटर नोएडा और वाराणसी जैसे प्रमुख औद्योगिक व सांस्कृतिक शहर हैं।
केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने किया भव्य स्वागत
जापानी प्रतिनिधिमंडल के भारत आगमन पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष स्वागत समारोह में गवर्नर कोटारो नागासाकी और सभी प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि भारत और जापान के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क, बेहतर कनेक्टिविटी, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और कुशल मानव संसाधन का जो ढांचा तैयार हुआ है, वह जापानी कंपनियों के वैश्विक विस्तार के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करता है।
1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में मजबूत साझेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी निवेशकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार जापानी उद्योग जगत के साथ अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ रणनीतिक साझेदारी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सुगम एवं पारदर्शी नीतियां (Ease of Doing Business), सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और निवेश अनुकूल माहौल निवेशकों को सुरक्षा और गति दोनों का भरोसा दिलाता है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के रोडमैप में जापान की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स और इनोवेटिव टेक्नोलॉजी की भूमिका बेहद निर्णायक साबित हो सकती है।
किन प्रमुख सेक्टरों पर टिकी हैं निगाहें?
‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) द्वारा आयोजित इस निवेश महाकुंभ के दौरान लखनऊ में उच्चस्तरीय G2B (सरकार-से-व्यापार) और B2B (व्यापार-से-व्यापार) बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इस व्यापक मंथन में मुख्य रूप से निम्नलिखित आधुनिक क्षेत्रों पर फोकस किया गया है:
1- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण: भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की मुहिम में जापानी चिप निर्माताओं और उपकरण उत्पादकों को राज्य में इकाइयां लगाने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
2- ऑटोमोबाइल व इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV): जापानी ऑटो कंपनियों के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और नेक्स्ट-जेनरेशन ऑटो कंपोनेंट्स के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
3- ग्रीन एवं क्लीन एनर्जी: ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर एनर्जी और सस्टेनेबल पावर समाधानों को लेकर यामानाशी प्रांत की विशेषज्ञता का लाभ उठाने की योजना है।
4- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एवं डेटा सेंटर्स: ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से उभर रहे डेटा सेंटर हब में जापानी तकनीकी कंपनियों की सहभागिता पर चर्चा हो रही है।
5- कौशल विकास (Skill Development) व पर्यटन: जापानी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक राज्य के युवाओं को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देने और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर सहमति बन रही है।
यामानाशी और यूपी का गहराता रिश्ता
यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की तेजी से बदलती औद्योगिक तस्वीर और विकास की रफ्तार जापानी निवेशकों को बहुत प्रभावित कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह ऐतिहासिक दौरा यामानाशी और उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक, संस्थागत और सांस्कृतिक संबंधों को एक नए युग में ले जाएगा। इस 5 दिवसीय समिट से न केवल राज्य में अरबों रुपये के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के करार होने की उम्मीद है, बल्कि लाखों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की भी मजबूत संभावना है। आने वाले दिनों में जमीन पर उतरने वाली ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने का दम रखती हैं।






