
संवाद 24 नई दिल्ली। देश भर में प्रतियोगी व अकादमिक परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामलों के बीच अब छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (आइजीकेवी) से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय की बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर के द्वितीय सेमेस्टर की एंटोमोलाजी (कीट विज्ञान) विषय की परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले ही प्रश्नपत्र वाट्सएप पर लीक हो गया। पर्चा सोशल मीडिया पर वायरल होने और मामले की पुष्टि के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया, जिसके बाद आनन-फानन में परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया।
सुबह 8 बजे मिली थी शिकायत, फिर भी 2 बजे तक चलती रही प्रक्रिया
मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि विश्वविद्यालय प्रशासन को सुबह करीब आठ बजे ही ई-मेल और अन्य माध्यमों से पेपर लीक होने की शिकायत मिल चुकी थी। इसके बावजूद निर्धारित समय के अनुसार सुबह परीक्षा का संचालन जारी रखा गया। इस परीक्षा में प्रदेश के 27 संबद्ध कृषि महाविद्यालयों के लगभग 1,200 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। जैसे-जैसे प्रश्नपत्र के वाट्सएप ग्रुपों में तेजी से प्रसारित होने के पुख्ता प्रमाण सामने आने लगे, विश्वविद्यालय में अधिकारियों की आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। गहन पड़ताल में जब लीक हुए प्रश्नपत्र के प्रश्नों का मिलान मूल प्रश्नपत्र से हुआ, तब जाकर दोपहर में परीक्षा निरस्त करने की आधिकारिक घोषणा की गई।
तेलीबांधा थाने में एफआइआर दर्ज, साइबर सेल की भी मदद
पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए देर रात रायपुर के तेलीबांधा थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई है। इसके साथ ही पूरे मामले की तकनीकी जांच के लिए साइबर सेल से भी संपर्क किया गया है। साइबर सेल की टीम डिजिटल ट्रेल के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र किस मोबाइल नंबर या आईपी एड्रेस से सबसे पहले इंटरनेट पर अपलोड किया गया था और इसे किन-किन छात्रों तक फॉरवर्ड किया गया।
मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश, 5 सदस्यीय समिति गठित
प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना का संज्ञान लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच के दायरे में वे सभी संबद्ध कॉलेज और परीक्षा केंद्र भी शामिल रहेंगे जहां राजधानी रायपुर से गोपनीय प्रश्नपत्र भेजे गए थे।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. कपिल देव दीपक ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए यह कड़ा फैसला लिया गया है और इसमें संलिप्त किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सितंबर के पहले सप्ताह में होगी दोबारा परीक्षा
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, रद्द किए गए कीट विज्ञान (पेस्ट मैनेजमेंट इन क्रॉप्स एंड स्टोर्ड ग्रेन्स) के प्रश्नपत्र की दोबारा परीक्षा अब सितंबर 2026 के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएगी। साल भर कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों ने व्यवस्था में हुई इस भारी चूक पर नाराजगी जताई है, वहीं छात्र संगठनों ने भी गोपनीय शाखा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की है।






