
संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकता देने की प्रशासनिक प्रक्रिया में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के तहत देश के आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिलाधिकारियों (डीएम) को पात्र आवेदकों को सीधे भारतीय नागरिकता प्रदान करने का अधिकार सौंप दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इसके लिए नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इस नए नियम के लागू होने के बाद अब संबंधित क्षेत्रों में नागरिकता पंजीकरण और नेचुरलाइजेशन की प्रक्रिया पूरी तरह से जिला प्रशासन के अधीन संचालित होगी।
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हुए नए नियम
अधिसूचना के अनुसार, यह नया अधिकार गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा (आदिवासी क्षेत्रों को छोड़कर) के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू किया गया है। इन निर्दिष्ट राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य रूप से रह रहे और भारत के बाहर जन्मे पात्र व्यक्तियों के नागरिकता आवेदनों पर अब सीधे संबंधित जिले के जिलाधिकारी कार्रवाई करेंगे। सरकार द्वारा जारी नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि इन क्षेत्रों में जिलाधिकारी अब उन अधिकार प्राप्त समितियों (Empowered Committees) और जिला स्तरीय समितियों (District Level Committees) का स्थान लेंगे, जिनके पास पहले यह अधिकार सुरक्षित था। इसके साथ ही, गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि समितियों के पास वर्तमान में लंबित सभी नागरिकता आवेदनों को तत्काल प्रभाव से संबंधित जिलाधिकारियों को स्थानांतरित किया जाए, जिससे आवेदनों के निस्तारण में तेजी लाई जा सके।
सख्त की गईं शर्तें: आवेदक की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य
प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करने के साथ-साथ नियमों को भी बेहद सख्त किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक, जिलाधिकारी आवेदक की पूर्ण उपयुक्तता और पात्रता की गहन जांच के बाद ही भारत की नागरिकता देने का फैसला करेंगे। नए नियमों में आवेदकों की व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर कड़ी शर्त जोड़ी गई है। प्रावधान के अनुसार, यदि कोई आवेदक उचित अवसर दिए जाने के बावजूद आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और देश के प्रति निष्ठा की शपथ लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है, तो जिलाधिकारी द्वारा उसके आवेदन को सीधे खारिज कर दिया जाएगा। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने नागरिकता से संबंधित पूर्व के आदेशों को भी निरस्त कर दिया है, हालांकि निरस्तीकरण से पहले किए गए वैध कार्यों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
प्रशासनिक स्तर पर फैसलों में आएगी तेजी
विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकता देने की शक्तियों को सीधे जिलाधिकारियों के स्तर पर सौंपने से लालफीताशाही में कमी आएगी और विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। सीमावर्ती राज्यों और उन क्षेत्रों में जहां शरणार्थी या प्रवासी आबादी वर्षों से रह रही है, वहां नागरिकता की लंबी और जटिल प्रक्रिया को सुगम बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।






