कोबरा ने दोनों हाथों में डसा, फिर भी पकड़कर बोरी में किया बंद, लेकिन जिंदगी की जंग हार गए खैराती नाथ

संवाद 24 फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र में सांप पकड़ने के दौरान एक 48 वर्षीय व्यक्ति की कोबरा के डसने से मौत हो गई। मृतक ने सांप के हमले के बावजूद कथित तौर पर उसे पकड़कर बोरी में बंद कर दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी। उन्हें पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने एंटी-स्नेक वेनम की पांच डोज देने के बाद उपचार शुरू किया। हालत में सुधार न होने पर उन्हें फर्रुखाबाद के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतक की पहचान मैनपुरी जनपद के बेवर थाना क्षेत्र के नाथपुरा गांव निवासी 48 वर्षीय खैराती नाथ के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार खैराती नाथ अपने साथियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में घूमते थे और भिक्षाटन के साथ-साथ लोगों की सूचना पर सांप पकड़ने का काम भी करते थे। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सबसे मार्मिक बात यह है कि उनकी बड़ी बेटी अंजलि की शादी करीब डेढ़ माह बाद होने वाली थी और घर में विवाह की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं।

सोमवार को पहुंचे थे क्षेत्र में

परिजनों ने बताया कि खैराती नाथ अपने दो साथियों दिनेश और धर्मेंद्र के साथ सोमवार को एटा जनपद की अलीगंज तहसील क्षेत्र के गांव टपुआ पहुंचे थे। परिवार के अन्य सदस्य भी आसपास के क्षेत्रों में मौजूद थे। शुक्रवार सुबह उन्हें नवाबगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में एक घर के भीतर सांप निकलने की सूचना मिली। सूचना मिलने पर खैराती नाथ सांप को पकड़ने के लिए मौके पर पहुंच गए। बताया गया कि जिस सांप को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा था, वह कोबरा था। सांप को नियंत्रित करने और पकड़ने के दौरान उसने खैराती नाथ पर हमला कर दिया। मृतक के चचेरे भाइयों पवन और धनपाल के अनुसार, कोबरा ने खैराती नाथ के दोनों हाथों में डस लिया। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और सांप को पकड़कर एक बोरी में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने घटना की सूचना अपने चचेरे भाई धनपाल को फोन पर दी।

एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचे, फिर लोहिया अस्पताल किया गया रेफर

घटना की सूचना मिलते ही धनपाल मौके पर पहुंचे। इसके बाद खैराती नाथ को एंबुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज पहुंचाया गया। परिजनों के अनुसार वहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उपचार शुरू किया और उन्हें पांच एंटी-वेनम डोज दी गईं। हालांकि उपचार के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। स्थिति लगातार गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए फर्रुखाबाद के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल भेजा गया। परिजन उन्हें वहां की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सांप को भी बोरी में बंद कर अस्पताल लाए परिजन

इस घटना का एक असाधारण पहलू यह भी रहा कि खैराती नाथ को डसने वाला सांप पकड़े जाने के बाद बोरी में बंद था। परिजनों के मुताबिक, जब खैराती नाथ को उपचार के लिए लोहिया अस्पताल लाया गया तो उनके साथ वह बोरी भी लाई गई, जिसमें सांप बंद था। हालांकि विषैले सांप को पकड़ने, उसके साथ यात्रा करने या उसे स्वयं संभालने में गंभीर जोखिम हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिकता पीड़ित को सुरक्षित ढंग से तत्काल चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की होनी चाहिए।

डेढ़ माह बाद थी बड़ी बेटी अंजलि की शादी

लोहिया अस्पताल पहुंचे मृतक के चचेरे भाई पवन ने बताया कि खैराती नाथ के पांच बच्चे हैं अंजलि, पूजा, चंदा, रोहित और मोहित। इनमें बड़ी बेटी अंजलि की शादी लगभग डेढ़ माह बाद होनी थी। परिवार में विवाह की तैयारियां चल रही थीं और आने वाले दिनों को लेकर योजनाएं बनाई जा रही थीं। लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। बेटी की शादी से कुछ ही सप्ताह पहले पिता की मौत ने परिवार के सामने भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। परिजनों के अनुसार खैराती नाथ की पत्नी बिटोला देवी का निधन पहले ही हो चुका है। ऐसे में बच्चों के लिए पिता ही परिवार का प्रमुख सहारा थे। अब खैराती नाथ की अचानक मौत के बाद परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ और बढ़ गया है।

परिवार के अन्य सदस्य भी पहुंचे थे क्षेत्र में

धनपाल ने बताया कि परिवार के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर भिक्षाटन का काम करते हैं और कई सदस्य एक ही इलाके में अलग-अलग स्थानों पर जाते हैं। उनके अनुसार खैराती नाथ सोमवार को अन्य साथियों के साथ क्षेत्र में पहुंचे थे, जबकि वह दो दिन पहले ही अपने परिवार के साथ वहां पहुंच चुके थे।परिजनों का कहना है कि खैराती नाथ को सांप पकड़ने का अनुभव था और लोग अक्सर उन्हें सांप निकलने की सूचना देते थे। शुक्रवार को भी इसी तरह की सूचना पर वह एक घर में पहुंचे थे। लेकिन इस बार सांप को पकड़ने का प्रयास जानलेवा साबित हुआ।

कोबरा भारत के प्रमुख विषैले सांपों में शामिल

भारत में सर्पदंश एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। कोबरा देश में पाए जाने वाले प्रमुख विषैले सांपों में शामिल है और इसके विष का असर गंभीर हो सकता है। सर्पदंश के बाद समय पर उचित चिकित्सा उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्पदंश के मामलों में पीड़ित को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है, जहां आवश्यक आपात चिकित्सा सुविधाएं और एंटी-वेनम उपलब्ध हो। विष के प्रभाव के आधार पर चिकित्सक मरीज की स्थिति का आकलन कर आवश्यक उपचार करते हैं।

सर्पदंश के बाद क्या करें, क्या न करें

विशेषज्ञों के अनुसार सांप के डसने की स्थिति में घबराने या दौड़ने के बजाय पीड़ित को यथासंभव शांत और स्थिर रखना चाहिए तथा तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। काटे गए अंग से अंगूठी, कड़ा या अन्य कसी हुई वस्तुएं हटा देनी चाहिए, ताकि सूजन बढ़ने पर परेशानी न हो। घाव को काटना, विष चूसने का प्रयास करना, अत्यधिक कसकर रस्सी या अन्य वस्तु बांधना तथा अप्रमाणित उपचारों में समय गंवाना नुकसानदेह हो सकता है। प्राथमिकता बिना देरी किए पीड़ित को नजदीकी उपयुक्त स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की होनी चाहिए।

परिवार ने बिना पोस्टमार्टम शव ले जाने की जताई इच्छा

लोहिया अस्पताल में खैराती नाथ की मौत के बाद परिजन गहरे सदमे में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिवार के लोग शव का पोस्टमार्टम कराए बिना उसे अपने गांव ले जाने की इच्छा जता रहे थे। हालांकि इस संबंध में अंतिम प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया क्या अपनाई गई, इसकी आधिकारिक जानकारी समाचार लिखे जाने तक स्पष्ट नहीं हो सकी।

अनुभव के बावजूद एक क्षण की चूक पड़ गई भारी

खैराती नाथ की मौत एक बार फिर यह याद दिलाती है कि विषैले सांपों को पकड़ना अत्यंत जोखिम भरा काम है। किसी व्यक्ति को सांप पकड़ने का अनुभव होने के बावजूद कोबरा जैसे विषैले जीव के साथ सीधा संपर्क जानलेवा साबित हो सकता है। शुक्रवार की सुबह जिस घर से सांप पकड़ने की सूचना आई थी, वहां शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि कुछ ही समय बाद यह घटना एक परिवार की जिंदगी बदल देगी। खैराती नाथ ने कथित तौर पर सांप के डसने के बाद भी उसे पकड़कर बोरी में बंद कर दिया, लेकिन विष के प्रभाव से उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और उपचार के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

अब उनके पीछे पांच बच्चों का परिवार है, जिसमें एक बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं। खैराती नाथ की अचानक मौत ने परिवार की खुशियों को गहरे शोक में बदल दिया है। फर्रुखाबाद में हुई यह दर्दनाक घटना सर्पदंश के खतरों के साथ-साथ विषैले सांपों से निपटने के दौरान अत्यधिक सावधानी और सर्पदंश होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

Samvad 24 Office
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