पटिया टूटी और 5 साल की बच्ची 50 फीट गहरे कुएं में गिरी, फिर शुरू हुई 3 घंटे की सांस रोक देने वाली जंग

संवाद 24 फर्रुखाबाद। कायमगंज कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब स्कूल से घर लौट रही पांच वर्षीय बच्ची एक पुराने और करीब 50 फीट गहरे कुएं में गिर गई। ऊपर से झांकने पर बच्ची दिखाई दे रही थी और उसकी आवाज भी सुनाई दे रही थी, लेकिन कुएं के भीतर दम घुटने जैसी स्थिति के कारण कोई भी व्यक्ति आसानी से नीचे नहीं उतर पा रहा था।

करीब तीन घंटे तक चले कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीमों ने बच्ची को बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए। आखिरकार कोतवाली में तैनात सिपाही मनोज कुमार ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे कुएं में उतरे और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लाए। इसके बाद उसे उपचार और निगरानी के लिए अस्पताल भेजा गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

बड़ी बहन के साथ स्कूल से लौट रही थी सौम्या

जानकारी के अनुसार, जहानपुर गांव निवासी पवन कुमार की पांच वर्षीय बेटी सौम्या अपनी बड़ी बहन अनन्या के साथ रसीदाबाद बल्लभ स्थित स्कूल से घर लौट रही थी। रास्ते में दोनों बहनें दिनेश के घर के पास बने चबूतरे पर कुछ देर रुकीं, जहां झूला रखा हुआ था। कुछ देर झूला झूलने के बाद दोनों चबूतरे पर पहुंचीं। इसी दौरान सौम्या कुएं की पटिया पर कूद गई। बताया गया कि पटिया अचानक टूट गई और सौम्या सीधे कुएं में जा गिरी। कुआं काफी पुराना, संकरा और गहरा बताया जा रहा है। बहन अनन्या की चीख सुनते ही आसपास के लोग दौड़ पड़े। कुछ ही देर में कुएं के आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए।

50 फीट नीचे दिख रही थी बच्ची, लेकिन उतरना था जानलेवा जोखिम

ग्रामीणों ने पहले अपने स्तर पर रस्सी के सहारे कुएं में उतरने का प्रयास किया। लेकिन अंदर पहुंचते ही सांस लेने में परेशानी और दम घुटने जैसी स्थिति होने लगी। इसके चलते प्रयास करने वाले लोगों को वापस ऊपर आना पड़ा। कुएं के भीतर मौजूद गैस या ऑक्सीजन की कमी जैसी परिस्थितियों की आशंका के कारण रेस्क्यू बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। हाल में बंद या संकरे स्थानों में जहरीली गैस से दम घुटने की घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी गंभीर चिंता जता चुका है और ऐसे मामलों में सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता पर सवाल उठे हैं।

नीचे से मांगा पानी, आवाज सुनकर जगी उम्मीद

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे राहत भरी बात यह रही कि कुएं में गिरी सौम्या की आवाज लगातार सुनाई दे रही थी। मौके पर मौजूद लोगों ने जब उसे ऊपर से पुकारा तो उसने प्रतिक्रिया दी और पानी मांगा। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने रस्सी के सहारे एक कमंडल में पानी नीचे भेजा। बताया गया कि बच्ची तक दो बार पानी पहुंचाया गया और उसने पानी पिया। बच्ची के जवाब देने और पानी मांगने से परिजनों की उम्मीद बनी रही कि वह होश में है। लेकिन उसे बाहर निकालना आसान नहीं था।

मौके पर पहुंचे एसडीएम, सीओ और पुलिस-फायर ब्रिगेड की टीम

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए। रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी के लिए एसडीएम अभिषेक वर्मा, तहसीलदार हर्षित सिंह, सीओ राजेश कुमार द्विवेदी और इंस्पेक्टर क्राइम बी. यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड और सीएचसी की स्वास्थ्य टीम को भी मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड टीम के प्रभारी प्रांशु ने भी कुएं में उतरने का प्रयास किया, लेकिन कुएं के संकरे होने और अंदर की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू सफल नहीं हो सका।

सिपाही मनोज ने तीन बार की कोशिश, चौथी बार में मिली सफलता

जब ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड के प्रयास सफल नहीं हुए तो कोतवाली में तैनात सिपाही मनोज कुमार ने कुएं में उतरने की जिम्मेदारी संभाली। बताया गया कि उन्होंने पहली बार नीचे जाने की कोशिश की, लेकिन कुछ दूरी पर पहुंचने के बाद सांस लेने में परेशानी होने लगी और उन्हें वापस आना पड़ा। दूसरी और तीसरी कोशिश में भी यही स्थिति बनी रही। हर असफल प्रयास के साथ समय बीत रहा था और कुएं में फंसी पांच साल की बच्ची तक पहुंचना जरूरी था। ऐसे में चौथी कोशिश के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया।

आखिरकार सिपाही मनोज कुमार ने ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे कुएं में उतरने का फैसला किया। सुरक्षा रस्सी और आवश्यक उपकरणों के साथ वह फिर नीचे उतरे। इस बार वह सौम्या तक पहुंचने में सफल रहे। काफी मशक्कत के बाद बच्ची को सुरक्षित तरीके से बांधा गया और ऊपर मौजूद टीम की मदद से उसे कुएं से बाहर निकाला गया। सौम्या के बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। करीब तीन घंटे से चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन सफल होने के बाद परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू थे।

मां रोते-रोते हुई बेहाल, पिता दिल्ली में करते हैं नौकरी

सौम्या की मां सपना घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचीं और बेटी को कुएं में फंसा देखकर रोते-रोते बेहाल हो गईं।सौम्या चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर की बताई गई है। उसके पिता पवन कुमार दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करते हैं।करीब तीन घंटे तक परिवार की सांसें अटकी रहीं। बच्ची के सुरक्षित बाहर आने के बाद ही परिजनों को राहत मिली।

सीएचसी से लोहिया अस्पताल रेफर, हालत फिलहाल ठीक

रेस्क्यू के तुरंत बाद सौम्या को एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचाया गया। वहां चिकित्साधीक्षक डॉ. विपिन कुमार और डॉ. अमरेश कुमार ने उसकी जांच की। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची की हालत फिलहाल ठीक बताई गई। उसे ऑक्सीजन भी दी गई। हालांकि करीब तीन घंटे तक कुएं में रहने और संभावित गैस या ऑक्सीजन की कमी के जोखिम को देखते हुए एहतियात के तौर पर उसे बेहतर उपचार और निगरानी के लिए लोहिया अस्पताल रेफर किया गया।

रेस्क्यू के दौरान भीड़ संभालने में पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत

बच्ची के कुएं में गिरने की खबर तेजी से फैली और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। कुएं के आसपास भीड़ बढ़ने से रेस्क्यू टीम को काम करने में दिक्कत हो रही थी। पुलिसकर्मी लगातार लोगों को सुरक्षित दूरी पर जाने की अपील कर रहे थे। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भीड़ नियंत्रण इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि कुएं के आसपास मौजूद लोगों की अधिक संख्या से बचावकर्मियों की आवाजाही और उपकरणों के इस्तेमाल में बाधा आ सकती थी।

करीब तीन घंटे तक चले इस कठिन बचाव अभियान में सिपाही मनोज कुमार, पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य टीम और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त भूमिका ने एक मासूम की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Samvad 24 Office
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