मानसून सत्र: परिसीमन विधेयक पर फंसा संख्या बल का पेच, ‘तटस्थ’ DMK के हाथ में आई निर्णायक चाबी

संवाद 24 नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। विधेयक को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में लगी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के लिए द्रमुक (DMK) के 22 लोकसभा सांसदों का रुख सबसे अहम हो गया है। विपक्षी खेमे में हुई हालिया टूट के बाद अब परिसीमन विधेयक का भविष्य काफी हद तक डीएमके के रुख पर निर्भर करता दिख रहा है।

विधेयक पास कराने के लिए चाहिए 350 से अधिक वोट
संविधान संशोधन से जुड़े इस विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता है। 540 सदस्यों वाली लोकसभा में वर्तमान में तीन सीटें रिक्त हैं। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को लगभग 350 से 360 सांसदों के समर्थन की दरकार है। वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो एनडीए का संख्या बल विभिन्न सहयोगियों, निर्दलीयों और हाल ही में शिरोमणि अकाली दल के समर्थन के बाद करीब 326 तक पहुंच चुका है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी जादुई आंकड़े से दूर है। यही कारण है कि सरकार ने फिलहाल इस विधेयक को सोमवार की कार्यसूची में शामिल नहीं किया है। यह चित्र AI द्वारा निर्मित एक प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुति है।विपक्ष के सामने एकजुटता बचाए रखने की चुनौती दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के बाद विपक्षी गठबंधन (INDIA) का गणित भी प्रभावित हुआ है। अप्रैल में परिसीमन के खिलाफ 230 सांसदों को गोलबंद करने वाला विपक्षी खेमा अब लगभग 189 सांसदों के आसपास सिमटता दिख रहा है। यदि डीएमके विपक्षी खेमे से अलग रुख अपनाती है, तो विपक्ष के लिए सरकार की राह रोकना मुश्किल हो जाएगा।

आज संसद में पेश होंगे चार महत्वपूर्ण विधेयक
सदन में जारी इस खींचतान के बीच सोमवार को चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है।
1- केंद्रीय मंत्री अमित शाह ‘केरल (नाम में बदलाव) विधेयक-2026’ और ‘राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक-2026’ पेश करेंगे।
2- अर्जुन राम मेघवाल ‘न्यायाधिकरण सुधार विधेयक-2026’ और जी. किशन रेड्डी ‘खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक-2026’ लोकसभा के पटल पर रखेंगे।
3- इसके अतिरिक्त, राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026’ और ‘कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक-2026’ पर चर्चा की शुरुआत करेंगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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