
संवाद 24 कर्नाटक। देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब कर्नाटक से एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक होनहार छात्रा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की OMR शीट और परिणाम प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रा का दावा है कि उसने परीक्षा में कुल 165 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, लेकिन जब एनटीए की ओर से आधिकारिक OMR शीट जारी की गई, तो उसमें महज 41 प्रश्न ही हल किए हुए दर्ज मिले। इस घपले के सामने आने के बाद छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के बीच हड़कंप मच गया है।
मेहनत पर फेरा पानी: 165 प्रश्नों के हल, OMR में मिले मात्र 41
कर्नाटक की रहने वाली इस NEET अभ्यर्थी का कहना है कि उसने सालों तक दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षा केंद्र पर उसने पूरे आत्मविश्वास के साथ 200 में से 165 प्रश्नों के सही उत्तर OMR शीट पर मार्क किए थे। उसे पूरा भरोसा था कि उसका स्कोर काफी अच्छा रहेगा और उसे एक बेहतरीन मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा। लेकिन जैसे ही NTA ने आधिकारिक पोर्टल पर उत्तर कुंजी (Answer Key) और अभ्यर्थियों की OMR शीट अपलोड की, छात्रा के पैरों तले जमीन खिसक गई। जारी की गई OMR कॉपी में केवल 41 प्रश्नों के गोलों को ही भरा हुआ दिखाया गया था, जबकि बाकी के प्रश्न खाली (Unattempted) दर्ज थे। छात्रा का कहना है कि यह कोई मामूली तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि उसकी पूरी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
OMR शीट बदलने या छेड़छाड़ का आरोप
पीड़ित छात्रा और उसके परिजनों ने इस गड़बड़ी के पीछे OMR शीट में फेरबदल या तकनीकी स्तर पर बड़ी चूक की आशंका जताई है। परिजनों का सवाल है कि जिस छात्र ने महीनों तक मॉक टेस्ट दिए हों और 165 सवाल हल किए हों, उसकी शीट पर अचानक 120 से अधिक प्रश्न खाली कैसे दिखाई दे सकते हैं? छात्रा ने तुरंत इस मामले को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से संपर्क साधा है और लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। उसने मांग की है कि उसकी मूल भौतिक (Physical) OMR शीट की निष्पक्ष जांच की जाए और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं ताकि सच सामने आ सके।
NTA की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब NEET परीक्षा के आयोजन, OMR मूल्यांकन या परिणाम को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे हों। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद से ही देशभर में अंक प्रणाली, ग्रेस मार्क्स और OMR डिस्क्रिपेंसी को लेकर छात्र सड़कों से लेकर अदालत तक न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
कर्नाटक का यह ताजा मामला NTA के मूल्यांकन तंत्र की साख पर एक और बड़ा धब्बा लगाता है। शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों का कहना है कि यदि OMR स्कैनिंग और अपलोडिंग प्रक्रिया में इस तरह की गंभीर लापरवाही होगी, तो देश के लाखों युवाओं का प्रतियोगी परीक्षाओं से भरोसा उठ जाएगा।
पीड़ित परिवार ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
फिलहाल, पीड़ित परिवार कानूनी विकल्प तलाश रहा है और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिलता और उसकी असली उत्तर पुस्तिका का सत्यापन नहीं हो जाता, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पारदर्शिता और सुधार की सख्त जरूरत है।






