
संवाद 24 उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड में मानसूनी आफत और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश पर्वतीय अंचलों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। उत्तरकाशी जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाले पैदल मार्ग का लगभग 25 से 30 मीटर बड़ा हिस्सा अचानक ढहकर गहरी खाई में समा गया। मार्ग पर भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा आ जाने के कारण पैदल आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई है, जिससे धाम की ओर बढ़ रहे और वापस लौट रहे हजारों श्रद्धालुओं के कदम जहाँ के तहाँ थम गए हैं।
अचानक धंसी पहाड़ी, मलबे और चट्टानों ने रोका रास्ता
मिली जानकारी के अनुसार, उत्तरकाशी जिले में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी बेहद संवेदनशील और कमजोर हो चुकी है। इसी बीच यमुनोत्री पैदल मार्ग पर अचानक पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर ढह गया। भूस्खलन इतना भीषण था कि पैदल मार्ग का लगभग 30 मीटर हिस्सा पूरी तरह से जमींदोज हो गया। देखते ही देखते पहाड़ी से विशालकाय चट्टानें और मलबा मार्ग पर आ गिरा, जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। हादसे के समय मार्ग से गुजर रहे तीर्थयात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि मलबे की चपेट में आने से यात्री बाल-बाल बच गए, लेकिन मार्ग ध्वस्त हो जाने से दोनों ओर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन को जैसे ही घटना की जानकारी मिली, सुरक्षा बलों और आपदा प्रबंधन की टीमों को सतर्क कर दिया गया।
राहत एवं बचाव कार्य जारी, हाईवे पर भी लैंडस्लाइड का कहर
पैदल मार्ग के ध्वस्त होने की खबर मिलते ही लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग की टीमें मौके पर पहुँच गई हैं। हालांकि, पहाड़ी से रह-रहकर गिर रहे पत्थरों और मूसलाधार बारिश के चलते राहत कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा जेसीबी मशीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को हटाने और पैदल मार्ग को अस्थायी रूप से दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। केवल पैदल मार्ग ही नहीं, बल्कि यमुनोत्री और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी दरकने की घटनाएं सामने आई हैं। हाईवे पर भारी मलबा आ जाने के कारण यातायात बार-बार प्रभावित हो रहा है, जिसे सुचारु करने के लिए एनएच और बीआरओ की टीमें लगातार जुटी हुई हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्राथमिकता, यात्रा रोकी गई
घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तरकाशी जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से यात्रियों की आवाजाही को संवेदनशील स्थलों पर रोक दिया है। जानकीचट्टी, बड़कोट और आसपास के पड़ावों पर श्रद्धालुओं को रोककर सुरक्षित स्थानों पर ठहरने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक पैदल मार्ग को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं बना लिया जाता, तब तक यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट और पहाड़ों में लगातार हो रहे भूस्खलन को देखते हुए तीर्थयात्रियों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, मौसम का अपडेट लेते रहें और पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।






