बैंकिंग जगत में महा-सेंधमारी? ‘डार्क वेब पर बैंक ऑफ बड़ौदा के 1TB डेटा लीक’ के दावे से मचा हड़कंप

संवाद 24 मुंबई। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से एक बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शुमार ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ (Bank of Baroda) के सिस्टम में एक बड़े साइबर हमले और लगभग 1 टेराबाइट (1TB) संवेदनशील बैंकिंग डेटा लीक होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डेटा साइबर अपराधियों द्वारा डार्क वेब पर मुफ्त में उपलब्ध करा दिया गया है। यदि यह दावा पूरी तरह सच साबित होता है, तो यह देश के इतिहास की सबसे बड़ी बैंकिंग डेटा लीक घटनाओं में से एक हो सकती है।

क्या-क्या डेटा हुआ लीक?
डार्क वेब ट्रैकिंग पोर्टल्स और साइबर सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, हैकर्स ने केवल सामान्य नाम या फोन नंबर ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की निजी और वित्तीय जीवन से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां सार्वजनिक की हैं।

लीक डेटा में शामिल मुख्य जानकारियां:
निजी पहचान डेटा: ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार नंबर और पैन कार्ड ब्यौरा।
खाता व लोन विवरण: बचत और चालू खाता धारकों की जानकारी, लोन अप्रेजल दस्तावेज़ और लेनदेन इतिहास।
कस्टमर व कॉर्पोरेट डेटा: नेट बैंकिंग यूजर विवरण, एनआरआई खाता रिकॉर्ड और कॉर्पोरेट बैंकिंग सेवाएं।
आंतरिक गोपनीय कागजात: शाखाओं की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट, विजिलेंस जांच की गोपनीय रिपोर्ट और ‘bobWorld’ से जुड़े ऑडिट दस्तावेज।
साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म ‘CashlessConsumer’ के संस्थापक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रीकांत लक्ष्मणन ने सोशल मीडिया पर इस लीक के कुछ सैंपल दस्तावेज़ साझा करते हुए इसे सीधा “साइबर डिजास्टर” (Cyber Disaster) करार दिया है। उनका कहना है कि शुरुआती जांच में लीक किए गए सैंपल डॉक्युमेंट्स असली और बैंक के अंदरूनी पत्राचार से मेल खाते दिख रहे हैं।

किस हैकर ग्रुप पर शक की सुई?
हालांकि किसी भी हैकर समूह ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की पूरी जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं की है, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे ‘TripleX’ नाम का एक नया और आक्रामक साइबर क्रिमिनल ग्रुप हो सकता है। गौरतलब है कि इसी ‘TripleX’ हैकर ग्रुप ने कुछ महीने पहले इंडोनेशिया के बड़े सरकारी बैंक ‘PT Bank Negara Indonesia’ के सर्वर पर हमला करके लगभग 2TB डेटा चुराया था। इस पैटर्न को देखते हुए भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर हुए इस हमले में भी इसी गिरोह के जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

डार्क वेब पर कैसे खुला राज?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस संदिग्ध डेटा लीक का सबसे पहले पता 25 जुलाई को डार्क वेब गतिविधियों की निगरानी करने वाली वेबसाइट ransomware.live के जरिए चला था। इसके बाद हैकर्स ने ‘Tor’ नेटवर्क पर बने एक गुप्त प्लेटफॉर्म पर पूरा 1TB डेटासेट मुफ्त डाउनलोड के लिए लाइव कर दिया। हैकर्स ने अपनी विश्वसनीयता साबित करने के लिए देशभर की विभिन्न बैंक शाखाओं के आवेदन पत्र, कस्टमर केयर रिकॉर्ड्स और विजिलेंस रिपोर्ट्स तक की प्रतियां सार्वजनिक डोमेन में डाल दी हैं।

बैंक और नियामकों का रुख
फिलहाल, इस सनसनीखेज दावे पर बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या राष्ट्रीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) की तरफ से कोई आधिकारिक अंतिम पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों का कहना है कि बैंक ऑफ बड़ौदा की आंतरिक साइबर सुरक्षा टीम इस लीक की सत्यता और इसके दायरे की तकनीकी जांच कर रही है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इससे पहले भी सितंबर 2025 में एक थर्ड-पार्टी क्लाउड डेटाबेस के जरिए बैंकिंग रिकॉर्ड लीक होने का मामला सामने आया था, हालांकि उस समय बैंक का मुख्य अंदरूनी सर्वर सुरक्षित पाया गया था। लेकिन इस बार सीधे बैंक के आंतरिक सिस्टम में सेंधमारी का दावा किया गया है।

ग्राहकों के लिए क्या है सावधानी का संदेश?
यदि आपका खाता भी बैंक ऑफ बड़ौदा में है, तो विशेषज्ञों ने तत्काल निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:

  1. पासवर्ड बदलें: अपने नेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप (bobWorld) और यूपीआई (UPI) पिन को तुरंत बदलें।
  2. संदिग्ध मैसेज से बचें: किसी भी ऐसे फोन कॉल या SMS पर भरोसा न करें जिसमें बैंक अधिकारी बनकर ओटीपी, पैन या आधार नंबर मांगा जा रहा हो।
  3. खाता स्टेटमेंट जांचें: अपने खाते के लेनदेन पर कड़ी नजर रखें और किसी भी अनधिकृत ट्रांजैक्शन की सूचना तुरंत बैंक और 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दें।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *