
फर्रुखाबाद। डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय के ब्लड बैंक में दलाली और अवैध वसूली की शिकायतों को जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) को पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों के शोषण की किसी भी शिकायत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जांच को पारदर्शी बनाने के लिए एक वरिष्ठ चिकित्साधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली, शिकायतों और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करेगी। यदि जांच में किसी कर्मचारी, अधिकारी या बिचौलिए की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
3 दिन में मांगी रिपोर्ट, सीसीटीवी से लेकर रजिस्टर तक की होगी पड़ताल
जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच टीम पिछले तीन माह के डोनर रजिस्टर, ब्लड स्टॉक रजिस्टर और अन्य अभिलेखों का मिलान करेगी। इसके साथ ही ब्लड बैंक परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जाएगी, ताकि शिकायतों की वास्तविकता सामने लाई जा सके।
मरीजों और तीमारदारों को राहत देने के उद्देश्य से ब्लड बैंक के बाहर स्पष्ट सूचना पट्ट लगाए जाएंगे, जिन पर लिखा होगा कि रक्त उपलब्ध कराने के लिए किसी भी व्यक्ति को कोई धनराशि न दें। पात्र लाभार्थियों को शासन की व्यवस्था के अनुसार निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासन लोगों से भी अपील करेगा कि यदि कोई व्यक्ति पैसे की मांग करे तो उसकी तत्काल शिकायत करें।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ब्लड बैंक में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से घोषणा-पत्र भी लिया जाएगा कि उनका किसी दलाल अथवा अनधिकृत व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। प्रशासन का मानना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
गौरतलब है कि लोहिया अस्पताल के ब्लड बैंक को लेकर पहले भी अवैध वसूली और कार्यप्रणाली संबंधी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में मरीजों और तीमारदारों ने धन वसूले जाने तथा लापरवाही के आरोप लगाए थे। ताजा कार्रवाई को स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।






