हिमाचल में ‘आसमानी चक्रव्यूह’: पहाड़ दरकने से अचानक बंद हुए 26 रास्त !

संवाद 24 हिमाचल प्रदेश। पहाड़ों पर हो रही लगातार मूसलाधार बारिश आफत का सबब बन चुकी है, जिसके चलते जगह-जगह से जमीन खिसकने (भूस्खलन) की डरावनी तस्वीरें सामने आ रही हैं। स्थिति इस कदर बेकाबू हो चली है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाले कम से कम 26 मुख्य और संपर्क मार्ग पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। इसी बीच मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) द्वारा जारी की गई एक बेहद संवेदनशील चेतावनी ने न सिर्फ प्रशासन, बल्कि स्थानीय लोगों और सैलानियों की भी धड़कनें बढ़ा दी हैं।

देखते ही देखते भरभराकर गिरे पहाड़, संपर्क पूरी तरह कटा
हिमाचल के कई जिलों में पिछले 24 घंटों से अनवरत बारिश का दौर जारी है। बारिश का पानी पहाड़ों की मिट्टी में रिसने के कारण चट्टानें कमजोर हो गई हैं। शिमला, कुल्लू, मंडी और चंबा जैसे कई संवेदनशील इलाकों में अचानक बड़े-बड़े बोल्डर (चट्टानें) और भारी मलबा सड़कों पर आ गिरा। इसके चलते देखते ही देखते 26 से ज्यादा रास्ते ब्लॉक हो गए। कई इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट चुका है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका गहरा गई है। सड़कों के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं और लोग रास्तों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं।

मौसम विभाग का वो अलर्ट… जिसने ला दिया सबको हाई-अलर्ट पर
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई हिस्सों के लिए ‘फ्लैश फ्लड’ यानी अचानक आने वाली विनाशकारी बाढ़ का गंभीर अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आने वाले कुछ घंटे हिमाचल के लिए बेहद क्रिटिकल (नाजुक) हो सकते हैं। बादलों के लगातार बरसने से स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच चुका है। यदि बारिश का यही क्रम जारी रहा, तो पहाड़ी नदी-नाले उफान पर आकर तबाही मचा सकते हैं। इस चेतावनी के सामने आते ही राज्य आपदा प्रबंधन की टीमों को पूरी तरह मुस्तैद रहने और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

सहमे सैलानी, स्थानीय लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर जाने की सलाह
पहाड़ों पर मौसम का मिजाज बिगड़ता देख सैलानियों के चेहरे पर भी हवाइयां उड़ने लगी हैं। प्रशासन ने घाटी में मौजूद पर्यटकों को सख्त हिदायत दी है कि वे नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास जाने की भूल बिल्कुल न करें। वहीं, निचले और संवेदनशील इलाकों में रह रहे स्थानीय परिवारों को भी सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करना इस समय साक्षात काल को दावत देने जैसा बना हुआ है, क्योंकि कब किस मोड़ पर ऊपर से चट्टान गिर जाए, कहना मुश्किल है।

युद्ध स्तर पर रास्ता साफ करने की चुनौती, क्रेन और कटर तैनात
रास्तों को दोबारा बहाल करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीमें भारी क्रेन और कंक्रीट कटर मशीनों के साथ डटी हुई हैं। हालांकि, लगातार हो रही रिमझिम बारिश और बार-बार गिरते मलबे के कारण रेस्क्यू और क्लियरेंस ऑपरेशन में भारी बाधा आ रही है। प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता बंद पड़े प्रमुख मार्गों को खोलकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। जब तक मौसम सामान्य नहीं हो जाता, तब तक आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे चालू रहेगा ताकि पल-पल की स्थिति पर नजर रखी जा सके।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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