
संवाद 24 कर्नाटक। राजधानी बेंगलुरु से एक ऐसी दिलदहला देने वाली और मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने माता-पिता के पवित्र रिश्ते पर एक गहरा दाग लगा दिया है। एक 11 महीने की मासूम बच्ची, जिसने अभी ठीक से दुनिया को देखना भी शुरू नहीं किया था, वह अपने ही माता-पिता की हैवानियत और आपसी कलह का शिकार हो गई। शुरुआत में इस खौफनाक वारदात को महज एक ‘हादसा’ बताकर दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन जब कानून के रखवालों ने परतें खोलनी शुरू कीं, तो जो सच सामने आया उसने डॉक्टरों से लेकर पुलिस अधिकारियों तक के होश उड़ा दिए। पुलिस ने इस मामले में बच्ची के पिता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मां की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
‘मां दूध पिला रही थी और बच्ची गिर गई’… वो झूठी कहानी जो रची गई
यह पूरी सनसनीखेज वारदात बेंगलुरु के अवलाहल्ली थाना क्षेत्र के किटागनूर गांव में स्थित एक शेडनुमा मकान में घटित हुई। घटना बीते महीने की है, लेकिन इसका खौफनाक सच अब जाकर पीएम रिपोर्ट और पुलिसिया तफ्तीश में बेनकाब हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बच्ची के पिता शेकप्पा (जो पेशे से एक ट्रैक्टर ड्राइवर है) ने पुलिस और आसपास के लोगों को एक बेहद भावनात्मक और मनगढ़ंत कहानी सुनाई। उसने बताया कि 9 जून की रात को उसकी पत्नी विजयलक्ष्मी अपनी 11 महीने की बेटी रेणुका को दूध पिला रही थी। इसी दौरान दिनभर के काम से थकी विजयलक्ष्मी की आंख लग गई और मासूम रेणुका अचानक ऊंचे बेड (पलंग) से नीचे फर्श पर गिर गई। शेकप्पा के मुताबिक, फर्श पर गिरते ही बच्ची अचेत हो गई, जिसके बाद वे उसे आनन-फानन में पास के एक निजी अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बच्ची को देखते ही ‘ब्रॉट डेड’ यानी मृत घोषित कर दिया। उस वक्त पुलिस ने भी स्थिति को देखते हुए इसे एक सामान्य दुर्घटना माना और अप्राकृतिक मौत (UDR) का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पोल: मासूम के शरीर पर थे हैवानियत के निशान
कहानी में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब मृत मासूम बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और इनक्वेस्ट (शव पंचनामा) की रिपोर्ट पुलिस के हाथों में पहुंची। डॉक्टरों द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत रिपोर्ट ने माता-पिता के दावों के परखच्चे उड़ा दिए। जांचकर्ताओं को बच्ची के चेहरे, छाती, पैरों और यहां तक कि उसके नाजुक अंगों (प्राइवेट पार्ट्स) पर कई गंभीर और बाहरी चोटों के निशान मिले। पुलिस ने जब घटनास्थल का मुआयना किया, तो पाया कि जिस पलंग से बच्ची के गिरने की बात कही जा रही थी, उसकी ऊंचाई महज दो फीट थी। दो फीट की ऊंचाई से गिरने पर किसी भी बच्चे के शरीर पर इस तरह के जानलेवा और क्रूर चोट के निशान आना पूरी तरह से असंभव था। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में साफ किया कि बच्ची की मौत पलंग से गिरने के कारण नहीं, बल्कि उसके शरीर के भीतर हुए अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) और गंभीर चोटों के कारण सांस रुकने (Respiratory Complications) से हुई थी। यानी मासूम को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया था।
आपसी झगड़े की भेंट चढ़ी मासूम: रोने पर मारी लात और जमीन पर पटका
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिले पुख्ता सबूतों के बाद अवलाहल्ली पुलिस ने जब आसपास के लोगों और गवाहों के बयान दर्ज करना शुरू किया, तो इस परिवार का एक काला सच सामने आया। पड़ोसियों ने खुलासा किया कि आरोपी शेकप्पा और उसकी पत्नी विजयलक्ष्मी के बीच आए दिन गंभीर घरेलू विवाद और भयंकर झगड़े होते रहते थे। इसके साथ ही यह बात भी सामने आई कि मां विजयलक्ष्मी अपनी इस दूसरी संतान (मासूम रेणुका) के प्रति बेहद उदासीन और लापरवाह रहती थी। पुलिस को अंदेशा है कि घटना वाली रात भी पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर खूनी संग्राम छिड़ गया था। दोनों एक-दूसरे पर चिल्ला रहे थे और इसी बीच माता-पिता के इस डरावने रूप को देखकर 11 महीने की रेणुका डर के मारे जोर-जोर से रोने लगी। झगड़े के गुस्से में पूरी तरह पागल हो चुके पिता (या माता-पिता दोनों) ने बच्ची को चुप कराने के बजाय उस पर अपना गुस्सा निकाल दिया। आरोप है कि बच्ची को बेरहमी से लात मारी गई और उसे उठाकर जमीन पर पटक दिया गया, जिससे उसके आंतरिक अंगों में गंभीर चोटें आईं और उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
कानून का शिकंजा: हत्या के मुकदमे में पिता गिरफ्तार, मां पर लटकी तलवार
इस हिला देने वाले खुलासे के बाद वाइटफील्ड डिवीजन के पुलिस उपायुक्त (DCP) सैदुलु अदावथ ने तुरंत मामले को हत्या की जांच में बदलने के निर्देश दिए। पुलिस ने इस मामले को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) और धारा 3(5) (साझा इरादा) के तहत दर्ज कर लिया है।
डीसीपी सैदुलु अदावथ ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, “पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुख्ता कूटनीतिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर इसे हत्या का मामला माना गया है। आरोपी पिता शेकप्पा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उसे सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इस पूरी वारदात में बच्ची की मां विजयलक्ष्मी की क्या भूमिका थी और क्या वह भी इस हत्या में शामिल थी, इसकी गहनता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होते ही उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” बेंगलुरु के इस सनसनीखेज मामले ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर आपसी कलह और गुस्से की आग में लोग इतने अंधे कैसे हो जाते हैं कि उन्हें अपनी ही कोख से जन्मी मासूम औलाद पर भी तरस नहीं आता।






