
संवाद 24 डेस्क। भारतीय खानपान में दालों का विशेष महत्व है। दाल न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों का भी उत्कृष्ट स्रोत है। इन्हीं दालों में चना दाल एक ऐसी लोकप्रिय दाल है, जो अपने विशेष स्वाद, पौष्टिक गुणों और आसान पाचन के कारण लगभग हर भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है।
चना दाल से तैयार की जाने वाली सब्जी या दाल उत्तर भारत, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती है। इसका स्वाद मसालों और घी के साथ और भी अधिक बढ़ जाता है। यह दाल चावल, रोटी, पराठे, पूड़ी या जीरा राइस के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।
चना दाल क्या है?
चना दाल, काले चने (Desi Chickpeas) को छीलकर और दो भागों में विभाजित करके बनाई जाती है। इसका रंग पीला होता है और इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड तथा फाइबर पाया जाता है।
भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश है, और चना दाल भारतीय भोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह स्वाद और पोषण दोनों का संतुलित मिश्रण प्रदान करती है।
चना दाल बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
चार व्यक्तियों के लिए चना दाल बनाने हेतु निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है।
मुख्य सामग्री
- चना दाल – 1 कप (लगभग 200 ग्राम)
- पानी – 3 से 4 कप
- नमक – स्वादानुसार
- हल्दी पाउडर – ½ चम्मच
तड़के के लिए सामग्री
- घी या तेल – 2 बड़े चम्मच
- जीरा – 1 छोटा चम्मच
- हींग – एक चुटकी
- तेज पत्ता – 1
- सूखी लाल मिर्च – 2
- प्याज – 1 मध्यम आकार का (बारीक कटा हुआ)
- टमाटर – 1 बड़ा (बारीक कटा हुआ)
- अदरक – 1 इंच का टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)
- लहसुन – 4 से 5 कलियां (बारीक कटी हुई)
- हरी मिर्च – 2 (बारीक कटी हुई)
मसाले
- लाल मिर्च पाउडर – ½ चम्मच
- धनिया पाउडर – 1 चम्मच
- जीरा पाउडर – ½ चम्मच
- गरम मसाला – ½ चम्मच
- कसूरी मेथी – 1 चम्मच
सजावट के लिए
- हरा धनिया – बारीक कटा हुआ
- नींबू – 1
चना दाल बनाने से पहले की तैयारी
स्वादिष्ट और मुलायम चना दाल बनाने के लिए इसे पहले से 1 से 2 घंटे तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए। इससे दाल जल्दी पकती है और उसका स्वाद भी बेहतर हो जाता है।
यदि समय कम हो तो बिना भिगोए भी दाल बनाई जा सकती है, लेकिन पकने में अधिक समय लगेगा।
चना दाल बनाने की विधि
चरण 1 : दाल को धोना
सबसे पहले चना दाल को अच्छी तरह दो से तीन बार साफ पानी से धो लें। इसके बाद इसे लगभग 1 से 2 घंटे तक पानी में भिगो दें।
चरण 2 : दाल को प्रेशर कुकर में पकाना
भीगी हुई दाल को प्रेशर कुकर में डालें।
अब इसमें निम्न चीजें मिलाएं—
- 3 कप पानी
- आधा चम्मच हल्दी
- स्वादानुसार नमक
कुकर का ढक्कन बंद करके मध्यम आंच पर 3 से 4 सीटी आने तक पकाएं।
जब कुकर का प्रेशर निकल जाए, तब ढक्कन खोलें। दाल अच्छी तरह गल जानी चाहिए, लेकिन पूरी तरह पेस्ट जैसी नहीं होनी चाहिए।
चरण 3 : तड़का तैयार करना
एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें।
अब इसमें—
- जीरा
- हींग
- तेज पत्ता
- सूखी लाल मिर्च
डालकर कुछ सेकंड तक भूनें।
इसके बाद बारीक कटा प्याज डालें और सुनहरा होने तक पकाएं।
फिर अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर लगभग एक मिनट तक भूनें।
चरण 4 : मसाला तैयार करना
अब कड़ाही में कटे हुए टमाटर डालें।
इसके बाद—
- लाल मिर्च पाउडर
- धनिया पाउडर
- जीरा पाउडर
मिलाकर धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक मसाले से तेल अलग न होने लगे।
यह प्रक्रिया दाल के स्वाद को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
चरण 5 : दाल और मसाले को मिलाना
अब पकी हुई चना दाल को तैयार मसाले में डाल दें।
इसे अच्छी तरह चलाएं और यदि आवश्यकता हो तो थोड़ा गर्म पानी मिला लें।
दाल को 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें, ताकि मसाले और दाल का स्वाद अच्छी तरह मिल जाए।
अंत में गरम मसाला और कसूरी मेथी डालें।
ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर गैस बंद कर दें।
स्वाद बढ़ाने के लिए विशेष तड़का
यदि आप रेस्टोरेंट जैसा स्वाद चाहते हैं, तो एक छोटे पैन में एक चम्मच घी गर्म करें।
इसमें डालें—
- जीरा
- साबुत लाल मिर्च
- एक चुटकी हींग
- थोड़ा सा लाल मिर्च पाउडर
इस तड़के को तैयार दाल के ऊपर डाल दें।
इससे दाल का स्वाद और सुगंध दोनों बढ़ जाते हैं।
चना दाल के पोषण संबंधी गुण
चना दाल अनेक पोषक तत्वों से भरपूर होती है।
प्रति 100 ग्राम चना दाल में लगभग
- प्रोटीन – 20 से 22 ग्राम
- कार्बोहाइड्रेट – 60 ग्राम
- फाइबर – 10 से 12 ग्राम
- कैल्शियम – 45 मिलीग्राम
- आयरन – 4 मिलीग्राम
- मैग्नीशियम – 130 मिलीग्राम
- फोलिक एसिड – पर्याप्त मात्रा में
चना दाल खाने के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
- प्रोटीन का अच्छा स्रोत
चना दाल शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत है। यह मांसपेशियों के विकास और शरीर की मरम्मत में सहायता करती है। - पाचन तंत्र को स्वस्थ रखती है
इसमें मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या को कम करने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। - हृदय के लिए लाभकारी
चना दाल में पाया जाने वाला पोटैशियम और मैग्नीशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सहायक होता है। - मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी
इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिसके कारण यह रक्त में शर्करा के स्तर को तेजी से नहीं बढ़ाती। - वजन नियंत्रित करने में सहायक
इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। - हड्डियों को मजबूत बनाती है
कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे खनिज हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।
चना दाल के साथ परोसे जाने वाले व्यंजन
चना दाल का स्वाद निम्न खाद्य पदार्थों के साथ विशेष रूप से अच्छा लगता है—
- सादा चावल
- जीरा राइस
- बासमती चावल
- तंदूरी रोटी
- फुल्का
- मिस्सी रोटी
- पराठा
- पूरी
- बाजरे की रोटी
चना दाल बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- दाल को पकाने से पहले भिगोने से वह जल्दी पकती है।
- अधिक पानी डालने से दाल बहुत पतली हो सकती है।
- तड़के के लिए घी का प्रयोग करने से स्वाद बढ़ जाता है।
- दाल को बहुत अधिक न गलाएं।
- अंत में गरम मसाला डालने से सुगंध और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं।
- ताजा हरा धनिया दाल की खूबसूरती और स्वाद को बढ़ाता है।
विभिन्न राज्यों में चना दाल की लोकप्रियता
भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में चना दाल को अलग-अलग तरीके से बनाया जाता है।
- राजस्थान में इसे लहसुन और लाल मिर्च के साथ बनाया जाता है।
- गुजरात में इसमें हल्की मिठास का प्रयोग किया जाता है।
- महाराष्ट्र में नारियल और करी पत्ते का तड़का लगाया जाता है।
- पंजाब में घी और देसी मसालों के साथ इसका स्वाद और अधिक समृद्ध बनाया जाता है।
चना दाल भारतीय भोजन की सबसे पौष्टिक और स्वादिष्ट दालों में से एक है। यह न केवल शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करती है, बल्कि इसका लाजवाब स्वाद हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। उचित मात्रा में मसालों और सही विधि से तैयार की गई चना दाल साधारण भोजन को भी विशेष बना देती है।
यदि आप पौष्टिक, स्वादिष्ट और आसानी से बनने वाले भोजन की तलाश में हैं, तो चना दाल एक बेहतरीन विकल्प है। इसे अपने दैनिक आहार में शामिल करके आप स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।






