
संवाद 24 नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर नए हमले शुरू किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह अभियान ईरान की लगातार आक्रामक गतिविधियों के जवाब में शुरू किया गया है।
CENTCOM ने दी कार्रवाई की जानकारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि उसकी सेनाएं ईरान के कई लक्ष्यों पर हमले कर रही हैं। कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। CENTCOM ने इसे “आत्मरक्षा से जुड़ी कार्रवाई” बताया है।
हालिया घटनाओं के बाद बढ़ा टकराव
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव हाल के सैन्य घटनाक्रमों से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान की ओर से लगातार ऐसी गतिविधियां की जा रही थीं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन रही थीं। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया।
कई अहम ठिकानों को बनाया गया निशाना
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी हमलों में निगरानी प्रणालियों, संचार नेटवर्क और वायु रक्षा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने सभी लक्ष्यों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। वहीं ईरान की ओर से भी नुकसान को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
ट्रंप ने दिए सख्त संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके थे कि यदि ईरान की ओर से कथित आक्रामक गतिविधियां जारी रहीं तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई कर सकता है। नए हमलों को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह क्षेत्र में अपने हितों और सैन्य बलों की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाएगा।
ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
अमेरिकी हमलों के बाद अब पूरी दुनिया की नजर ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। तेहरान पहले भी अमेरिकी कार्रवाइयों की आलोचना करता रहा है और किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने की बात कह चुका है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि तनाव और बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे मध्य पूर्व में चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र पहले से ही कई संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरताओं का सामना कर रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच किसी भी नई सैन्य कार्रवाई का असर पड़ोसी देशों और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
कूटनीतिक प्रयासों पर भी नजर
हालांकि तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। विभिन्न देशों और मध्यस्थों की ओर से दोनों पक्षों को संयम बरतने और वार्ता के जरिए समाधान खोजने की अपील की जा रही है। लेकिन मौजूदा हालात में सैन्य गतिविधियों के कारण बातचीत की राह मुश्किल नजर आ रही है।
आने वाले दिनों में अहम रहेंगे घटनाक्रम
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि दोनों पक्षों ने संयम नहीं दिखाया तो यह तनाव और गहरा सकता है। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहे तो क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में रास्ता निकल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर वाशिंगटन और तेहरान के अगले कदमों पर बनी हुई है। .






