
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत में जल्द ही करेंसी नोटों का स्वरूप बदलता नजर आ सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) एक बार फिर प्लास्टिक यानी पॉलीमर आधारित नोटों को बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ने इस दिशा में गंभीर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है और आने वाले समय में पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा भी की जा सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो भारतीय मुद्रा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
आखिर क्या होते हैं प्लास्टिक या पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तरह दिखाई देते हैं, लेकिन इन्हें विशेष प्रकार की प्लास्टिक सामग्री पर तैयार किया जाता है। ये नोट पूरी तरह प्लास्टिक कार्ड जैसे कठोर नहीं होते, बल्कि काफी लचीले और टिकाऊ होते हैं। इन्हें मोड़ा जा सकता है, जेब में रखा जा सकता है और सामान्य नोटों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इनकी उम्र पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
RBI क्यों कर रहा है इस विकल्प पर विचार?
पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद देश में नकदी की मांग लगातार बनी हुई है। RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़ी मात्रा में खराब और फटे नोटों को बदलने की है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार हर साल अरबों नोट खराब होने के कारण वापस लेने पड़ते हैं। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोट लागत कम करने में मदद कर सकते हैं।
बढ़ती छपाई लागत भी बनी चिंता
भारतीय मुद्रा छापने पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक बैंक नोटों की छपाई पर होने वाला व्यय पिछले वित्त वर्ष की तुलना में काफी बढ़ गया है। मुद्रा की बढ़ती मांग और बार-बार नोट बदलने की जरूरत के कारण RBI नए विकल्पों की तलाश में है। माना जा रहा है कि पॉलीमर नोट लंबे समय तक चलेंगे, जिससे बार-बार छपाई की आवश्यकता कम होगी और खर्च में भी कमी आएगी।
नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम
पॉलीमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी उन्नत सुरक्षा तकनीक मानी जाती है। इनमें पारदर्शी विंडो, विशेष स्याही, माइक्रो सुरक्षा फीचर और कई ऐसे तत्व जोड़े जा सकते हैं जिन्हें नकली बनाना बेहद कठिन होता है। ऐसे में यह कदम नकली नोटों की समस्या को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित हो सकता है। हाल के वर्षों में नकली करेंसी से जुड़ी घटनाओं ने भी RBI की चिंता बढ़ाई है।
भारत पहले भी कर चुका है कोशिश
यह पहली बार नहीं है जब भारत में प्लास्टिक नोटों की चर्चा हो रही है। वर्ष 2012 में केंद्र सरकार ने कुछ शहरों में 10 रुपये के पॉलीमर नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी थी। उस समय कोच्चि, मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला जैसे शहरों में ट्रायल की योजना बनाई गई थी। हालांकि तकनीकी और परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब माना जा रहा है कि तकनीक में सुधार के बाद RBI फिर से इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं ऐसे नोट
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों में पॉलीमर नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इन देशों का अनुभव बताता है कि ऐसे नोट ज्यादा टिकाऊ होते हैं और जल्दी खराब नहीं होते। यही वजह है कि दुनिया के 60 से अधिक देशों ने किसी न किसी रूप में प्लास्टिक मुद्रा को अपनाया है।
क्या सभी नोट तुरंत बदल जाएंगे?
फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि देश के सभी कागजी नोटों को एक साथ बदल दिया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट से होगी। इसके बाद जनता की प्रतिक्रिया, तकनीकी व्यवहार्यता और बैंकिंग सिस्टम पर प्रभाव का आकलन किया जाएगा। माना जा रहा है कि सबसे पहले 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों पर प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि इनका उपयोग सबसे अधिक होता है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
यदि यह योजना लागू होती है तो आम लोगों को अधिक मजबूत, साफ-सुथरे और लंबे समय तक चलने वाले नोट मिल सकते हैं। साथ ही फटे, गंदे और जल्दी खराब होने वाले नोटों की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि अंतिम फैसला RBI के परीक्षण और उसके नतीजों पर निर्भर करेगा। आने वाले महीनों में इस विषय पर बड़ा ऐलान देखने को मिल सकता है।






