गेहूं खरीद से पहले फार्मर रजिस्ट्री पर सख्ती, डीएम ने अधिकारियों को दिए तत्काल पंजीकरण के निर्देश
Share your love

जनपद में गेहूं खरीद प्रक्रिया को सुचारु और पारदर्शी बनाने के लिए गुरुवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) अरुण कुमार सिंह, उप कृषि निदेशक अरविन्द मोहन मिश्र, सहायक निबन्धक सहकारी समितियां अजय पालीवाल, वरिष्ठ विपणन अधिकारी रोली सिंह सहित सहकारी समितियों, विपणन विभाग और पीसीएफ के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान उप कृषि निदेशक ने बताया कि जनपद में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद के लिए विभिन्न क्रय केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन अब केवल वही किसान अपना गेहूं बेच सकेंगे जिनकी फार्मर रजिस्ट्री पूरी होगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि समितियों से जुड़े सभी किसानों की शत-प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 से MSP पर गेहूं खरीद के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश में गेहूं का MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है और खरीद प्रक्रिया 15 जून तक जारी रहेगी। राज्यभर में हजारों क्रय केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां पंजीकृत किसानों से ही खरीद की जा रही है।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को फार्मर रजिस्ट्री बनाने का प्रशिक्षण भी दिया गया। सभी के मोबाइल में फार्मर सहायक एप इंस्टॉल कराया गया और मौके पर ही फार्मर रजिस्ट्री बनाकर पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि किसान स्वयं, जनसेवा केन्द्र या फार्मर सहायक एप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर, आधार संख्या और खतौनी की आवश्यकता होगी।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी क्रय केन्द्र पर ऐसा किसान पहुंचता है जिसकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनी है, तो उसकी तत्काल रजिस्ट्री कराकर ही गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए। इससे किसानों को क्रय केन्द्रों से वापस लौटना नहीं पड़ेगा और सरकारी खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।
प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री अभियान तेजी से चलाया जा रहा है, क्योंकि भविष्य में पीएम किसान, खाद वितरण और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ भी फार्मर आईडी से जोड़ा जा रहा है। हाल ही में सरकार ने संकेत दिए हैं कि बिना फार्मर आईडी के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है।






