भवानीपुर बना ‘महायुद्ध का मैदान’: ममता vs शुभेंदु समेत 12 उम्मीदवार, सियासी ताप चरम पर
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संवाद 24 पश्चिम बंगाल। भवानीपुर विधानसभा सीट इस बार चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है, जहां कई दिग्गज नेताओं के उतरने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यह सीट अब पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर मैदान में
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपनी मजबूत सीट भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं। यह सीट उनके लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है, क्योंकि वे पहले भी यहां से जीत दर्ज कर चुकी हैं और इसे अपना गढ़ माना जाता है।
शुभेंदु अधिकारी से सीधी टक्कर
इस हाई-प्रोफाइल सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दे रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच मुकाबला पहले भी चर्चा में रहा है और इस बार यह और भी ज्यादा अहम हो गया है।
12 उम्मीदवारों से मुकाबला और रोचक
भवानीपुर सीट पर इस बार कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। हालांकि मुख्य लड़ाई ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच ही मानी जा रही है, लेकिन अन्य उम्मीदवार भी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
पूरे राज्य की नजर इस सीट पर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर सीट का परिणाम पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। यही कारण है कि सभी प्रमुख दल इस सीट पर पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
पिछले चुनाव का बदला लेने की जंग
गौरतलब है कि पिछले चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में यह मुकाबला कहीं न कहीं राजनीतिक बदले की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।
चुनाव की तारीखें और अहमियत
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने जा रहे हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में भवानीपुर की सीट का नतीजा राज्य की सत्ता के समीकरण पर सीधा असर डालेगा।
राजनीतिक माहौल गरम, बयानबाजी तेज
चुनाव नजदीक आते ही राज्य में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। ममता बनर्जी और भाजपा नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे चुनावी माहौल और भी गर्म हो गया है।
भवानीपुर बना प्रतिष्ठा की लड़ाई का केंद्र
भवानीपुर सीट अब सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रतिष्ठा और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का प्रतीक बन गई है। यहां का चुनाव परिणाम न केवल नेताओं के भविष्य बल्कि पूरे राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा।






