
संवाद 24 पश्चिम बंगाल। राजनीति में इन दिनों एक नया सवाल चर्चा के केंद्र में है – आखिर कोलकाता का अगला मेयर कौन होगा? तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं और नगर निगम से जुड़े प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिससे नए मेयर के चयन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद खाली हुई कुर्सी
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की राजनीति में बड़ा मोड़ तब आया जब फिरहाद हकीम ने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। हकीम लंबे समय से कोलकाता नगर निगम की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं और उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की गईं। उनके इस्तीफे के बाद मेयर पद खाली हो गया है और अब पार्टी नेतृत्व नए चेहरे की तलाश में जुट गया है।
ममता की बैठक पर टिकी सबकी नजर
सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में केवल नए मेयर के नाम पर ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि नगर निगम के भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर भी विचार किया जाएगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस बैठक से कोलकाता नगर निगम की आगामी दिशा तय हो सकती है।
कई नामों पर चल रही चर्चा
मेयर पद के लिए पार्टी के भीतर कई नामों की चर्चा है। हालांकि अभी तक किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन टीएमसी नेतृत्व ऐसे व्यक्ति को आगे लाना चाहता है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ संगठन में भी मजबूत पकड़ रखता हो। पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर भी सतर्क है कि नया चेहरा जनता और कार्यकर्ताओं दोनों के बीच स्वीकार्य हो।
क्या निगम में प्रशासनिक व्यवस्था लागू होगी?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नए मेयर के चयन में देरी होने पर कोलकाता नगर निगम में अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जा सकती है। हाल ही में राज्य सरकार ने एक अन्य नगर निगम बोर्ड को भंग कर वहां प्रशासक नियुक्त किया था। इसी वजह से कोलकाता नगर निगम को लेकर भी कई तरह की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
टीएमसी के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
2026 के विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे समय में कोलकाता नगर निगम का नेतृत्व टीएमसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोलकाता पार्टी का सबसे मजबूत शहरी गढ़ रहा है और नगर निगम की कमान किसके हाथ में जाती है, इसका असर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।
संगठनात्मक फेरबदल के बीच बढ़ा महत्व
हाल के दिनों में ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में कई बदलाव किए हैं। नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठनात्मक पुनर्गठन के बाद अब नगर निगम नेतृत्व को लेकर लिया जाने वाला फैसला भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं को आगे बढ़ाने के संकेत दे चुका है।
जल्द सामने आ सकता है नया चेहरा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैठक के बाद कोलकाता के अगले मेयर के नाम को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। हालांकि अंतिम फैसला ममता बनर्जी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के हाथ में होगा। फिलहाल कोलकाता की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि शहर की सबसे अहम कुर्सी पर आखिर किसे बैठाया जाएगा। आने वाले दिनों में इस रहस्य से पर्दा उठने की पूरी संभावना है।






