लिव-इन रिश्तों को ‘शादी’ जैसा दर्जा? जनगणना में बड़ा बदलाव, जानिए क्या है पूरा मामला

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संवाद 24 डेस्क। भारत की आगामी जनगणना में इस बार एक बड़ा और चर्चित बदलाव देखने को मिल सकता है। बदलती सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी खास श्रेणी में शामिल करने की तैयारी है।

लिव-इन कपल्स को ‘विवाहित’ की श्रेणी में गिनने की योजना
नई गाइडलाइंस के अनुसार, अगर कोई कपल लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हुए अपने रिश्ते को स्थिर (stable union) मानता है, तो जनगणना में उन्हें विवाहित जोड़े के रूप में दर्ज किया जा सकता है।

सिर्फ आंकड़ों के लिए, नहीं मिलेगी कानूनी मान्यता
हालांकि, यह दर्जा केवल जनगणना के आंकड़ों तक ही सीमित रहेगा। इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं होगा और न ही इससे विवाह संबंधी अधिकार या जिम्मेदारियां तय होंगी।

स्वयं की घोषणा पर आधारित होगा डेटा
जनगणना में दी जाने वाली जानकारी पूरी तरह व्यक्ति की स्वयं की घोषणा (self-declaration) पर आधारित होगी। यानी कोई भी कपल जैसा अपना रिश्ता बताएगा, उसी आधार पर उसे दर्ज किया जाएगा।

प्राइवेसी को लेकर सरकार का आश्वासन
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना में दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसे किसी अन्य सरकारी योजना, जांच या कानूनी प्रक्रिया में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

डिजिटल और हाई-टेक होगी जनगणना प्रक्रिया
इस बार की जनगणना प्रक्रिया काफी हद तक डिजिटल होगी। लोग मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।

घरों से जुड़े कई सवाल पूछे जाएंगे
जनगणना के दौरान परिवार से जुड़े कई अहम सवाल पूछे जाएंगे, जैसे घर में कितने सदस्य हैं, कितने विवाहित जोड़े हैं, और रहने की सुविधाएं क्या हैं। इससे देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विस्तृत डेटा तैयार किया जाएगा।

समाज की बदलती तस्वीर को दर्शाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम समाज में बदलते रिश्तों और जीवनशैली को सही तरीके से दर्ज करने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे भविष्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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