PayPal की हाई सैलरी छोड़ी, छठे प्रयास में हासिल की AIR 16, IAS मोनिका की सफलता की अनोखी कहानी

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संवाद 24 डेस्क। आज के दौर में जहां लाखों युवा बड़ी सैलरी, मल्टीनेशनल कंपनियों और कॉर्पोरेट लाइफ को सफलता का अंतिम पड़ाव मानते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने भीतर के बड़े उद्देश्य के लिए सुरक्षित करियर छोड़ने का साहस दिखाते हैं। ऐसी ही कहानी है Monika Srivastava की, जिन्होंने आईआईटी से पढ़ाई की, PayPal जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी की, लेकिन अंततः देश सेवा के सपने को प्राथमिकता देते हुए सिविल सेवा की राह चुनी।
उनकी कहानी केवल एक परीक्षा में सफलता पाने की नहीं है, बल्कि यह उस धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की कहानी है जो किसी भी युवा को अपने लक्ष्य तक पहुंचा सकता है।

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर
Monika Srivastava का संबंध मूल रूप से Aurangabad से माना जाता है, जबकि उनका जन्म Ballia में हुआ था। उनका पालन-पोषण बिहार में हुआ, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। बचपन से ही पढ़ाई में तेज मोनिका का झुकाव गणित और विज्ञान की ओर था। यही वजह रही कि उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया और बाद में Indian Institute of Technology Guwahati में दाखिला लिया।
आईआईटी से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में कदम रखा। वे चेन्नई में PayPal में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत रहीं। सामान्य तौर पर देखा जाए तो यह वह मुकाम होता है, जहां पहुंचने के बाद अधिकांश युवा स्थिर जीवन चुन लेते हैं। लेकिन मोनिका के भीतर कुछ अलग करने की बेचैनी बनी रही।

नौकरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था
किसी बड़ी कंपनी की नौकरी छोड़ना केवल आर्थिक जोखिम नहीं होता, बल्कि यह मानसिक और सामाजिक दबावों से भरा निर्णय भी होता है। खासकर तब, जब सामने कोई तय रास्ता न हो और केवल एक सपना हो।
मोनिका ने महसूस किया कि उनका वास्तविक झुकाव प्रशासनिक सेवा की ओर है। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने देखा कि कैसे डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और सरकारी तंत्र जमीन पर काम कर रहे हैं। बताया जाता है कि इसी दौर ने उनके भीतर सिविल सेवा में जाने की इच्छा को और मजबूत किया।
उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर पूरी तरह UPSC की तैयारी शुरू की। यह निर्णय जोखिम भरा था, क्योंकि सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार परीक्षा देते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ लोगों का ही हो पाता है।

पहली बार में नहीं मिली बड़ी सफलता
आज जब लोग मोनिका की सफलता देखते हैं तो उन्हें केवल AIR 16 दिखाई देता है, लेकिन इस रैंक के पीछे कई वर्षों का संघर्ष छिपा हुआ है। मोनिका ने UPSC में पहली बार सफलता 2023 में हासिल की थी, जब उन्हें ऑल इंडिया रैंक 455 मिली थी।
यह रैंक भी किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं थी। इतने बड़े स्तर की परीक्षा में चयन होना ही लाखों युवाओं का सपना होता है। लेकिन मोनिका यहां रुकना नहीं चाहती थीं। उन्होंने महसूस किया कि वे और बेहतर कर सकती हैं, इसलिए उन्होंने दोबारा परीक्षा देने का निर्णय लिया।
यही वह बिंदु है जो उनकी कहानी को खास बनाता है। बहुत से लोग पहली सफलता के बाद संतुष्ट हो जाते हैं, लेकिन मोनिका ने खुद को लगातार बेहतर बनाने का रास्ता चुना।

BPSC में भी हासिल की थी बड़ी सफलता
UPSC से पहले मोनिका ने Bihar Public Service Commission की परीक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने BPSC 66वीं परीक्षा में महिलाओं में टॉप किया और कुल मिलाकर छठी रैंक प्राप्त की थी।
यह उपलब्धि बताती है कि उनकी तैयारी केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं थी। उन्होंने लगातार अपनी समझ, लेखन क्षमता और प्रशासनिक दृष्टिकोण को मजबूत किया। यही कारण रहा कि वे राज्य सेवा से लेकर UPSC तक हर स्तर पर सफल होती चली गईं।

छठे प्रयास में हासिल हुई बड़ी जीत
UPSC जैसी परीक्षा में कई बार सफलता तुरंत नहीं मिलती। कुछ लोगों को एक-दो प्रयास में मंजिल मिल जाती है, जबकि कई लोगों को लंबे संघर्ष से गुजरना पड़ता है। मोनिका के लिए भी यह यात्रा आसान नहीं रही। उन्होंने छह प्रयासों के बाद AIR 16 हासिल की।
यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के समय में बहुत से युवा एक-दो असफलताओं के बाद निराश हो जाते हैं। मोनिका की कहानी बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार बनी रहे, तो देर से ही सही लेकिन सफलता जरूर मिलती है।

तैयारी का तरीका भी बना सफलता की वजह
मोनिका की तैयारी का सबसे बड़ा आधार था सीमित स्रोत, नियमित अभ्यास और उत्तर लेखन। उन्होंने शुरुआती स्तर पर NCERT और बेसिक किताबों से अपनी समझ मजबूत की। इसके बाद उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का गहन अध्ययन किया।
वे रोजाना उत्तर लिखने का अभ्यास करती थीं। यही अभ्यास उनके मेन्स परीक्षा में काम आया। विशेषज्ञों का मानना है कि UPSC में केवल जानकारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सीमित समय में प्रभावी तरीके से लिखना भी जरूरी होता है। मोनिका ने इसी कौशल पर सबसे ज्यादा काम किया।
उनका वैकल्पिक विषय अर्थशास्त्र था। उन्होंने अपने उत्तरों में डेटा, उदाहरण और संतुलित विश्लेषण का प्रयोग किया। यही कारण रहा कि वे लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकीं।

इंटरव्यू में आत्मविश्वास बना ताकत
UPSC इंटरव्यू केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं होती, बल्कि यह उम्मीदवार की सोच, व्यक्तित्व, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास को भी परखती है। मोनिका ने अपने इंटरव्यू की तैयारी के लिए मॉक इंटरव्यू और DAF आधारित प्रश्नों पर विशेष ध्यान दिया।
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें इंटरव्यू में 206 अंक मिले, जो उनके अंतिम चयन में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि सिविल सेवा की तैयारी केवल किताबों तक सीमित नहीं होती। उम्मीदवार को अपने व्यक्तित्व, भाषा, व्यवहार और समसामयिक समझ पर भी लगातार काम करना पड़ता है।

सोशल मीडिया के दौर में बढ़ी प्रेरणा की जरूरत
आज के समय में UPSC केवल एक परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह लाखों युवाओं के लिए सामाजिक बदलाव का माध्यम भी बन चुकी है। हालांकि इसके साथ दबाव, तुलना और असफलता का डर भी बढ़ा है।
सोशल मीडिया पर UPSC टॉपर्स की सफलता की कहानियां तेजी से वायरल होती हैं, लेकिन उनके पीछे का संघर्ष कम दिखाई देता है। कई अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं, अकेलेपन और मानसिक दबाव से गुजरते हैं। इस संदर्भ में मोनिका की कहानी केवल सफलता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह धैर्य और संतुलन का संदेश भी देती है।
रेडिट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी लोग यह मानते हैं कि UPSC की तैयारी में केवल कोचिंग या नोट्स नहीं, बल्कि सही रणनीति, सीमित स्रोत और मजबूत मानसिक स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा है कि लगातार स्रोत बदलना और FOMO में रहना तैयारी को कमजोर कर देता है।

आईआईटी और UPSC का बढ़ता संबंध
पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि देश के कई बड़े तकनीकी संस्थानों के छात्र प्रशासनिक सेवाओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं। IIT से पढ़े हुए युवाओं में विश्लेषण क्षमता, अनुशासन और जटिल समस्याओं को हल करने की समझ मजबूत होती है। यही गुण UPSC जैसी परीक्षा में भी काम आते हैं।
हालांकि केवल IIT से पढ़ना सफलता की गारंटी नहीं है। वास्तविक सफलता मेहनत, निरंतरता और सही दिशा से मिलती है। मोनिका की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने अपनी तकनीकी शिक्षा का उपयोग प्रशासनिक सोच विकसित करने में किया और अंततः देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष रैंक हासिल की।

परिवार का साथ बना सबसे बड़ी ताकत
किसी भी बड़ी सफलता के पीछे परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मोनिका के पिता सरकारी विभाग में इंजीनियर रहे हैं, जबकि उनकी मां स्कूल प्रिंसिपल रही हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें पढ़ाई और करियर के फैसलों में समर्थन दिया।
जब उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी का फैसला किया, तब परिवार का भरोसा उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। यही समर्थन उन्हें कठिन समय में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।

मोनिका की कहानी युवाओं को क्या सिखाती है
Monika Srivastava की कहानी केवल एक सफलता की कहानी नहीं है। यह उस पीढ़ी की कहानी है जो अपने करियर को केवल नौकरी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अपने काम के जरिए समाज में बदलाव भी लाना चाहती है।
उनकी यात्रा यह सिखाती है कि असफलता अंतिम नहीं होती, करियर बदलना कमजोरी नहीं होती, और अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो बड़ी से बड़ी चुनौती भी पार की जा सकती है।
आज जब युवा जल्दी सफलता चाहते हैं, तब मोनिका जैसी कहानियां याद दिलाती हैं कि बड़े सपनों को पूरा करने में समय लगता है। लेकिन जो लोग धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास बनाए रखते हैं, वे अंततः मंजिल तक पहुंच ही जाते हैं।

Geeta Singh
Geeta Singh

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