गैस खत्म, फिर लौटा पुराना चूल्हा! दिल्ली में LPG संकट के बीच केरोसीन स्टोव की डिमांड बढ़ी
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संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में रसोई गैस (LPG) की कमी ने आम लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक की जिंदगी को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग अब आधुनिक गैस सिलेंडर छोड़कर फिर से पुराने केरोसीन स्टोव की ओर लौटने लगे हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, LPG की उपलब्धता कम होने और कीमतों में तेजी आने के चलते दिल्ली में वैकल्पिक ईंधन की मांग तेजी से बढ़ी है।
गैस की किल्लत ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
दिल्ली के कई इलाकों में लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि बुकिंग के बाद भी कई दिनों तक डिलीवरी नहीं हो रही। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ जगहों पर ब्लैक मार्केट में सिलेंडर ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
केरोसीन स्टोव की मांग में जबरदस्त उछाल
LPG की कमी के चलते लोग अब केरोसीन स्टोव खरीदने लगे हैं। लेकिन समस्या यह है कि बाजार में इन स्टोव की उपलब्धता सीमित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो स्टोव पहले सस्ते दाम में मिलते थे, अब उनकी कीमत कई गुना बढ़ गई है। कम आय वाले लोग मजबूरी में इन्हीं विकल्पों की ओर लौट रहे हैं।
छोटे दुकानदार और ठेले वाले सबसे ज्यादा प्रभावित
दिल्ली के स्ट्रीट फूड विक्रेता, चाय वाले और छोटे ढाबा संचालक इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई दुकानदार अब कोयला, लकड़ी या केरोसीन स्टोव का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनका काम बंद न हो। लेकिन इससे उनकी लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है।
व्यापार पर असर, कीमतें बढ़ने का खतरा
LPG संकट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बाजार पर भी पड़ रहा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है क्योंकि दुकानदार महंगे ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई छोटे व्यवसायों को अपने काम सीमित करने या बंद करने तक की नौबत आ गई है।
मिडिल ईस्ट संकट से जुड़ी है पूरी कहानी
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी LPG जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। वहीं, क्षेत्र में जारी युद्ध और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे देशभर में गैस संकट गहराता जा रहा है।
सरकार के कदम, लेकिन राहत कब?
सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए केरोसीन की आपूर्ति बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी लोगों को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है और संकट का असर लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्या फिर पुराने दौर में लौट रही है रसोई?
दिल्ली में LPG संकट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश की रसोई फिर पुराने ईंधनों पर निर्भर हो जाएगी। हालांकि यह एक अस्थायी स्थिति मानी जा रही है, लेकिन जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक लोगों को महंगे और कम सुरक्षित विकल्पों के साथ ही काम चलाना पड़ेगा। कुल मिलाकर, यह संकट सिर्फ ईंधन की कमी नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डालने वाली बड़ी चुनौती बन चुका है।






