समंदर में बढ़ेगी भारत की धमक! स्वदेशी ‘तारागिरी’ के आने से कांपेंगे दुश्मन, नौसेना की ताक़त में होगा जबरदस्त इजाफा
Share your love

संवाद 24 नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को नई ऊंचाई देते हुए, स्वदेशी तकनीक से निर्मित स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ (Taragiri) को जल्द ही नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। प्रोजेक्ट 17ए (Project 17A) के तहत बनाया गया यह युद्धपोत न केवल आधुनिक मिसाइलों से लैस है, बल्कि इसकी ‘स्टील्थ’ तकनीक इसे दुश्मन के रडार से ओझल रखने में भी सक्षम है। हिंद महासागर में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियों के बीच ‘तारागिरी’ का जलावतरण भारतीय सुरक्षा के लिहाज से एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।
क्या है ‘तारागिरी’ की खासियत?
तारागिरी युद्धपोत को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा तैयार किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ डिजाइन है, जो इसके रडार सिग्नेचर को न्यूनतम कर देती है। यानी दुश्मन का रडार इसे आसानी से पहचान नहीं पाएगा। लगभग 149 मीटर लंबा और 17.8 मीटर चौड़ा यह पोत 6,670 टन वजनी है। यह अत्याधुनिक हथियारों, सेंसरों और प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है।
इस युद्धपोत में दो गैस टर्बाइन और दो डीजल इंजनों का मिश्रण (CODOG) लगाया गया है, जो इसे समुद्र की लहरों को चीरते हुए 28 समुद्री मील (लगभग 52 किमी/घंटा) की रफ्तार प्रदान करता है। इसकी रेंज इतनी अधिक है कि यह एक बार ईंधन भरने पर लंबी दूरी तक गश्त कर सकता है।
दुश्मन के लिए काल: मिसाइल और गन सिस्टम
‘तारागिरी’ केवल बचाव नहीं, बल्कि हमला करने में भी बेजोड़ है। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली ‘ब्रह्मोस’ जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। इसके अलावा, आसमान से आने वाले खतरों से निपटने के लिए इसमें ‘बराक-8’ जैसी सर्फेस-टू-एयर मिसाइलें (SAM) लगी हैं। पनडुब्बियों का शिकार करने के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो लॉन्चर और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर भी दिए गए हैं। इस जहाज का 75% हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है, जिसमें इस्तेमाल किया गया विशेष स्टील भी भारतीय है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब युद्धपोत निर्माण में विदेशी मदद पर निर्भर नहीं है।
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ‘दादागिरी’
पिछले कुछ वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीनी नौसेना की आवाजाही बढ़ी है। श्रीलंका और पाकिस्तान के बंदरगाहों पर चीनी जहाजों की मौजूदगी भारत के लिए चिंता का विषय रही है। ऐसे में ‘तारागिरी’ जैसे 7 युद्धपोतों (प्रोजेक्ट 17ए के तहत) का निर्माण भारतीय नौसेना को एक ‘ब्लू वॉटर नेवी’ के रूप में स्थापित करेगा। यह युद्धपोत न केवल भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करेगा, बल्कि संकट के समय मित्र देशों की सहायता और समुद्री डकैती को रोकने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
प्रोजेक्ट 17ए: भविष्य की तैयारी
प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात युद्धपोत बनाए जा रहे हैं, जिनमें से चार मझगांव डॉक (MDL) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित हैं। ‘तारागिरी’ इस सीरीज का पांचवां जहाज है। इन जहाजों का नाम हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं के नाम पर रखा गया है। ‘तारागिरी’ के आने से भारतीय नौसेना की ‘स्ट्राइक फोर्स’ को वह मजबूती मिलेगी, जिसकी जरूरत आधुनिक समुद्री युद्ध में होती है। नौसेना प्रमुख के अनुसार, ‘तारागिरी’ का शामिल होना केवल एक जहाज का बढ़ना नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन है। आने वाले महीनों में इसके समुद्री परीक्षण (Sea Trials) पूरे कर लिए जाएंगे, जिसके बाद इसे विधिवत रूप से कमीशन किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धपोत आने वाले दशकों तक भारतीय तटों का अभेद्य प्रहरी बना रहेगा।






