सावधान! आपकी थाली में ‘साइलेंट किलर’: भारत में भोजन के जरिए शरीर में घुस रहे घातक बैक्टीरिया, दवाओं का असर हो रहा बेअसर
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संवाद 24 नई दिल्ली। भारत में खान-पान और स्वास्थ्य को लेकर एक ऐसा खतरनाक खुलासा हुआ है जिसने चिकित्सा जगत और आम जनता की नींद उड़ा दी है। हालिया वैज्ञानिक शोध और विशेषज्ञों की चेतावनियों के अनुसार, भारत ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) यानी दवाओं के प्रति बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता के एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये जानलेवा और जिद्दी बैक्टीरिया अब सीधे तौर पर हमारे भोजन के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे भविष्य में सामान्य बीमारियों का इलाज भी असंभव हो सकता है।
क्या है एएमआर संकट और क्यों है यह जानलेवा?
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) उस स्थिति को कहते हैं जब बैक्टीरिया, वायरस और फंगस जैसे सूक्ष्मजीव उन दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं जो उन्हें मारने के लिए बनाई गई हैं। सरल शब्दों में कहें तो, जब आप बीमार पड़ते हैं और डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवा देते हैं, तो ये बैक्टीरिया उन दवाओं से नहीं मरते। भारत में यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, पोल्ट्री फॉर्म, डेयरी उद्योग और कृषि क्षेत्र में एंटीबायोटिक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि जानवरों को बीमारियों से बचाया जा सके और उनकी पैदावार बढ़ाई जा सके। यही एंटीबायोटिक्स मांस, दूध और यहां तक कि सब्जियों के जरिए हमारी थाली तक पहुंच रहे हैं।
भोजन बना बीमारी का वाहक
नई दिल्ली के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अनजाने में ऐसे बैक्टीरिया का सेवन कर रहे हैं जो पहले से ही दवाओं के खिलाफ ‘कवच’ तैयार कर चुके हैं। जब कोई व्यक्ति ऐसा संक्रमित भोजन करता है, तो ये बैक्टीरिया उसके शरीर में जाकर बस जाते हैं। भविष्य में जब वह व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार होता है, तो सबसे शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स भी उस पर काम नहीं करतीं। यह ‘सुपरबग्स’ का निर्माण कर रहा है, जो आने वाले समय में कैंसर से भी बड़ी महामारी बन सकता है।
खेती और पशुपालन में लापरवाही का नतीजा
भारत में कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में नियमों की अनदेखी इस संकट का सबसे बड़ा कारण है। फसलों को कीटों से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशक और पशुओं को दिए जाने वाले ‘ग्रोथ प्रमोटर’ एंटीबायोटिक्स मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। यही प्रदूषित पानी और मिट्टी अंततः हमारे आहार चक्र का हिस्सा बन जाती है। रिपोर्ट बताती है कि यदि इस पर तुरंत लगाम नहीं लगाई गई, तो 2050 तक दुनिया भर में एएमआर के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा करोड़ों में पहुंच सकता है, जिसमें भारत एक हॉटस्पॉट बन सकता है।
सरकार और प्रशासन की भूमिका
इस संकट से निपटने के लिए अब केंद्र और राज्य सरकारों को कड़े कदम उठाने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा मानकों (FSSAI) को और अधिक सख्त बनाना होगा ताकि बाजारों में बिकने वाले दूध, मांस और सब्जियों में एंटीबायोटिक के अंशों की नियमित जांच हो सके। यह केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, क्योंकि एक बीमार राष्ट्र कभी प्रगति नहीं कर सकता।






