बिना बेटियों के विकास के ‘विकसित भारत’ का सपना असंभव।
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संवाद 24 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश की आधी आबादी यानी बेटियों के सशक्तिकरण को लेकर अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई है। ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल बेटियों की उपलब्धियों की सराहना की, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में केंद्र सरकार का पूरा ध्यान बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र तभी महान बनता है जब उसकी बेटियां सुरक्षित महसूस करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लड़कों के समान ही पंख मिलें। यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति है।
लिंगानुपात और शिक्षा में सुधार
प्रधानमंत्री ने आंकड़ों और उदाहरणों के जरिए बताया कि पिछले एक दशक में लिंगानुपात में क्रांतिकारी सुधार आया है। हरियाणा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जहाँ कभी बेटियाँ बोझ समझी जाती थीं, आज वहाँ के गांव-गांव में बेटियों के जन्म पर उत्सव मनाया जा रहा है। स्कूलों में लड़कियों के नामांकन की संख्या में भारी वृद्धि हुई है और ड्रॉप-आउट रेट में कमी आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान ने समाज की जड़ों में जमी पितृसत्तात्मक सोच पर गहरी चोट की है और अब लोग बेटियों को घर की लक्ष्मी के साथ-साथ घर का गौरव भी मानने लगे हैं।
सुकन्या समृद्धि और मुद्रा योजना का असर
सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए पीएम ने बताया कि सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से करोड़ों बेटियों का भविष्य सुरक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि बेटियों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने पर भी ध्यान दे रही है। मुद्रा योजना के तहत दिए गए ऋणों में से 70 प्रतिशत से अधिक महिला उद्यमियों को मिले हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की बेटियां अब केवल नौकरी मांगने वाली नहीं, बल्कि नौकरी देने वाली बन रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक स्वतंत्रता ही वास्तविक सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।
अंतरिक्ष से लेकर सरहद तक
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि आज भारतीय वायुसेना से लेकर स्टार्टअप ईकोसिस्टम तक, बेटियाँ नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं। उन्होंने लड़ाकू विमानों को उड़ाने वाली महिला पायलटों और इसरो की महिला वैज्ञानिकों की सफलता का उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत की बेटियां ओलंपिक में पदकों की झड़ी लगा देंगी और विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार लेकर आएंगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी प्रतिभा को पहचानें और सीमाओं को तोड़कर आगे बढ़ें।
डिजिटल इंडिया के साथ जुड़ाव
हालांकि उपलब्धियां गर्व करने लायक हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने सामाजिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने समाज के हर नागरिक से अपील की कि वे रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ें और बेटियों को बेटों के समान ही संसाधन उपलब्ध कराएं। सरकार अब तकनीक और डिजिटल शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को जोड़ने की योजना बना रही है। ‘स्टेम’ (STEM) शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है ताकि वे आने वाले भविष्य की तकनीक का नेतृत्व कर सकें।
’विकसित भारत’ की ओर कदम
पीएम मोदी के इस बयान को विशेषज्ञों द्वारा एक बड़े सामाजिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का आगामी बजट और नीतियां संभवतः महिला उद्यमिता और उच्च शिक्षा में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित होंगी। प्रधानमंत्री ने अंत में एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा, “जब एक बेटी सशक्त होती है, तो वह केवल एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे समाज और सात पीढ़ियों को सशक्त बनाती है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत 2047’ का सपना तब तक अधूरा है जब तक हमारी बेटियाँ इस यात्रा में बराबर की साझीदार न हों।






