एआई से बदल रहा जीवन-स्तर ‘जीविका दीदियों’ के लिए वर्चुअल ट्रेनर से रोजगार तक का नया अवसर

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संवाद 24 बिहार। बिहार सरकार की जीविका योजना अब एक नई तकनीकी क्रांति के साथ आगे बढ़ रही है, जिसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, डिजिटल कौशल सम्पन्न और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस पहल के तहत ‘जीविका दीदियों’ को अब कम्प्यूटर या मोबाइल पर आधारित एआई-सहायता प्रणाली के जरिए वर्चुअल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे आसानी से व्यवसाय से जुड़े वित्त, लेखा-जोखा और प्रबंधन सीख सकेंगी।

वर्चुअल ट्रेनर से सीधा संवाद: सीखना हुआ आसान
यह एआई-आधारित वर्चुअल ट्रेनर एक डिजिटल सहायिका की तरह काम करेगा। यह महिलाओं से संवाद करके उनके सवालों को समझेगा और उसी के आधार पर उन्हें व्यवसायी निर्णयों, लेखा-जोखा, बजट प्रबंधन और उत्पाद/सेवा की योजना-बनावट तक की मदद करेगा। इसके ज़रिये महिलाएं बिना कागजी या जटिल प्रक्रियाओं के सीधे अपने कौशल को बढ़ा सकती हैं।

सिलाई से कृषि तक: हर क्षेत्र की मदद
वर्चुअल ट्रेनर का उद्देश्य सिर्फ तकनीकी जानकारी देना नहीं है बल्कि व्यवसाय संचालन के हर पक्ष में मार्गदर्शन देना है — चाहे वह सिलाई व्यवसाय हो, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उत्पादन, या घर-आधारित आईटी सेवा। महिलाओं को व्यवसाय की शुरुआती योजना, खर्च-लाभ का आंकलन, और ग्राहक संबंध प्रबंधन तक की सलाह मिलेगी।

एआई नहीं केवल तकनीक: यह सशक्तिकरण की कुंजी है
इस पहल का एक बड़ा फायदा यह है कि यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि व्यावसायिक आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाता है। डिजिटल ट्रेनिंग से दीदियाँ खुद से निर्णय ले सकेंगी, अपने उत्पाद/सेवा का बाजार शोध कर सकेंगी, और बेहतर ग्राहक जुड़ाव और बिक्री रणनीतियाँ विकसित कर सकेंगी।

आर्थिक सहायता: आसान लोन और अवसर
जीविका योजना के तहत महिलाएं लोन पाने में भी सहायता प्राप्त कर रही हैं। राज्य सरकार ने तय किया है कि पात्र महिलाओं को ₹15,000 से ₹2,00,000 तक के लोन आसान प्रक्रिया से दिये जाएंगे। इसके लिए पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन के लिये 150 मास्टर ट्रेनर का गठन भी किया गया है, जो दीदियों को आवेदन से लेकर राशि प्राप्ति तक का पूरा समर्थन देंगे।

दीदियों की कमाई में बढ़ोतरी — प्रेरणादायक बदलाव
राज्य के कई हिस्सों में महिलाएं पहले से ही इस पहल का लाभ उठा रही हैं। जहां पारंपरिक स्वरोजगार में वे औसतन ₹20,000-₹30,000 माह के आय अर्जित कर रही थीं, वहीं अब डिजिटल साधनों के साथ उनका आत्मविश्वास और आय दोनों बढ़ रही हैं। इससे परिवार और समाज के जीवन स्तर पर सकारात्मक असर दिख रहा है।

डिजिटल उद्यमियों की ओर एक बड़ा कदम
सरकार की नीति केवल लोन प्रदान करना नहीं बल्कि उन्हें डिजिटल उद्यमी बनाना भी है। इसका उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि महिलाएँ सोशल मीडिया, ऑनलाइन मार्केटप्लेस और डिजिटल मार्केटिंग तक पहुँच बनाकर अपने उत्पादों को व्यापक स्तर पर बेच सकें। इससे दीदियों को न सिर्फ आर्थिक बल्कि डिजिटल पहचान भी मिलेगी।

भविष्य की रणनीति और लक्ष्यों की दिशा
बिहार सरकार की योजना के अनुसार आने वाले महीनों में अधिक से अधिक ‘दीदियों’ तक यह प्रणाली पहुंचेगी, जो उन्हें न केवल लाभार्थी बनाएगी बल्कि स्वयं उद्यमी का दर्जा देगी। इससे महिलाओं की भूमिका ग्रामीण अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली बनेगी।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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