ड्रोन विवाद पर सियासी संग्राम: राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी का तीखा वार, बोली ‘भारत जानता है किसकी टीम से खेल रहे हो’
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संवाद 24 नई दिल्ली। ड्रोन तकनीक को लेकर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के उस कथन पर कड़ा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ड्रोन बनाना नहीं जानता। बीजेपी ने इस बयान को सेना और देश की क्षमताओं को कमतर आंकने वाला बताते हुए सीधा सवाल दागा—“भारत जानता है कि तुम असल में किसकी टीम के लिए खेल रहे हो, राहुल।”
बीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कहा कि जब भारतीय सेना तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बन रही है, तब इस तरह के बयान देश का मनोबल तोड़ने वाले हैं। पार्टी ने Bharatiya Janata Party की ओर से कहा कि राहुल गांधी की बातें हार स्वीकार करने जैसी हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
सेना प्रमुख के बयान का हवाला
बीजेपी ने भारतीय थलसेना प्रमुख Upendra Dwivedi के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि सेना की हर कमांड 5,000 ड्रोन बनाने में सक्षम है। इन ड्रोन की रेंज करीब 100 किलोमीटर तक है और ये सीमावर्ती इलाकों में खतरों को खत्म करने के साथ-साथ रक्षा खर्च में भी बड़ी बचत करेंगे।
पार्टी ने कहा कि यह बयान साफ दिखाता है कि भारत न केवल ड्रोन तकनीक समझता है, बल्कि उसे युद्धक जरूरतों के अनुसार विकसित भी कर रहा है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना न्यू नॉर्मल
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय सेना के लिए एक नया मानक स्थापित किया है। उनके मुताबिक, इस ऑपरेशन ने सेना की तेज प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और सटीक कार्रवाई की क्षमता को उजागर किया है, जो एक परिपक्व और आत्मविश्वासी बल की पहचान है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना अब केवल मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रही है। इसी क्रम में भैरव बटालियन, अशनि प्लाटून, शक्तिबान रेजीमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई संरचनाएं खड़ी की गई हैं, जो तकनीक-सक्षम और मिशन-केंद्रित सेना की दिशा में बड़ा कदम हैं।
सियासत बनाम सैन्य क्षमता
बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी के बयान न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत हैं, बल्कि वे ऐसे समय पर आए हैं जब भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पार्टी ने कहा कि सेना की बढ़ती ताकत पर सवाल उठाना सीधे तौर पर जवानों के मनोबल को प्रभावित करता है।
ड्रोन तकनीक को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य क्षमता के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है, जहां सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।






