
संवाद 24 डेस्क। भारतीय खानपान की समृद्ध परंपरा में शक्करपारा एक ऐसा लोकप्रिय मीठा व्यंजन है, जो अपनी सादगी, कुरकुरी बनावट और लाजवाब स्वाद के कारण पीढ़ियों से लोगों की पसंद बना हुआ है। मैदा, चीनी, घी और कुछ सामान्य सामग्री से तैयार होने वाला शक्करपारा त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और विशेष अवसरों पर खूब बनाया जाता है। उत्तर भारत के अनेक घरों में दिवाली, होली तथा अन्य उत्सवों के दौरान इसे बनाने की परंपरा देखने को मिलती है। इसकी खासियत यह है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के उद्देश्य से भी तैयार किया जा सकता है, बशर्ते इसे सही तरीके से पकाया और संग्रहित किया जाए। चाय के साथ परोसा जाने वाला शक्करपारा स्वाद के साथ घरेलू पाक-कला की उस विरासत को भी सामने लाता है, जिसमें साधारण सामग्री से स्वादिष्ट पकवान बनाने की कला शामिल है।
क्या है शक्करपारा और क्यों है इसकी इतनी लोकप्रियता?
शक्करपारा मुख्य रूप से मैदा या गेहूँ के आटे से बनाया जाने वाला मीठा, कुरकुरा और छोटे आकार का पारंपरिक पकवान है। इसे तैयार करने के लिए आटे में घी या तेल का मोयन मिलाया जाता है। इसके बाद चीनी और पानी अथवा दूध की सहायता से आटा गूँथा जाता है। तैयार आटे को बेलकर छोटे चौकोर, आयताकार या हीरे के आकार में काटा जाता है और फिर तेल या घी में सुनहरा होने तक तला जाता है। कुछ विधियों में तले हुए टुकड़ों पर चीनी की चाशनी चढ़ाई जाती है, जिससे उनकी सतह पर मिठास की एक परत बन जाती है।
शक्करपारे की लोकप्रियता का प्रमुख कारण इसकी सरल विधि और आसानी से उपलब्ध सामग्री है। इसे बनाने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती। थोड़ी-सी सावधानी और सही तापमान के साथ घर पर भी बाजार जैसे कुरकुरे शक्करपारे बनाए जा सकते हैं। इसकी मिठास को अपनी पसंद के अनुसार कम या अधिक करना भी संभव है।
भारतीय त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा शक्करपारा
भारतीय घरों में त्योहारों के अवसर पर मिठाइयाँ और नमकीन तैयार करने की परंपरा काफी पुरानी है। पहले के समय में परिवार विशेष अवसरों के लिए बड़ी मात्रा में ऐसे व्यंजन बनाते थे, जिन्हें कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सके। शक्करपारा भी इसी परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
त्योहारों पर शक्करपारा तैयार करना परिवार के सदस्यों के एक साथ समय बिताने का अवसर बन जाता है। कोई आटा गूँथता है, कोई उसे बेलता है और कोई छोटे-छोटे टुकड़े काटने में सहायता करता है। तैयार होने के बाद इसे मेहमानों को परोसने, रिश्तेदारों को देने या चाय के साथ खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी विधि और स्वाद में विविधता देखने को मिलती है। कहीं इसे साधारण मीठे आटे से बनाया जाता है, तो कहीं चीनी की चाशनी में लपेटकर तैयार किया जाता है। यही विविधता इसे भारतीय घरेलू खानपान का लोकप्रिय हिस्सा बनाती है।
शक्करपारा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
लगभग चार से पाँच लोगों के लिए शक्करपारा तैयार करने हेतु निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी। मात्रा टुकड़ों के आकार और तैयार होने वाली कुल मात्रा के अनुसार बदल सकती है।
मैदा: 2 कप
बारीक चीनी: आधा कप
घी या रिफाइंड तेल: 4 बड़े चम्मच
दूध या पानी: लगभग आधा कप
इलायची पाउडर: एक चौथाई छोटा चम्मच
नमक: एक छोटी चुटकी, वैकल्पिक
तलने के लिए तेल या घी: आवश्यकतानुसार
मैदे की जगह गेहूँ का आटा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे शक्करपारे की बनावट और स्वाद में थोड़ा अंतर आएगा। इलायची पाउडर मिठाई में सुगंध बढ़ाता है, जबकि घी का मोयन कुरकुरापन लाने में सहायता करता है। दूध के स्थान पर पानी का प्रयोग भी किया जा सकता है। ध्यान रहे कि दूध से तैयार शक्करपारों में नमी और भंडारण की स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सही आटा तैयार करना है बेहतरीन शक्करपारे का पहला कदम
शक्करपारा बनाने की शुरुआत मैदा छानने से करें। एक बड़े बर्तन में मैदा डालें और उसमें घी या तेल मिलाएँ। दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़कर मिलाने से चिकनाई आटे में समान रूप से फैल जाती है। आटे को मुट्ठी में दबाने पर यदि वह हल्का बँधने लगे, तो मोयन का अनुपात उचित हो सकता है।
अब इसमें बारीक चीनी और इलायची पाउडर मिलाएँ। यदि चीनी के दाने बड़े हैं, तो उसे दूध या पानी में घोलकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा तरल पदार्थ डालते हुए आटा गूँथें। ध्यान रखें कि पूरा पानी एक साथ न डालें, क्योंकि मैदे की पानी सोखने की क्षमता अलग-अलग हो सकती है।
शक्करपारे के लिए सामान्य रोटी के आटे से थोड़ा सख्त आटा बेहतर रहता है। बहुत मुलायम आटा तलने के दौरान टुकड़ों की बनावट को प्रभावित कर सकता है। आटा तैयार होने के बाद इसे ढककर लगभग 15 से 20 मिनट तक रख दें। इससे आटे को स्थिर होने और बेलने में आसानी मिलती है।
आटे को बेलने और आकर्षक आकार देने की विधि
आटा तैयार होने के बाद इसे दो या तीन बराबर भागों में बाँट लें। एक भाग को चकले पर रखकर बेलन की सहायता से मध्यम मोटाई की रोटी बेलें। रोटी को बहुत पतला रखने से शक्करपारे अधिक सख्त हो सकते हैं, जबकि बहुत मोटे टुकड़ों को अंदर तक पकने में अधिक समय लग सकता है।
अब चाकू या पिज्जा कटर से रोटी को लंबी पट्टियों में काटें। इसके बाद आड़ी दिशा में काटकर छोटे चौकोर या आयताकार टुकड़े बना लें। चाहें तो इन्हें हीरे के आकार में भी काट सकते हैं। सभी टुकड़ों का आकार लगभग समान रखने से वे एक समान गति से पकते हैं।
कटे हुए टुकड़ों को हल्के हाथ से अलग कर लें, ताकि वे आपस में चिपके न रहें। इस चरण में धैर्य रखना जरूरी है, क्योंकि आकार और मोटाई का सीधा प्रभाव तैयार शक्करपारों की बनावट पर पड़ता है।
शक्करपारे तलने की सही तकनीक
एक गहरी कड़ाही में पर्याप्त तेल या घी डालकर मध्यम आँच पर गर्म करें। तेल बहुत अधिक गर्म नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे शक्करपारे बाहर से जल्दी सुनहरे हो सकते हैं और अंदर से ठीक तरह नहीं पक पाएँगे। दूसरी ओर, बहुत ठंडे तेल में तलने से वे अधिक तेल सोख सकते हैं।
तेल तैयार होने पर उसमें थोड़े-थोड़े शक्करपारे डालें। कड़ाही में एक बार में बहुत अधिक टुकड़े डालने से तेल का तापमान गिर सकता है। इसलिए उन्हें बैच में तलना बेहतर है।
शक्करपारों को धीमी से मध्यम आँच पर तलते हुए बीच-बीच में पलटते रहें। जब उनका रंग हल्का सुनहरा हो जाए और सतह कुरकुरी दिखाई देने लगे, तब उन्हें निकाल लें। उन्हें बहुत गहरा भूरा होने तक तलने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि गर्म तेल से निकालने के बाद भी उनका रंग थोड़ा गहरा हो सकता है।
तैयार शक्करपारों को छलनी या छेददार कलछी की सहायता से निकालकर अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसके बाद उन्हें एक बड़ी प्लेट में फैलाकर पूरी तरह ठंडा होने दें।
चाशनी वाले शक्करपारे बनाने का आसान तरीका
यदि आप अधिक मीठे और चीनी की परत वाले शक्करपारे पसंद करते हैं, तो चाशनी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित सामग्री लें।
चीनी: 1 कप
पानी: आधा कप
इलायची पाउडर: एक चुटकी, वैकल्पिक
तले हुए शक्करपारे: आवश्यकतानुसार
एक कड़ाही में चीनी और पानी डालकर मध्यम आँच पर गर्म करें। चीनी घुलने के बाद मिश्रण को कुछ देर पकाएँ, ताकि चाशनी हल्की गाढ़ी हो जाए। बहुत पतली चाशनी शक्करपारों पर टिक नहीं पाएगी, जबकि बहुत गाढ़ी चाशनी जल्दी जम सकती है।
अब तैयार शक्करपारे चाशनी में डालें और धीरे-धीरे मिलाएँ, ताकि सभी टुकड़ों पर समान रूप से चाशनी चढ़ जाए। इसके बाद इन्हें अलग-अलग फैलाकर ठंडा होने दें। ठंडा होने पर चीनी की परत जमने लगती है और शक्करपारे आकर्षक दिखाई देते हैं।
चाशनी की मात्रा और गाढ़ेपन के अनुसार मिठास बदल सकती है। इसलिए पहली बार बनाते समय चाशनी को बहुत अधिक गाढ़ा करने के बजाय हल्का गाढ़ा रखना बेहतर है।
शक्करपारे को कुरकुरा बनाने के खास सुझाव
शक्करपारे का स्वाद और बनावट बेहतर बनाने के लिए कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मोयन सही रखें: घी या तेल का उचित अनुपात शक्करपारे की खस्ता बनावट में सहायता करता है।
आटा थोड़ा सख्त गूँथें: बहुत मुलायम आटा टुकड़ों को सही आकार में बनाए रखना कठिन कर सकता है।
समान मोटाई रखें: इससे सभी टुकड़े लगभग एक समान समय में पकते हैं।
तापमान नियंत्रित रखें: बहुत तेज आँच पर तलने से बाहरी हिस्सा जल्दी गहरा हो सकता है।
छोटे बैच में तलें: इससे टुकड़ों को पलटना और समान रूप से तलना आसान रहता है।
पूरी तरह ठंडा करें: गर्म शक्करपारों को तुरंत बंद डिब्बे में रखने से नमी जमा हो सकती है।
स्वाद के लिए प्रयोग करें: इलायची के साथ थोड़ी सौंफ मिलाने से सुगंध में बदलाव लाया जा सकता है।
इन उपायों को अपनाकर घर पर तैयार शक्करपारों की गुणवत्ता और स्वाद को बेहतर बनाया जा सकता है।
शक्करपारा बनाते समय किन गलतियों से बचें?
कई बार शक्करपारे अपेक्षा के अनुसार कुरकुरे नहीं बनते। इसका एक कारण आटे में जरूरत से अधिक पानी डालना हो सकता है। बहुत नरम आटे से बने टुकड़े तलते समय अपना आकार खो सकते हैं। इसी तरह, तेल का तापमान बहुत अधिक होने पर शक्करपारे बाहर से जल्दी रंग पकड़ लेते हैं, लेकिन भीतर से अच्छी तरह नहीं पकते।
दूसरी सामान्य गलती है चाशनी को जरूरत से ज्यादा पकाना। इससे चीनी की परत बहुत कठोर हो सकती है या टुकड़ों पर समान रूप से नहीं चढ़ती। चाशनी में शक्करपारे डालते समय उन्हें हल्के हाथ से मिलाएँ, ताकि वे टूटें नहीं।
इसके अलावा, तलने के लिए साफ तेल का इस्तेमाल करें। बार-बार गर्म किए गए तेल में तलने से स्वाद और खाद्य गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कड़ाही में पर्याप्त जगह रखने से टुकड़े आपस में चिपकने से बचते हैं और समान रूप से पकते हैं।
शक्करपारे को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?
शक्करपारे को कुछ समय तक सुरक्षित रखने के लिए भंडारण का सही तरीका अपनाना आवश्यक है। सबसे पहले तले हुए शक्करपारों को पूरी तरह ठंडा होने दें। इसके बाद उन्हें साफ, सूखे और हवा बंद डिब्बे में रखें। डिब्बे को नमी, सीधी धूप और गर्मी से दूर रखना बेहतर है।
यदि शक्करपारों में दूध का इस्तेमाल किया गया है या उनमें नमी बची हुई है, तो उनकी भंडारण अवधि कम हो सकती है। इसलिए इन्हें कम मात्रा में बनाना और उचित समय के भीतर इस्तेमाल करना उपयोगी है। शक्करपारों में असामान्य गंध, फफूँद या स्वाद में बदलाव दिखाई देने पर उन्हें नहीं खाना चाहिए।
त्योहारों के लिए इन्हें पहले से बनाया जा सकता है, लेकिन कुरकुरापन बनाए रखने के लिए पूरी तरह ठंडा करना और सूखे डिब्बे में रखना सबसे महत्त्वपूर्ण है। भंडारण की वास्तविक अवधि सामग्री, नमी और तैयारी की विधि पर निर्भर करती है।
शक्करपारे का पोषण मूल्य और सेवन में संतुलन
शक्करपारा मुख्य रूप से मैदा या आटा, चीनी और घी अथवा तेल से तैयार होता है। इसलिए इसमें कार्बोहाइड्रेट और वसा प्रमुख रूप से पाए जाते हैं। चीनी ऊर्जा प्रदान करती है, जबकि घी और तेल से वसा प्राप्त होती है। गेहूँ के आटे से बनाए गए शक्करपारों में मैदे की तुलना में कुछ अधिक आहारीय रेशा हो सकता है।
हालाँकि, शक्करपारा एक मीठा और तला हुआ खाद्य पदार्थ है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना उचित है। इसे रोजमर्रा के पौष्टिक भोजन का विकल्प बनाने के बजाय कभी-कभार मिठाई के रूप में आनंद लेकर खाया जा सकता है। घर पर बनाते समय चीनी और घी की मात्रा को अपनी पसंद के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है। फिर भी कम चीनी डालने से इसकी कुल ऊर्जा अपने आप कम नहीं हो जाती, क्योंकि मैदा और तेल भी ऊर्जा प्रदान करते हैं।
शक्करपारे परोसने के आकर्षक तरीके
शक्करपारे को चाय, दूध या अन्य गर्म पेय के साथ परोसना एक लोकप्रिय तरीका है। त्योहारों पर इन्हें सूखे मेवों, नमकीन और दूसरी घरेलू मिठाइयों के साथ सजाकर रखा जा सकता है। अलग-अलग आकारों में काटकर इन्हें बच्चों के लिए भी आकर्षक बनाया जा सकता है।
यदि शक्करपारे उपहार में देने हों, तो उन्हें पूरी तरह ठंडा करके साफ और सूखे खाद्य-उपयुक्त डिब्बे में पैक करें। छोटे सजावटी डिब्बों या पारंपरिक पैकेजिंग में रखने से ये त्योहारों के लिए अच्छा घरेलू उपहार बन सकते हैं।
आधुनिक रसोई में कुछ लोग इन पर हल्की पिसी चीनी या इलायची की सुगंध भी पसंद करते हैं। फिर भी शक्करपारे की पारंपरिक पहचान उसके सुनहरे रंग, सरल सामग्री और कुरकुरे स्वाद में ही छिपी है।
सादगी में छिपा स्वाद का उत्सव
शक्करपारा भारतीय पारंपरिक खानपान की ऐसी मिठाई है, जिसमें सामान्य सामग्री को सही तकनीक और धैर्य के साथ स्वादिष्ट बनाया जाता है। आटा गूँथने से लेकर टुकड़े काटने, धीमी आँच पर तलने और चाशनी चढ़ाने तक हर चरण इसके अंतिम स्वाद और बनावट को प्रभावित करता है। सही मोयन, संतुलित मिठास, नियंत्रित तापमान और उचित भंडारण से घर पर भी स्वादिष्ट शक्करपारे तैयार किए जा सकते हैं।
यह व्यंजन त्योहारों की रौनक बढ़ाने के साथ-साथ पारिवारिक पाक-परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर भी देता है। चाहे इसे साधारण चीनी वाले रूप में बनाया जाए या चाशनी की मीठी परत के साथ, शक्करपारा अपनी सादगी और कुरकुरेपन से लोगों को आकर्षित करता है। यही कारण है कि आधुनिक मिठाइयों के दौर में भी यह पारंपरिक पकवान अपनी खास पहचान बनाए हुए है।






