
संवाद 24 मणिपुर। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष और हिंसा की लपटें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। राज्य के कांगपोकपी जिले में मंगलवार की सुबह अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने कुकी समुदाय के एक 45 वर्षीय व्यक्ति की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी। यह घटना ऐसे समय में हुई जब एक दिन पहले ही जिले में लकड़ी इकट्ठा करने गए तीन मैतेई ग्रामीणों पर घात लगाकर हमला किया गया था और उनकी हत्या कर दी गई थी। ताबड़तोड़ हुई इन घटनाओं और उखरुल जिले में छह घरों को आग के हवाले किए जाने की खबरों के बाद घाटी और पहाड़ी दोनों इलाकों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों ने अतिरिक्त चौकसी बढ़ा दी है।
जंगल में आजीविका जुटाने गए थे, घात लगाकर हुआ हमला
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतक की पहचान पी. मोल्डिंग गांव निवासी पाओलेन खोंगसाई (उम्र 45 वर्ष) के रूप में की गई है। मंगलवार सुबह लगभग आठ बजे पाओलेन अपने एक अन्य साथी के साथ लेइमाखोंग पुलिस थाने से लगभग 13 किलोमीटर दूर घने वन क्षेत्र में बांस की कोपलें (bamboo shoots) इकट्ठा करने गए थे। इसी दौरान घने जंगलों में छिपे अज्ञात उग्रवादियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। गोलियों की आवाज सुनकर पाओलेन का साथी किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहा, लेकिन पाओलेन मौके पर ही गंभीर रूप से घायल हो गए और दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। लेइमाखोंग थाना पुलिस ने मामले में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज कर इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
24 घंटे के पूर्ण बंद का ऐलान, जनजीवन प्रभावित
कांगपोकपी में हुई इस हत्या के तुरंत बाद कुकी-जो समुदाय के प्रमुख संगठन ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (COTU) ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने घटना के विरोध में कांगपोकपी जिले में 24 घंटे के पूर्ण बंद (टोटल शटडाउन) का आह्वान किया। यह बंद मंगलवार आधी रात से लागू हुआ है। बंद के दौरान बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और निजी वाहन पूरी तरह बंद रहे, हालांकि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और अनिवार्य जीवनरक्षक गतिविधियों को छूट दी गई है। उधर, इंफाल घाटी के पांच जिलों में एक दिन पहले मारे गए तीन मैतेई ग्रामीणों की हत्या के विरोध में पहले से ही 48 घंटे की आम हड़ताल जारी थी। दोनों समुदायों के बीच एक के बाद एक हुई हत्याओं ने राज्य में फिर से अशांति का माहौल पैदा कर दिया है। स्थानीय संगठनों ने नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताते हुए शांति बहाली की तत्काल मांग की है।
उखरुल में आगजनी और थौबल में गिरफ्तारियां
इस बीच, उखरुल जिले से भी छह घरों में आग लगाए जाने की अप्रिय घटना की सूचना मिली, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई। दूसरी ओर, थौबल जिले में दो गुटों के बीच हुए हिंसक टकराव के बाद सुरक्षा बलों ने बड़ा तलाशी अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अभियान के दौरान 146 से अधिक घरों की सघन तलाशी ली गई और 300 से अधिक लोगों की पहचान का सत्यापन किया गया। पूछताछ के लिए चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें से दो को मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है।
शांति स्थापना के प्रयासों को लगा झटका
मणिपुर में महीनों से शांति स्थापना के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई प्रयास चल रहे हैं, लेकिन छिटपुट हिंसा और लक्षित हत्याओं के नए मामलों ने स्थिति को फिर से संवेदनशील बना दिया है। पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही गोलीबारी ने आम नागरिकों के सामान्य जीवन को बुरी तरह बाधित कर दिया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा गश्त बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए निगरानी कड़ी कर दी है।






