
संवाद 24 डेस्क। मेकअप केवल चेहरे की कमियों को छिपाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व को निखारने और प्राकृतिक सुंदरता को उभारने की एक कलात्मक प्रक्रिया भी है। आधुनिक मेकअप में ऐसे अनेक उत्पाद उपलब्ध हैं जो चेहरे के विभिन्न हिस्सों को आकर्षक बनाते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण उत्पाद है हाइलाइटर (Highlighter)।
हाइलाइटर एक ऐसा कॉस्मेटिक उत्पाद है जिसका मुख्य उद्देश्य चेहरे के उन हिस्सों पर प्रकाश की प्राकृतिक चमक उत्पन्न करना है जहाँ सामान्यतः रोशनी सबसे पहले पड़ती है। सही स्थान पर और उचित मात्रा में लगाया गया हाइलाइटर चेहरे को अधिक ताज़गीभरा, आकर्षक, युवा तथा त्रिआयामी (Three-dimensional) रूप प्रदान करता है। यह केवल ग्लैमर बढ़ाने का साधन नहीं, बल्कि चेहरे की बनावट (Facial Structure) को संतुलित ढंग से उभारने का भी प्रभावी माध्यम है।
आज हाइलाइटर का उपयोग केवल फिल्म कलाकारों, मॉडल्स या मेकअप विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रह गया है। दैनिक जीवन, कार्यालय, विवाह समारोह, फैशन कार्यक्रम, फोटोशूट तथा सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण तक इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ी है। विभिन्न त्वचा प्रकारों, रंगों और अवसरों के अनुसार हाइलाइटर के अनेक रूप और शेड उपलब्ध हैं, जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपनी आवश्यकता के अनुसार इसका चयन कर सकता है।
हाइलाइटर क्या है?
हाइलाइटर एक ऐसा सौंदर्य प्रसाधन है जिसमें अत्यंत सूक्ष्म प्रकाश-परावर्तक (Light Reflecting) कण सम्मिलित होते हैं। ये कण त्वचा पर प्रकाश को परावर्तित करके प्राकृतिक चमक का आभास उत्पन्न करते हैं। इसका उद्देश्य चेहरे को कृत्रिम रूप से चमकदार बनाना नहीं बल्कि स्वस्थ, दमकती और संतुलित त्वचा का प्रभाव देना होता है।
यह सामान्यतः चेहरे के उन भागों पर लगाया जाता है जहाँ प्राकृतिक रूप से प्रकाश पड़ता है, जैसे—
- गालों की ऊपरी हड्डियाँ (Cheekbones)
- नाक का मध्य भाग
- माथे का मध्य क्षेत्र
- भौंहों के नीचे
- होंठों के ऊपर का भाग (Cupid’s Bow)
- ठोड़ी का केंद्र
- आँखों के भीतरी कोने
इन स्थानों पर लगाया गया हाइलाइटर चेहरे की बनावट को अधिक स्पष्ट और आकर्षक बनाता है।
हाइलाइटर का इतिहास
चेहरे को चमकदार बनाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। मिस्र, यूनान और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं में महिलाएँ प्राकृतिक खनिजों, मोती के चूर्ण तथा पौधों से प्राप्त चमकदार पदार्थों का प्रयोग करती थीं।
बीसवीं शताब्दी में फिल्म उद्योग के विकास के साथ स्टूडियो लाइटिंग के अनुरूप चेहरे की संरचना को उभारने के लिए विशेष मेकअप तकनीकों का विकास हुआ। इसी दौरान आधुनिक हाइलाइटिंग तकनीक लोकप्रिय हुई।
समय के साथ सौंदर्य उद्योग ने पाउडर, क्रीम, लिक्विड तथा स्टिक स्वरूप में अनेक प्रकार के हाइलाइटर विकसित किए। आज इनका निर्माण अत्याधुनिक तकनीकों से किया जाता है जिससे त्वचा पर प्राकृतिक, संतुलित और लंबे समय तक टिकने वाली चमक प्राप्त होती है।
हाइलाइटर कैसे कार्य करता है?
हाइलाइटर का वैज्ञानिक आधार प्रकाश के परावर्तन (Reflection of Light) पर आधारित है।
जब किसी सतह पर प्रकाश पड़ता है, तो उसका एक भाग वापस परावर्तित होता है। हाइलाइटर में उपस्थित सूक्ष्म चमकीले कण इस परावर्तित प्रकाश को बढ़ा देते हैं, जिससे संबंधित भाग अधिक उभरा हुआ और चमकदार दिखाई देता है।
यही कारण है कि
- गाल अधिक ऊँचे प्रतीत होते हैं।
- नाक अधिक पतली दिखाई देती है।
- आँखें अधिक बड़ी और जीवंत लगती हैं।
- चेहरा अधिक संतुलित और आकर्षक दिखाई देता है।
हाइलाइटर के प्रमुख प्रकार
- पाउडर हाइलाइटर
यह सबसे अधिक लोकप्रिय प्रकार है।
विशेषताएँ
- उपयोग में आसान
- लंबे समय तक टिकता है
- तैलीय त्वचा के लिए उपयुक्त
- ब्रश द्वारा आसानी से लगाया जा सकता है
उपयोग
इसे प्रायः कॉम्पैक्ट या प्रेस्ड पाउडर के रूप में बनाया जाता है।
- लिक्विड हाइलाइटर
यह तरल रूप में उपलब्ध होता है।
विशेषताएँ
- प्राकृतिक चमक देता है
- त्वचा में आसानी से मिल जाता है
- सूखी त्वचा के लिए उपयुक्त
- फाउंडेशन के साथ मिलाकर भी लगाया जा सकता है
यह “ग्लोइंग स्किन” प्रभाव देने में अत्यंत लोकप्रिय है।
- क्रीम हाइलाइटर
यह क्रीम आधारित उत्पाद होता है।
विशेषताएँ
- त्वचा में आसानी से ब्लेंड हो जाता है।
- प्राकृतिक फिनिश देता है।
- सामान्य एवं शुष्क त्वचा के लिए उपयुक्त।
- उँगलियों अथवा स्पंज से लगाया जा सकता है।
- स्टिक हाइलाइटर
यह लिपस्टिक जैसी स्टिक में उपलब्ध होता है।
विशेषताएँ
- यात्रा में सुविधाजनक
- तुरंत उपयोग योग्य
- कम समय में मेकअप पूरा करने वालों के लिए उपयोगी
- बाम या ग्लास हाइलाइटर
हाल के वर्षों में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है।
इसमें चमकीले कण अपेक्षाकृत कम होते हैं तथा यह त्वचा को प्राकृतिक, नम (Dewy) और स्वस्थ चमक प्रदान करता है।
त्वचा के अनुसार सही हाइलाइटर का चयन
हर त्वचा समान नहीं होती, इसलिए सही हाइलाइटर का चयन अत्यंत आवश्यक है।
तैलीय त्वचा
ऐसी त्वचा में पहले से ही पर्याप्त चमक होती है।
उपयुक्त विकल्प—
- पाउडर हाइलाइटर
- हल्का शिमर
- मैट बेस के ऊपर प्रयोग
शुष्क त्वचा
शुष्क त्वचा पर पाउडर कभी-कभी रूखापन दिखा सकता है।
उपयुक्त विकल्प—
- लिक्विड हाइलाइटर
- क्रीम हाइलाइटर
- ड्यूई फिनिश
मिश्रित त्वचा
इस प्रकार की त्वचा में विभिन्न भागों की आवश्यकताएँ अलग होती हैं।
ऐसे में—
- गालों पर क्रीम
- टी-ज़ोन पर पाउडर
का संयोजन अच्छा परिणाम देता है।
संवेदनशील त्वचा
इस प्रकार की त्वचा के लिए—
- सुगंध रहित
- त्वचा विशेषज्ञ द्वारा परीक्षणित
- एलर्जी की संभावना कम वाले उत्पाद
का चयन करना चाहिए।
त्वचा के रंग के अनुसार हाइलाइटर
गोरी त्वचा
उपयुक्त शेड—
- पर्ल
- आइवरी
- शैम्पेन
- हल्का सिल्वर
गेहुँआ रंग
सबसे उपयुक्त-
- गोल्डन
- पीच
- रोज़ गोल्ड
साँवली त्वचा
इस रंग पर—
- ब्रॉन्ज
- कॉपर
- वार्म गोल्ड
- एम्बर
अत्यंत सुंदर दिखाई देते हैं।
गहरी त्वचा
उपयुक्त विकल्प—
- डीप गोल्ड
- ब्रॉन्ज
- महोगनी
- कॉपर
इनसे त्वचा की प्राकृतिक सुंदरता और अधिक उभरकर सामने आती है।
चेहरे पर हाइलाइटर लगाने के प्रमुख स्थान
सही स्थान पर लगाया गया हाइलाइटर ही प्रभावी परिणाम देता है।
- चीकबोन्स
यह सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
इससे चेहरा अधिक उभरा हुआ दिखाई देता है। - नाक
नाक के मध्य भाग पर हल्की रेखा लगाने से नाक अधिक संतुलित दिखाई देती है। - ब्राउ बोन
भौंहों के नीचे हल्का हाइलाइट लगाने से आँखें बड़ी और खुली हुई प्रतीत होती हैं। - आँखों के भीतरी कोने
इससे आँखों की थकान कम दिखाई देती है तथा चेहरा अधिक ताज़गीपूर्ण लगता है। - क्यूपिड्स बो
होंठों के ऊपर हल्का हाइलाइट लगाने से होंठ अधिक भरे हुए और आकर्षक दिखाई देते हैं।
हाइलाइटर लगाने की सही विधि: प्राकृतिक चमक पाने के चरण
हाइलाइटर का प्रभाव तभी आकर्षक दिखाई देता है जब उसे सही क्रम और सही तकनीक से लगाया जाए। अत्यधिक मात्रा या गलत स्थान पर लगाया गया हाइलाइटर चेहरे को असंतुलित बना सकता है। इसलिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना उपयोगी रहता है।
- त्वचा की तैयारी
मेकअप की शुरुआत हमेशा साफ त्वचा से करनी चाहिए। सबसे पहले चेहरे को उपयुक्त फेसवॉश से साफ करें। इसके बाद मॉइस्चराइज़र लगाएँ ताकि त्वचा मुलायम बनी रहे। यदि दिन में मेकअप किया जा रहा है तो सनस्क्रीन का प्रयोग भी आवश्यक है। - प्राइमर और बेस मेकअप
प्राइमर त्वचा की सतह को समान बनाता है तथा मेकअप को अधिक समय तक टिकने में सहायता करता है। इसके बाद आवश्यकता अनुसार फाउंडेशन और कंसीलर लगाएँ। यदि कॉन्टूर और ब्लश का प्रयोग करना हो तो उन्हें पहले लगाना अधिक उपयुक्त माना जाता है। - सही उपकरण का चयन
- पाउडर हाइलाइटर के लिए मुलायम फैन ब्रश या छोटा फ्लफी ब्रश।
- क्रीम और लिक्विड हाइलाइटर के लिए मेकअप स्पंज या साफ उँगलियाँ।
- स्टिक हाइलाइटर को सीधे त्वचा पर लगाकर हल्के हाथों से ब्लेंड किया जा सकता है।
- कम मात्रा से शुरुआत
हाइलाइटर का मूल सिद्धांत है—“कम लगाएँ, आवश्यकता हो तो बढ़ाएँ।” शुरुआत में बहुत कम मात्रा लें और धीरे-धीरे परत बढ़ाएँ। इससे परिणाम अधिक प्राकृतिक दिखाई देता है। - अच्छी तरह ब्लेंड करें
ब्लेंडिंग सबसे महत्वपूर्ण चरण है। हाइलाइटर और त्वचा के बीच कोई स्पष्ट रेखा दिखाई नहीं देनी चाहिए। सही ब्लेंडिंग से चमक त्वचा का स्वाभाविक हिस्सा लगती है।
हाइलाइटर और कॉन्टूर का संतुलन
मेकअप में हाइलाइटर और कॉन्टूर एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं।
- कॉन्टूर चेहरे के कुछ भागों को गहराई देता है।
- हाइलाइटर चेहरे के प्रमुख भागों को उभारता है।
उदाहरण के लिए यदि गालों के नीचे कॉन्टूर लगाया गया है तो गालों की ऊपरी हड्डी पर हाइलाइटर लगाने से चेहरा अधिक संतुलित और आकर्षक दिखाई देता है।
ब्लश और हाइलाइटर का संयोजन
ब्लश चेहरे में प्राकृतिक गुलाबीपन या रंगत जोड़ता है, जबकि हाइलाइटर उसी क्षेत्र को चमक प्रदान करता है।
सामान्य क्रम—
- फाउंडेशन
- कॉन्टूर
- ब्लश
- हाइलाइटर
इस क्रम से मेकअप अधिक संतुलित दिखाई देता है।
विभिन्न अवसरों के अनुसार हाइलाइटर
दैनिक उपयोग
दैनिक जीवन में हल्का और प्राकृतिक हाइलाइट पर्याप्त होता है। अत्यधिक चमक कार्यालय या सामान्य वातावरण में कृत्रिम लग सकती है।
कार्यालय
- हल्का शैम्पेन शेड
- सीमित मात्रा
- प्राकृतिक फिनिश
विवाह एवं उत्सव
विशेष अवसरों पर थोड़ा अधिक चमकदार हाइलाइटर लगाया जा सकता है ताकि कृत्रिम रोशनी और फोटोग्राफी में चेहरा दमकता हुआ दिखाई दे।
रात्रिकालीन समारोह
रात के कार्यक्रमों में गोल्डन, रोज़ गोल्ड या ब्रॉन्ज हाइलाइटर प्रभावशाली दिखाई देते हैं क्योंकि कृत्रिम प्रकाश में इनकी चमक अधिक उभरती है।
फोटोशूट
कैमरे की रोशनी को ध्यान में रखते हुए संतुलित मात्रा में हाइलाइटर लगाया जाता है। बहुत अधिक चमक फ्लैश में अस्वाभाविक दिखाई दे सकती है।
हाइलाइटर लगाते समय होने वाली सामान्य गलतियाँ
अत्यधिक मात्रा
बहुत अधिक हाइलाइटर लगाने से चेहरा तैलीय या अत्यधिक चमकीला प्रतीत हो सकता है।
गलत शेड का चयन
त्वचा के रंग से मेल न खाने वाला शेड प्राकृतिक प्रभाव को कम कर देता है।
ब्लेंड न करना
यदि हाइलाइटर को अच्छी तरह नहीं मिलाया जाता, तो यह त्वचा पर अलग परत जैसा दिखाई देता है।
पूरे चेहरे पर लगाना
हाइलाइटर केवल चयनित हाई पॉइंट्स पर लगाया जाना चाहिए। पूरे चेहरे पर इसका प्रयोग उचित नहीं माना जाता।
असमान प्रकाश में मेकअप
मेकअप हमेशा पर्याप्त प्राकृतिक या सफेद रोशनी में करना चाहिए ताकि परिणाम सही दिखाई दे।
हाइलाइटर की गुणवत्ता का महत्व
एक गुणवत्तापूर्ण हाइलाइटर—
- त्वचा पर समान रूप से फैलता है।
- बड़े चमकीले कणों के बजाय महीन प्रकाश परावर्तक कणों से बना होता है।
- लंबे समय तक टिकता है।
- त्वचा को भारी महसूस नहीं होने देता।
सस्ते या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद कभी-कभी त्वचा पर असमान चमक, जलन या एलर्जी का कारण बन सकते हैं।
हाइलाइटर का सुरक्षित उपयोग
- उत्पाद की समाप्ति तिथि अवश्य जाँचें।
- यदि त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है तो पहले पैच टेस्ट करें।
- मेकअप साझा करने से बचें।
- ब्रश और स्पंज नियमित रूप से साफ करें।
- आँखों के भीतर हाइलाइटर न जाने दें।
- रात में सोने से पहले मेकअप अवश्य हटाएँ।
क्या हर आयु में हाइलाइटर उपयोग किया जा सकता है?
हाँ, परंतु उपयोग की शैली आयु के अनुसार बदल सकती है।
- युवा त्वचा पर हल्का प्राकृतिक ग्लो पर्याप्त रहता है।
- परिपक्व त्वचा पर अत्यधिक चमकीले ग्लिटर वाले उत्पादों की बजाय सैटिन या सॉफ्ट फिनिश वाले हाइलाइटर अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।
हाइलाइटर से जुड़े कुछ प्रचलित मिथक
मिथक: हाइलाइटर केवल पेशेवर मेकअप के लिए है।
तथ्य: सही मात्रा में इसका उपयोग सामान्य दैनिक मेकअप में भी किया जा सकता है।
मिथक: अधिक चमक ही अच्छा हाइलाइटर है।
तथ्य: संतुलित और प्राकृतिक चमक अधिक आकर्षक मानी जाती है।
मिथक: हर व्यक्ति के लिए एक ही शेड उपयुक्त है।
तथ्य: त्वचा के रंग और अंडरटोन के अनुसार शेड बदलता है।
विशेषज्ञों के उपयोगी सुझाव
- हमेशा प्राकृतिक प्रकाश में अंतिम परिणाम देखें।
- कम मात्रा से शुरुआत करें।
- गुणवत्ता वाले ब्रश का उपयोग करें।
- दिन और रात के मेकअप में चमक की तीव्रता अलग रखें।
- त्वचा की नियमित देखभाल करें, क्योंकि स्वस्थ त्वचा पर हाइलाइटर अधिक सुंदर दिखाई देता है।
- यदि त्वचा पर बड़े रोमछिद्र या उभरे हुए दाग हैं, तो उन क्षेत्रों पर अत्यधिक हाइलाइटर लगाने से बचें।
हाइलाइटर आधुनिक मेकअप का एक महत्वपूर्ण और प्रभावी उत्पाद है, जो चेहरे के प्रमुख भागों को प्रकाश के माध्यम से उभारकर प्राकृतिक, स्वस्थ और आकर्षक रूप प्रदान करता है। इसकी सफलता केवल उत्पाद पर नहीं, बल्कि सही शेड के चयन, उचित मात्रा, सही स्थान और संतुलित ब्लेंडिंग पर निर्भर करती है।
चाहे दैनिक कार्यालयी मेकअप हो, पारिवारिक समारोह, विवाह, मंच प्रस्तुति या पेशेवर फोटोशूट—हर अवसर के लिए हाइलाइटर का उपयोग अलग शैली में किया जा सकता है। यदि इसे त्वचा के प्रकार, रंग और अवसर को ध्यान में रखकर लगाया जाए, तो यह चेहरे की सुंदरता को बिना कृत्रिम बनाए प्रभावशाली ढंग से निखारता है।
अंततः, हाइलाइटर का उद्देश्य केवल चमक पैदा करना नहीं, बल्कि चेहरे की प्राकृतिक विशेषताओं को संतुलित रूप से उभारना है। सही जानकारी, उचित तकनीक और संयमित उपयोग के साथ यह सौंदर्य प्रसाधन किसी भी मेकअप को अधिक आकर्षक, जीवंत और पेशेवर रूप प्रदान कर सकता है।






