
संवाद 24 मथुरा। वृंदावन में मंगलवार को 2024 बैच के नौ नव नियुक्त आईएएस अधिकारियों ने संत प्रेमानंद महाराज से भेंट कर सेवा और कर्तव्य को लेकर मार्गदर्शन प्राप्त किया। पोस्टिंग से पहले यह सभी अधिकारी बैच टॉपर शक्ति दुबे के साथ केली कुंज आश्रम पहुंचे थे। अधिकारियों का एक ही सवाल था कि वे अपने पद पर रहते हुए देश और समाज के लिए ईमानदारी से कैसे कार्य कर सकते हैं।
संत प्रेमानंद महाराज ने आईएएस अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि दो बातें मनुष्य को धर्म के मार्ग से गिरा देती हैं—लालच और डर। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी लालच में आकर गलत निर्णय लेता है या डर के कारण अपने कर्तव्य से पीछे हटता है, तो वही क्षण उसके पतन की शुरुआत बन जाता है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि वे किसी भी परिस्थिति में निर्दोष को दंडित न करें और दोषी को संरक्षण न दें।
प्रेमानंद महाराज ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे अर्जुन का कर्तव्य युद्ध करना था, वैसे ही अधिकारी का कर्तव्य है अपने पद और जिम्मेदारी का निष्ठा से निर्वहन करना। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देकर उसके कर्तव्य पथ पर लौटाया। उसी प्रकार अधिकारी को भी अपने दायित्वों का निर्वहन बिना भय और बिना प्रलोभन के करना चाहिए।
मुलाकात करने वाले सभी नौ आईएएस अधिकारी उत्तर प्रदेश कैडर के हैं और उनकी अभी तक तैनाती नहीं हुई है। बताया गया कि यह दौरा उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है, जिसके तहत वे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली, जमीनी चुनौतियों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने मथुरा आए थे। बैच टॉपर शक्ति दुबे प्रयागराज की रहने वाली हैं।
चार दिवसीय प्रशिक्षण दौरे के अंतिम दिन अधिकारियों ने पहले बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए और उसके बाद संत प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। अधिकारियों ने कहा कि इस संवाद से उन्हें अपने प्रशासनिक जीवन के लिए नैतिक स्पष्टता और आत्मबल मिला है, जो भविष्य में उनके निर्णयों की दिशा तय करेगा।






