
संवाद 24, लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक बदलावों के बाद अब योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली से लखनऊ तक इस मुद्दे पर अंदरखाने मंथन जारी है। माना जा रहा है कि संगठन पर्व के समापन और नए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद अब सरकार के स्तर पर भी बड़े बदलाव की पटकथा लिखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को जवाब देने के लिए कैबिनेट में सामाजिक संतुलन को नए सिरे से साधने की रणनीति पर काम कर रही है। संगठन में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को आगे बढ़ाने के संकेत पहले ही दिए जा चुके हैं और अब उसी तर्ज पर सरकार में भी जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों को मजबूत करने की तैयारी है।
हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख और स्वरूप को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कुछ भी साफ नहीं किया गया है, लेकिन चर्चा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह कवायद अहम मानी जा रही है। संभावित फेरबदल में कुर्मी समेत अन्य पिछड़ी जातियों और दलित वर्ग के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के स्थान पर युवा और सक्रिय विधायकों को मौका मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
भूपेंद्र चौधरी को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
प्रदेश अध्यक्ष पद से मुक्त होने के बाद भूपेंद्र चौधरी का सरकार में समायोजन लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि उन्हें मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जा सकता है। इसके अलावा करीब आधा दर्जन नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। वहीं, प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
क्षेत्रीय संतुलन पर भी नजर
संभावित विस्तार में सामाजिक समीकरण के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन पर भी खास जोर दिया जा रहा है। पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और मध्य यूपी को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने पर विचार चल रहा है। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच कई दावेदार विधायक दिल्ली और लखनऊ के चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं।
कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह संभावित विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 की राजनीतिक तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसकी पूरी तस्वीर आने वाले दिनों में साफ होने की उम्मीद है।






