
मथुरा में “फरसा वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध चंद्रशेखर दास महाराज का जीवन असाधारण त्याग और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक रहा। मूल रूप से फिरोजाबाद जनपद के नगला भूपल गांव से संबंध रखने वाले बाबा ने मात्र 11 वर्ष की आयु में ही घर छोड़ दिया था और जीवन को धर्म व गोसेवा के लिए समर्पित कर दिया था।परिवार के अनुसार, उन्होंने सांसारिक जीवन से पूरी तरह दूरी बना ली थी और विवाह तक नहीं किया। उनका मानना था कि उनका जीवन केवल गोमाता की सेवा के लिए है।
अयोध्या से मथुरा तक: ऐसे बनी ‘फरसा वाले बाबा’ की पहचान
घर छोड़ने के बाद बाबा अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने धार्मिक गतिविधियों और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में मथुरा में स्थायी रूप से रहकर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। फरसा (परशु) धारण करने की वजह से लोग उन्हें “फरसा वाले बाबा” के नाम से जानने लगे। समय के साथ वे गोसेवकों और स्थानीय लोगों के बीच एक प्रभावशाली धार्मिक व्यक्तित्व बन गए।
मौत के बाद भड़का आक्रोश, NH-19 पर लगा लंबा जाम
बाबा की मौत की खबर फैलते ही समर्थकों और गोसेवकों में भारी आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने आगरा-दिल्ली नेशनल हाईवे (NH-19) पर बाबा का शव रखकर जाम लगा दिया।सुबह से शुरू हुआ यह प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र हो गया और लगभग चार घंटे तक हाईवे पूरी तरह ठप रहा।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव, पथराव से बिगड़ी स्थिति
स्थिति उस समय नियंत्रण से बाहर हो गई जब पुलिस ने शव हटाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया और अचानक पथराव शुरू हो गया।पुलिस ने हालात संभालने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लिया, लेकिन भीड़ लगातार आक्रामक बनी रही।
इस हिंसक झड़प में 27 से अधिक पुलिसकर्मी और कई नागरिक घायल हो गए।
महिलाओं की भी भागीदारी, कई वाहन क्षतिग्रस्त
इस पूरे घटनाक्रम में हैरान करने वाली बात यह रही कि पथराव में कुछ महिलाएं भी शामिल रहीं। उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों समेत कई गाड़ियों को निशाना बनाया, जिससे भारी नुकसान हुआ। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई घंटों तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष चलता रहा।
प्रशासन का कड़ा एक्शन: 24 से ज्यादा लोग हिरासत में
घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने वीडियो फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर पथराव में शामिल लोगों की पहचान की और 24 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि आगे किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके।
गोसेवा और संघर्ष की विरासत छोड़ गए बाबा
चंद्रशेखर दास महाराज का जीवन त्याग, सेवा और संघर्ष का प्रतीक रहा। उन्होंने अपना पूरा जीवन गोसेवा को समर्पित कर दिया और समाज में एक अलग पहचान बनाई। उनकी अचानक मृत्यु ने जहां उनके अनुयायियों को झकझोर दिया, वहीं इसके बाद हुई हिंसा ने कानून-व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।फरसा वाले बाबा की मौत केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व के निधन की घटना नहीं रही, बल्कि इसके बाद भड़की हिंसा ने प्रशासनिक व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्षेत्र में शांति बहाल कर पाता है।






