यूपी में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, बागी विधायकों की वापसी पर टिकी नजरें

संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव से पहले होने जा रहे इन चुनावों को राजनीतिक दल प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रहे हैं। खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) के बागी विधायकों की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

सूत्रों के अनुसार सपा नेतृत्व ने पार्टी से बाहर गए विधायकों के लिए वापसी का रास्ता खुला रखा है। पार्टी का संकेत है कि जिन विधायकों ने पिछली बार क्रॉस वोटिंग की थी, वे यदि आगामी राज्यसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करते हैं तो उन्हें दोबारा संगठन में शामिल किया जा सकता है।

बताया जा रहा है कि कुछ बागी विधायक वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने सपा नेतृत्व से संपर्क भी साधा है। इस मुद्दे पर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि वापसी के लिए निष्ठा साबित करना अनिवार्य होगा।

फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशी विजयी हुए थे। उस चुनाव में सपा के सात विधायकों द्वारा भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मतदान किए जाने से परिणाम प्रभावित हुआ था। इसी क्रॉस वोटिंग के चलते भाजपा के प्रत्याशी संजय सेठ को जीत मिली, जबकि सपा के उम्मीदवार और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन पराजित हो गए थे।

इसके बाद सपा ने चार विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि अब बदली राजनीतिक परिस्थितियों में समीकरण फिर से बनते दिखाई दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश कोटे की राज्यसभा की 10 सीटें 25 नवंबर को रिक्त हो रही हैं। ऐसे में उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी विधायक सपा के पक्ष में मतदान करते हैं तो यह न केवल राज्यसभा के परिणामों को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बड़े राजनीतिक संकेत भी देगा।

राज्यसभा चुनाव भले ही अप्रत्यक्ष मतदान से होते हों, लेकिन इनके जरिए दलों की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती का आकलन किया जाता है। ऐसे में बागी विधायकों की वापसी सपा के लिए मनोबल बढ़ाने वाली साबित हो सकती है, वहीं सत्ताधारी दल के लिए यह चुनौतीपूर्ण संकेत माना जा सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें आगामी चुनावी अधिसूचना और संभावित प्रत्याशियों की घोषणा पर टिकी हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में और भी नए मोड़ आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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