रोबोटिक डॉग विवाद में घिरी गलगोटिया यूनिवर्सिटी, पेटेंट दावों पर उठे सवाल

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संवाद 24 ग्रेटर नोएडा। रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना कर रही है। आरोप है कि दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान प्रदर्शित रोबोटिक डॉग को यूनिवर्सिटी द्वारा स्वयं विकसित बताया गया, जबकि बाद में प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि रोबोटिक डॉग जनवरी 2026 में एक भारतीय कंपनी से खरीदा गया था और इसे छात्रों को नई तकनीक से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रदर्शित किया गया था।

यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार एआई समिट में मौजूद एक प्रतिनिधि द्वारा तकनीकी जानकारी के अभाव में गलत बयान दिया गया, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ। प्रबंधन ने कहा कि संबंधित प्रतिनिधि को मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं थी और इस गलती के लिए खेद व्यक्त किया गया है।

इस मामले के साथ ही यूनिवर्सिटी के पेटेंट आवेदनों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि संस्थान बड़ी संख्या में पेटेंट के लिए आवेदन करता है, लेकिन इनमें से अधिकांश आवेदन प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ पाते। हालांकि इस विषय पर यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है और कहा है कि कई परियोजनाओं पर काम जारी है।

वहीं, 350 करोड़ रुपये रोबोटिक डॉग पर खर्च किए जाने की खबरों को भी प्रबंधन ने खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह राशि एआई ब्लॉक और नई प्रयोगशालाओं के निर्माण तथा तकनीकी सुविधाओं के विकास पर निवेश की जा रही है, जिससे छात्रों को उन्नत तकनीकों पर शोध और प्रयोग करने का अवसर मिलेगा।

रोबोटिक डॉग विवाद और पेटेंट संबंधी आरोपों के बाद यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी दावों और शोध उपलब्धियों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि छात्रों और उद्योग जगत का भरोसा कायम रह सके।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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