
संवाद 24 संवाददाता। कानपुर में राज्य कर विभाग की सख्ती के बीच फर्जी जीएसटी फर्मों का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 425 फर्जी फर्मों का खुलासा किया है। इनमें से 309 फर्मों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है, जबकि 36 का पंजीकरण निलंबित किया गया है। शेष मामलों में भी कार्रवाई की तैयारी है।
जांच में करीब 369 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और टैक्स हेराफेरी का मामला सामने आया है। अधिकतर फर्में कागजों पर स्क्रैप, आयरन और स्टील के कारोबार में सक्रिय दिखाई जा रही थीं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक व्यापार नहीं हो रहा था।
कैसे चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल
अधिकारियों के अनुसार कई फर्में केवल बिलों के आदान-प्रदान के जरिए फर्जी आईटीसी का लाभ ले रही थीं। माल का वास्तविक परिवहन नहीं किया जाता था, बल्कि खरीद-बिक्री के फर्जी बिल बनाकर टैक्स क्रेडिट आगे ट्रांसफर किया जा रहा था। वर्ष 2025-26 में सामने आए 425 मामलों को केंद्रीय अधिकारियों को भी भेजा गया है। कार्रवाई के तहत आठ फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर मामले की गहन जांच कर रही है। 72 करोड़ की गड़बड़ी पहले भी पकड़ी जा चुकी वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी 36 फर्मों का पंजीकरण निरस्त कर 72 करोड़ रुपये की आईटीसी गड़बड़ी उजागर की गई थी। इससे स्पष्ट है कि फर्जी फर्मों के जरिए टैक्स चोरी का यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था।
प्रतिष्ठित पते का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि ‘कुमार इंटरप्राइजेज’ नामक फर्म ने स्वरूपनगर स्थित एक प्रतिष्ठित सीए के आवासीय पते का दुरुपयोग कर पंजीकरण कराया। दस्तावेजों में दिल्ली और बिहार की फर्मों से करोड़ों की खरीद दर्शाई गई, जबकि जीएसटीआर-2ए में कोई वास्तविक खरीद दर्ज नहीं थी।
इसके उलट जीएसटीआर-3बी में सैकड़ों करोड़ की बिक्री दिखाकर आईटीसी का लाभ लिया गया। अप्रैल 2025 में भी बिना खरीद के 54.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्शाई गई। निरीक्षण में पाया गया कि घोषित व्यापार स्थल वास्तव में एक आवासीय भवन है। किरायानामा, बिजली बिल और नोटरी दस्तावेजों में भी गड़बड़ियां मिलीं।
आगे क्या।
एसजीएसटी अधिकारियों का कहना है कि 24 अन्य मामलों में भी तहरीर दी गई है और जल्द ही एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। विभाग डेटा विश्लेषण, भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की गहन जांच के जरिए ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि फर्जी आईटीसी के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों पर अब कड़ी निगरानी और कठोर दंड तय है। कानपुर में हुई यह बड़ी कार्रवाई प्रदेश में टैक्स व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।






