जिद्दी मलेरिया पर निर्णायक प्रहार नई दवा को DCGI की मंजूरी, इलाज होगा ज्यादा असरदार

संवाद 24 संवाददाता। बार-बार लौटने वाले और सामान्य दवाओं से काबू में न आने वाले जिद्दी मलेरिया के इलाज में अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की एक्सपर्ट कमेटी एंड कोऑर्डिनेशन सेल ने मलेरिया के इलाज के लिए नए ड्रग कॉम्बिनेशन को मंजूरी दे दी है। यह फैसला उन मरीजों के लिए अहम माना जा रहा है, जिनमें मौजूदा इलाज के बावजूद मलेरिया बार-बार उभर आता है।

इस नए ड्रग कॉम्बिनेशन को लेकर आठ जनवरी को दिल्ली में एक्सपर्ट कमेटी की बैठक हुई थी। बैठक में देशभर के विशेषज्ञों ने मलेरिया के मौजूदा इलाज, उसकी सीमाओं और नए विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की। एक्सपर्ट कमेटी की सदस्य और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप-प्राचार्य डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि बैठक के बाद कंपनी को दवा के ट्रायल और आगे की प्रक्रिया के लिए मंजूरी दे दी गई है।

वर्तमान में मलेरिया के इलाज में दो प्रमुख सॉल्ट का उपयोग किया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मरीजों में इन दवाओं का असर कम हो जाता है। ऐसे मामलों में मलेरिया कुछ समय के लिए ठीक होकर दोबारा उभर आता है, जिसे रिलैप्स कहा जाता है। इसके अलावा कई मरीजों में बीमारी लंबा समय तक बनी रहती है, जिससे कमजोरी और जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

नई दवा में मौजूदा दो सॉल्ट के साथ एमोडियाक्वीन (Amodiaquine) को भी शामिल किया गया है। यह कॉम्बिनेशन मलेरिया पर अलग-अलग स्तर पर असर करेगा, जिससे दवा के प्रति विकसित हो चुकी रेजिस्टेंस को तोड़ने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया फार्मूला उन मामलों में ज्यादा प्रभावी होगा, जहां पारंपरिक इलाज असफल साबित हो रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत जैसे देश के लिए बेहद अहम है, जहां मलेरिया अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मलेरिया के रेसिस्टेंट मामलों की संख्या बढ़ने से चिंता बढ़ी है। नए ड्रग कॉम्बिनेशन से इलाज की सफलता दर बढ़ेगी और मरीजों को लंबे समय तक दवाएं लेने की जरूरत भी कम हो सकती है।

फिलहाल कंपनी को क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी गई है। ट्रायल के सफल रहने के बाद यह दवा आम मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह दवा अपेक्षित परिणाम देती है, तो यह मलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Pavan Singh
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