
संवाद 24 नई दिल्ली। जब पूरी दुनिया गहरी नींद में डूबी थी, तभी जापान के मध्य हिस्से में अचानक जमीन ऐसी थरथराई कि लाखों लोगों की नींद खौफनाक झटकों के साथ खुली। रविवार तड़के स्थानीय समयानुसार ठीक 1:04 बजे आए 5.7 तीव्रता के प्रचंड भूकंप ने मध्य जापान के एक बड़े भूभाग को हिलाकर रख दिया। कंपन इतना तेज और भयानक था कि घरों में रखे भारी सामान ताश के पत्तों की तरह गिरने लगे, दुकानों के बड़े-बड़े शीशे टूटकर सड़कों पर बिखर गए और इमारतों में मौजूद लोग जान बचाने के लिए बदहवास होकर बाहर की ओर भागे। इस अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा में कम से कम 22 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि कई इलाकों में संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है।
जमीन से 40 किमी नीचे था केंद्र, कई शहरों में भारी कंपन
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का मुख्य केंद्र शिजूओका प्रांत के पश्चिमी क्षेत्र में जमीन से लगभग 40 किलोमीटर नीचे स्थित था। वहीं, संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने रिक्टर स्केल पर इसकी शुरुआती तीव्रता 5.5 दर्ज की। जापान के अपने विशिष्ट भूकंपीय पैमाने (Shindo Scale) पर ऐची प्रांत के चिता शहर में कंपन की तीव्रता ‘अपर 5’ मापी गई, जो किसी भी संरचना को हिला देने के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। इसके अलावा नागानो, गिफू, हमामात्सु और ऐतिहासिक शहरों क्योटो व नारा तक धरती कांप उठी। यहां तक कि माउंट फूजी के निकटवर्ती यामानाशी प्रांत में भी लोगों ने तेज हलचल महसूस की।
चीख-पुकार, कांच के ढेर और सीढ़ियों पर मची भगदड़
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय जापानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, रात के सन्नाटे में जब झटके शुरू हुए, तो घरों की दीवारें चरमराने लगीं। कई किताबों की दुकानों में रैक से हजारों किताबें नीचे आ गिरीं, जिससे फर्श पर ढेर लग गए। कई रिहायशी इमारतों में सीढ़ियों से उतरते वक्त भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें फिसलने और गिरने से अधिकांश लोग चोटिल हुए। घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराया गया है, जहां आपातकालीन टीमें उनका इलाज कर रही हैं।
एक्शन में सरकार: इमरजेंसी ऑफिस एक्टिव, सुनामी का खतरा टला
भूकंप के तुरंत बाद जापानी प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फौरन एक ‘इमरजेंसी रेस्पॉन्स ऑफिस’ (आपातकालीन संपर्क एवं राहत कार्यालय) स्थापित किया गया। यह विशेष सेल प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग और बचाव कर्मियों के साथ मिलकर स्थिति का बारीकी से आकलन कर रहा है। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए देश की हाई-स्पीड शिंकानसेन बुलेट ट्रेनों की रफ्तार धीमी कर दी गई, ताकि रेलवे ट्रैक पर संभावित दरारों या क्षति की गहन जांच की जा सके। गनीमत यह रही कि शक्तिशाली झटके के बावजूद मौसम विभाग ने सुनामी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों नागरिकों ने राहत की सांस ली।
लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स: रिंग ऑफ फायर पर बना हुआ है डर
हालांकि, मुख्य झटके के बाद लगातार आए कई छोटे आफ्टरशॉक्स (हल्के झटकों) ने स्थानीय नागरिकों के मन में दहशत बनाए रखी है। मध्य जापान का यह इलाका अत्यधिक सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर बसा हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक इसी तरह के आफ्टरशॉक्स महसूस किए जा सकते हैं, इसलिए लोगों को सतर्क रहने और भारी सामान से दूर रहने की हिदायत दी गई है। लगातार निगरानी रखी जा रही है कि कहीं किसी प्रमुख बुनियादी ढांचे या पुलों में कोई आंतरिक दरार तो नहीं आई है। एक बार फिर इस घटना ने याद दिला दिया है कि पैसिफिक रिंग ऑफ फायर पर बसे इस देश में कुदरत का मिजाज कब करवट बदल ले, इसका सटीक अंदाजा लगाना आज भी विज्ञान के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।






