हवा में सुरक्षा से समझौता नामंजूर: दुबई से आई फ्लाइट के 8 क्रू मेंबर्स पर गिरी निलंबन की गाज, महज 35 मिनट की देरी ने बढ़ाई मुश्किलें

​संवाद 24 नई दिल्ली। विमानन क्षेत्र में यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और यही कारण है कि यहां नियमों में मामूली सी ढिलाई भी भारी पड़ सकती है। हाल ही में एअर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) में ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां समय सीमा के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाते हुए एयरलाइन प्रबंधन ने एक ही उड़ान के 8 क्रू सदस्यों को तत्काल प्रभाव से तीन महीने के लिए निलंबित कर दिया है। यह पूरी कार्रवाई उड़ान खत्म होने के बाद अनिवार्य ब्रेथ एनालाइजर (बीए) टेस्ट की प्रक्रिया में देरी करने के चलते की गई है।

​क्या है पूरा मामला?
​यह घटना 2 अगस्त को सामने आई, जब दुबई से अमृतसर के लिए संचालित एअर इंडिया एक्सप्रेस की अंतरराष्ट्रीय उड़ान सफलतापूर्वक अपनी मंजिल पर पहुंची थी। भारत के नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) और एयरलाइन के सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के उतरने के बाद चालक दल के सभी सदस्यों के लिए पोस्ट-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट और संबंधित घोषणापत्र (डिक्लेरेशन) जमा करना अनिवार्य होता है। ​नियमों के तहत इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए लैंडिंग के बाद अधिकतम दो घंटे का समय निर्धारित है। हालांकि, इस विशेष उड़ान के क्रू दल ने तय समय सीमा का पालन नहीं किया। क्रू सदस्यों ने आवश्यक डिक्लेरेशन तय समय के बजाय 2 घंटे 35 मिनट बाद जमा कराया – यानी इस पूरी औपचारिकता में लगभग 35 मिनट का विलंब दर्ज किया गया।

​तत्काल सक्रिय हुए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल
​विमानन सुरक्षा मानकों में समय की पाबंदी इतनी सख्त है कि महज 35 मिनट की इस देरी को भी गंभीर प्रक्रियात्मक चूक माना गया। जैसे ही निर्धारित समय सीमा पार हुई, एयरलाइन के कड़े सुरक्षा तंत्र स्वतः सक्रिय हो गए। नियमों के तहत जब कभी चालक दल तय समय के भीतर जांच में विफल रहता है, तो सुरक्षा के मद्देनजर साइकोएक्टिव (नशीले या मादक) पदार्थों के संभावित सेवन की जांच अनिवार्य कर दी जाती है। ​इसके तुरंत बाद संबंधित सभी 8 क्रू सदस्यों को मेडिकल परीक्षण और साइकोएक्टिव पदार्थों की गहन जांच से गुजरना पड़ा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी सदस्यों की मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह ‘नेगेटिव’ आई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि किसी भी सदस्य ने किसी प्रकार के नशीले पदार्थ अथवा शराब का सेवन नहीं किया था और वे शारीरिक रूप से नियमों के अनुकूल थे।

​रिपोर्ट निगेटिव, फिर भी निलंबन क्यों?
​अब सवाल उठता है कि जब जांच रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य और नेगेटिव थी, तो इतना कड़ा कदम क्यों उठाया गया? विमानन विशेषज्ञों और एयरलाइन सूत्रों के अनुसार, एविएशन इंडस्ट्री केवल परिणाम पर नहीं, बल्कि कठोर कार्यप्रणाली और समयबद्धता पर टिकी होती है। समय पर टेस्ट न कराना नियामक मानकों की अनदेखी मानी जाती है। ​प्रबंधन का मानना है कि नियमों में किसी भी प्रकार की शिथिलता भविष्य में बड़ी लापरवाही का रूप ले सकती है। यही वजह रही कि मेडिकल क्लीन चिट मिलने के बावजूद प्रक्रियात्मक चूक (Procedural Lapse) को गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। एयरलाइन प्रबंधन ने मामले की पूरी और विस्तृत रिपोर्ट नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को सौंप दी है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी 8 सदस्यों को 3 महीने के लिए सस्पेंड करने का फैसला लिया।

​यात्री सुरक्षा और विमानन नियमों का कड़ा संदेश
​विमान में सवार सैकड़ों मुसाफिरों की जान की जिम्मेदारी पायलट और केबिन क्रू पर होती है। ऐसे में उड़ान से पहले (प्री-फ्लाइट) और उड़ान के बाद (पोस्ट-फ्लाइट) ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं कि आसमान में उड़ने वाला कोई भी कर्मी मानसिक और शारीरिक रूप से 100% सतर्क हो। ​एअर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा की गई यह कड़ी कार्रवाई पूरे भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल और समय सीमा के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे व्यक्ति का ट्रैक रिकॉर्ड कितना भी साफ क्यों न रहा हो।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *