
संवाद 24 डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज होती दौड़ ने सेमीकंडक्टर उद्योग की दिशा भी बदल दी है। अब केवल चिप बनाना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा, बल्कि चिप डिजाइन, हाई-बैंडविड्थ मेमोरी, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिपलेट, सिस्टम आर्किटेक्चर और सॉफ्टवेयर जैसी क्षमताएं भी प्रतिस्पर्धा के केंद्र में आ गई हैं। इसी बदलते परिदृश्य में इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ति राय ने भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़े अवसरों की ओर ध्यान दिलाया है। SEMICON India 2026 के दौरान उन्होंने उद्योग के पिछले तीन दशकों के बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत को केवल चिप असेंबली या सामान्य मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सिलिकॉन और सिस्टम के बीच मौजूद अवसरों को विकसित करना चाहिए।
Intel से TSMC तक बदली चिप इंडस्ट्री की कहानी
निवृत्ति राय ने सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास को तीन बड़े चरणों में समझाया। उनके अनुसार 1995 से 2007 के दौरान पर्सनल कंप्यूटर के दौर में Intel जैसे Integrated Device Manufacturer यानी IDM मॉडल का दबदबा था। इस मॉडल में डिजाइन से लेकर निर्माण तक कई महत्वपूर्ण गतिविधियां एक ही कंपनी के नियंत्रण में रहती थीं।
इसके बाद 2008 से 2018 के बीच चिप निर्माण की जटिलता और लागत बढ़ने के साथ फाउंड्री तथा फैबलेस मॉडल का महत्व बढ़ा। Taiwan Semiconductor Manufacturing Company यानी TSMC जैसे फाउंड्री मॉडल ने उन कंपनियों को भी बाजार में तेजी से आगे बढ़ने का अवसर दिया, जो खुद फैक्ट्री चलाने के बजाय चिप डिजाइन पर ध्यान केंद्रित करती थीं। इसके बाद 2019 से 2025 के बीच AI और एडवांस्ड पैकेजिंग ने सेमीकंडक्टर उद्योग के अगले चरण को आकार देना शुरू किया।
AI ने क्यों बढ़ाई एडवांस्ड पैकेजिंग की अहमियत?
AI मॉडल को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। इसके लिए केवल तेज प्रोसेसर पर्याप्त नहीं होते। प्रोसेसर, मेमोरी और दूसरे कंप्यूटिंग घटकों के बीच डेटा को तेजी से स्थानांतरित करना भी जरूरी है। इसी वजह से हाई-बैंडविड्थ मेमोरी, 2.5D और 3D पैकेजिंग तथा चिपलेट आधारित डिजाइन जैसी तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है।
भारत सरकार के SEMICON India 2026 से जुड़े आधिकारिक विवरण में भी HBM, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिपलेट और heterogeneous integration को भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसरों में शामिल किया गया है।
एडवांस्ड पैकेजिंग का अर्थ केवल तैयार चिप को पैक करना नहीं है। आधुनिक पैकेजिंग में अलग-अलग चिप घटकों को इस तरह जोड़ा जा सकता है कि पूरा सिस्टम बेहतर प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता और कम संचार दूरी के साथ काम करे। AI हार्डवेयर की बढ़ती जरूरतों ने इस तकनीक को सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।
भारत के लिए ‘Nvidia Moment’ का मतलब क्या है?
निवृत्ति राय ने जिस ‘Nvidia Moment’ की बात की है, उसका अर्थ यह नहीं है कि भारत तत्काल Nvidia जैसी कंपनी बनने जा रहा है। उनके विचार का केंद्र यह है कि भारत अपनी इंजीनियरिंग प्रतिभा, घरेलू बाजार और तकनीकी क्षमताओं को जोड़कर सेमीकंडक्टर के उन क्षेत्रों में नई कंपनियां और उत्पाद विकसित कर सकता है, जहां अभी वैश्विक स्तर पर अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने इस संदर्भ में Silicon और Systems के बीच के ‘White Spaces’ को महत्वपूर्ण बताया। यानी चिप और अंतिम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के बीच डिजाइन, पैकेजिंग, सॉफ्टवेयर, आर्किटेक्चर और अनुप्रयोगों के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारतीय कंपनियां अपनी क्षमता विकसित कर सकती हैं।
भारत सिर्फ चिप असेंबली तक सीमित क्यों नहीं रहना चाहता?
सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला में डिजाइन, IP, EDA टूल्स, वेफर निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मेमोरी, उपकरण, रसायन और अंतिम सिस्टम जैसे अनेक चरण शामिल होते हैं। किसी एक क्षेत्र में क्षमता विकसित करना पूरे उद्योग के लिए पर्याप्त नहीं है।
भारत का India Semiconductor Mission भी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन का मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने को अपना लक्ष्य बताता है। इसके तहत सेमीकंडक्टर फैब, ATMP/OSAT, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और डिजाइन के लिए अलग-अलग सहायता योजनाएं बनाई गई हैं।
सरकार की मौजूदा रणनीति अब फैक्ट्री लगाने से आगे बढ़कर डिजाइन, उपकरण और सामग्री, फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग, एप्लाइड R&D और टैलेंट जैसे छह व्यापक क्षेत्रों पर केंद्रित है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत ने कितनी प्रगति की?
SEMICON India 2026 के आधिकारिक विवरण के अनुसार, Semicon 1.0 के तहत करीब 70,000 चिप-डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि लक्ष्य 85,000 डिजाइन इंजीनियरों का है। सरकार के अनुसार 12 स्वीकृत परियोजनाओं में से पांच इकाइयों ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
सरकार ने यह भी बताया कि Semicon 2.0 के तहत भारत का जोर व्यापक इकोसिस्टम विकसित करने पर है। इसमें केवल फैब या पैकेजिंग संयंत्र नहीं, बल्कि मशीनों, सामग्री, आपूर्ति शृंखला, डिजाइन, शोध और कुशल मानव संसाधन को भी शामिल किया गया है।
Tata-Nexperia साझेदारी से क्या संकेत मिलता है?
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका का एक ताजा उदाहरण Tata Electronics और Nexperia के बीच हुई रणनीतिक साझेदारी है। Reuters के अनुसार दोनों कंपनियों ने भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन और पैकेजिंग के लिए साझेदारी की है। इसके तहत Nexperia के पावर कंट्रोल चिप्स के निर्माण तथा टेस्टिंग और असेंबली से जुड़ी गतिविधियों को भारत में बढ़ाने की योजना है।
यह घटनाक्रम इस बात की ओर संकेत करता है कि भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक कंपनियां और भारतीय औद्योगिक समूह भी उत्पादन, पैकेजिंग और आपूर्ति शृंखला में सहयोग के अवसर तलाश रहे हैं।
क्या भारत के पास AI चिप डिजाइन की क्षमता है?
भारत की सबसे बड़ी संभावनाओं में उसका इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर टैलेंट शामिल है। लेकिन AI चिप के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए केवल इंजीनियरों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी। हाई-एंड आर्किटेक्चर, पेटेंट, IP, EDA टूल्स, प्रोटोटाइपिंग, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग जैसी क्षमताओं को एक साथ विकसित करना होगा।
SEMICON India 2026 में भी उद्योग विशेषज्ञों ने चिप डिजाइन से लेकर प्रोटोटाइप, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सबसे बड़ी चुनौती: मांग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
निवृत्ति राय के अनुसार केवल सरकारी सब्सिडी या फैक्ट्री स्थापित करने से तकनीकी क्रांति नहीं आएगी। उनके विचार में उत्पाद तभी टिकाऊ बनेंगे जब उनके लिए वास्तविक बाजार मांग मौजूद हो।
यही भारत के सामने सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक चुनौती है। सेमीकंडक्टर निर्माण अत्यधिक पूंजी, विशेषज्ञता और गुणवत्ता नियंत्रण वाला क्षेत्र है। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए लागत, गुणवत्ता, विश्वसनीयता और बड़े पैमाने पर उत्पादन—सभी जरूरी हैं। सरकार ने भी SEMICON India 2026 में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी लागत को महत्वपूर्ण बताया है।
भारत के लिए आगे का रास्ता कितना बड़ा है?
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल ‘Made in India’ चिप तक सीमित नहीं दिख रहा। लक्ष्य डिजाइन से लेकर उत्पादन, पैकेजिंग और सिस्टम तक पूरी मूल्य शृंखला में क्षमता विकसित करना है। India Semiconductor Mission के अनुसार सरकार का उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए एक मजबूत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम तैयार करना है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंप्यूटिंग, मेमोरी और पैकेजिंग की मांग बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए अवसर मौजूद हैं, लेकिन इन अवसरों को वास्तविक औद्योगिक क्षमता में बदलने के लिए दीर्घकालिक निवेश, शोध, कुशल मानव संसाधन, वैश्विक तकनीकी साझेदारी और मजबूत घरेलू आपूर्ति शृंखला की आवश्यकता होगी।
सेमीकंडक्टर उद्योग एक ऐसे मोड़ पर है जहां AI, HBM, चिपलेट और एडवांस्ड पैकेजिंग तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए केंद्र बन रहे हैं। SEMICON India 2026 में निवृत्ति राय ने इसी बदलाव को भारत के लिए अवसर के रूप में रेखांकित किया है।
भारत ने फैब, पैकेजिंग, चिप डिजाइन और टैलेंट विकास की दिशा में आधार तैयार करना शुरू कर दिया है। अब अगली चुनौती इस आधार को ऐसे उत्पादों, कंपनियों और तकनीकों में बदलने की है जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें। यदि भारत सिलिकॉन से लेकर सिस्टम तक मूल्य शृंखला के महत्वपूर्ण हिस्सों में अपनी क्षमताएं विकसित करता है, तो AI के दौर में देश के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि इसे किसी निश्चित भविष्य की उपलब्धि के बजाय एक उभरते औद्योगिक अवसर और दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्य के रूप में देखना अधिक उचित होगा।






