
संवाद 24 डेस्क। भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए आने वाले समय में टोल प्लाजा पर रुकना बीते दौर की बात हो सकता है। केंद्र सरकार देशभर में Barrier-Free Toll Collection System लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था में वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर न रुकना होगा, न बैरियर का इंतजार करना पड़ेगा। FASTag, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक की मदद से वाहन गुजरते ही स्वतः टोल कट जाएगा। सरकार का उद्देश्य यात्रा को तेज, सुरक्षित और अधिक पारदर्शी बनाना है।
क्या है बैरियर-फ्री टोल सिस्टम?
वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश टोल प्लाजा पर FASTag होने के बावजूद वाहन को कुछ समय के लिए धीमा या रोकना पड़ता है। नई प्रणाली में टोल प्लाजा पर लगे भौतिक बैरियर हटाए जाएंगे। सड़क के ऊपर लगाए गए हाई-रिजॉल्यूशन ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ेंगे, जबकि RFID आधारित FASTag वाहन की पहचान करेगा। दोनों तकनीकों से मिली जानकारी का मिलान कर सिस्टम स्वतः टोल राशि काट देगा। यदि किसी कारण FASTag नहीं पढ़ा जाता, तो नंबर प्लेट पहचान के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी।
AI और FASTag का होगा संयुक्त उपयोग
नई व्यवस्था केवल FASTag पर निर्भर नहीं रहेगी। इसमें AI आधारित कैमरे वाहन की नंबर प्लेट की पहचान करेंगे और FASTag के RFID डेटा से उसका मिलान करेंगे। इस दोहरी सत्यापन प्रणाली से गलत पहचान की संभावना कम होगी और टोल चोरी पर भी अंकुश लगेगा। सरकार का दावा है कि इससे पूरी प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगी।
मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक क्या है?
MLFF यानी Multi-Lane Free Flow तकनीक ऐसी व्यवस्था है जिसमें वाहन बिना गति कम किए टोल बिंदु से गुजर सकते हैं। सड़क के ऊपर लगे सेंसर, कैमरे और RFID रीडर वाहन की पहचान कर तुरंत टोल वसूल लेते हैं। दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से लागू है और अब भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैफिक जाम कम करना, ईंधन की बचत करना और लॉजिस्टिक्स लागत घटाना है। लगातार बढ़ते वाहन दबाव के कारण कई टोल प्लाजा पर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। बैरियर-फ्री सिस्टम लागू होने से यात्रा अधिक सुगम होगी और माल परिवहन भी तेज होगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत की लॉजिस्टिक्स लागत वैश्विक स्तर के करीब लाई जा सकेगी।
कब तक लागू हो सकती है नई व्यवस्था?
सरकार ने संकेत दिए हैं कि वर्ष 2026 के अंत तक चरणबद्ध तरीके से प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और बाद में अन्य टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य है। शुरुआत चुनिंदा हाईवे से होगी और सफल परीक्षण के बाद इसे देशभर में विस्तार दिया जाएगा।
गुजरात में शुरू हुआ पहला अनुभव
राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर गुजरात के सूरत के निकट भारत का पहला बैरियर-फ्री टोल सिस्टम लागू किया गया है। यहां वाहन बिना रुके गुजर रहे हैं और कैमरों तथा FASTag की सहायता से स्वचालित टोल वसूली की जा रही है। शुरुआती संचालन में हजारों वाहनों ने इस प्रणाली का उपयोग किया, जिससे इसके व्यावहारिक लाभ सामने आए।
वाहन चालकों को क्या मिलेगा फायदा?
नई व्यवस्था से सबसे बड़ा लाभ समय की बचत होगा। लंबी कतारों से छुटकारा मिलने के साथ ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। ट्रकों और व्यावसायिक वाहनों के लिए तेज आवाजाही का अर्थ होगा कम परिवहन लागत और समय पर डिलीवरी। निजी वाहन चालकों को भी हाईवे यात्रा अधिक सहज अनुभव होगी।
सरकार और NHAI को क्या लाभ होगा?
डिजिटल और AI आधारित प्रणाली से टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा राजस्व रिसाव कम होगा। हर वाहन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे निगरानी आसान होगी। भविष्य में डेटा विश्लेषण के आधार पर ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क योजना भी बेहतर बनाई जा सकेगी।
क्या रहेंगी चुनौतियां?
नई तकनीक लागू करने के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आएंगी। सभी वाहनों पर सक्रिय और वैध FASTag होना आवश्यक होगा। नंबर प्लेट स्पष्ट और मानक के अनुरूप होनी चाहिए, अन्यथा कैमरे पहचान में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। तकनीकी खराबी, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और विवाद निपटान की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों और पुराने वाहनों के लिए जागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी होगा।
भविष्य की दिशा
भारत का टोल सिस्टम लगातार डिजिटल हो रहा है। FASTag के व्यापक उपयोग के बाद अब AI आधारित बैरियर-फ्री टोलिंग अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। भविष्य में यह प्रणाली GPS आधारित दूरी-आधारित टोलिंग जैसी उन्नत तकनीकों का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है। इससे “जितनी दूरी, उतना टोल” जैसी अवधारणाओं को भी लागू करना आसान हो सकता है।
बैरियर-फ्री टोल कलेक्शन सिस्टम भारत के सड़क परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव साबित हो सकता है। FASTag, AI, ANPR कैमरे और MLFF तकनीक के संयोजन से हाईवे यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है। यदि यह योजना निर्धारित समय के अनुसार सफलतापूर्वक लागू होती है, तो देश के करोड़ों यात्रियों को जाम से राहत मिलेगी, ईंधन की बचत होगी और भारत की परिवहन व्यवस्था वैश्विक मानकों के और करीब पहुंच सकेगी। सरकार के लिए यह केवल टोल वसूली का नया तरीका नहीं, बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट हाईवे की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।






