क्या अब सिलेंडर का जमाना खत्म होने वाला है? Indian Oil का नया सोलर स्टोव ‘सूर्य नूतन’ चर्चा में
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संवाद 24 डेस्क। महंगे होते LPG सिलेंडर, गैस सप्लाई की अनिश्चितता और बढ़ते घरेलू खर्च के बीच अब भारतीय परिवार ऐसे विकल्पों की तलाश में हैं, जो रसोई का खर्च कम करें और रोजमर्रा की जरूरतों को भी पूरा कर सकें। इसी बीच Indian Oil Corporation का सोलर स्टोव ‘सूर्य नूतन’ फिर से चर्चा में है। यह ऐसा इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम है, जो बिना LPG सिलेंडर के खाना पकाने में मदद कर सकता है और जरूरत पड़ने पर बिजली के सहारे भी चल सकता है।
आखिर क्या है सूर्य नूतन?
‘सूर्य नूतन’ एक पारंपरिक सोलर कुकर नहीं है, जिसे धूप में बाहर रखना पड़े। यह एक इनडोर कुकिंग सिस्टम है, जिसमें छत पर लगाए गए सोलर पैनल सूरज की रोशनी से ऊर्जा लेते हैं और उसे एक केबल के जरिए रसोई में लगे कुकटॉप तक पहुंचाते हैं। इस तरह उपयोगकर्ता घर के अंदर ही खाना बना सकता है।
यह सिस्टम सौर ऊर्जा को पहले हीट में बदलता है, फिर उसे एक विशेष थर्मल बैटरी में स्टोर करता है। इसी वजह से शाम के समय, बादलों वाले दिन या कम धूप में भी खाना पकाना संभव हो जाता है। यही विशेषता इसे पुराने सोलर कुकरों से अलग बनाती है।
गैस नहीं, बिजली नहीं, फिर कैसे बनेगा खाना?
सूर्य नूतन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना गैस और बिना बिजली के आखिर खाना कैसे बनेगा। इसका जवाब इसके हाइब्रिड डिजाइन में छिपा है। सामान्य दिनों में यह सूरज की रोशनी से चार्ज होता है और उसी ऊर्जा से खाना पकाता है। लेकिन अगर लगातार बारिश हो, धूप न निकले या ऊर्जा कम पड़ जाए, तो इसे अन्य सहायक ऊर्जा स्रोतों से भी चलाया जा सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि यह पूरी तरह केवल धूप पर निर्भर है। बल्कि यह एक स्मार्ट कुकिंग सिस्टम है, जो सौर ऊर्जा को प्राथमिकता देता है और जरूरत पड़ने पर बैकअप मोड में भी काम कर सकता है।
पुराने सोलर कुकर से कितना अलग है यह सिस्टम?
भारत में सोलर कुकर कोई नई चीज नहीं है। पहले भी कई कंपनियों और सरकारी संस्थानों ने सौर ऊर्जा से चलने वाले कुकर पेश किए थे। लेकिन उनमें सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उन्हें खुले मैदान या छत पर रखना पड़ता था। खाना पकाने में समय ज्यादा लगता था और बारिश, सर्दी या शाम के समय उनका उपयोग लगभग असंभव हो जाता था।
सूर्य नूतन इन कमियों को दूर करने का दावा करता है। इसमें खाना घर के अंदर बनता है, धूप कम होने पर भी उपयोग जारी रह सकता है और इसे दिन के अलग-अलग समय में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि इसे एक “इनडोर सोलर कुकिंग सिस्टम” कहा जा रहा है।
क्या-क्या पकाया जा सकता है?
इस स्टोव को केवल पानी गर्म करने या चाय बनाने तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके जरिए उबालना, भाप में पकाना, तलना, रोटी बनाना, सब्जी बनाना और यहां तक कि बेकिंग जैसे काम भी किए जा सकते हैं। कंपनी का दावा है कि इसका प्रीमियम मॉडल चार लोगों के परिवार के लिए दिनभर का खाना तैयार कर सकता है।
यानी यह केवल एक प्रयोगात्मक उत्पाद नहीं, बल्कि घरेलू रसोई के लिए तैयार किया गया ऐसा समाधान है, जो पारंपरिक गैस चूल्हे की जगह लेने की क्षमता रखता है।
तीन मॉडल, अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से विकल्प
सूर्य नूतन को अलग-अलग जरूरतों के अनुसार तीन मॉडल में पेश किया गया है। बेस मॉडल दिन के समय सीमित उपयोग के लिए है, जबकि प्रीमियम मॉडल दिनभर के भोजन के लिए डिजाइन किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार बेस मॉडल की कीमत लगभग 12,000 रुपये से शुरू होती है, जबकि टॉप मॉडल 23,000 रुपये तक जा सकता है।
कुछ रिपोर्ट्स में इसकी कीमत 18,000 से 30,000 रुपये तक भी बताई गई है, जबकि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद इसकी कीमत घटने की उम्मीद जताई गई है।
क्या यह वाकई LPG सिलेंडर का विकल्प बन सकता है?
भारत आज भी अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अगर बड़े पैमाने पर सोलर कुकिंग सिस्टम अपनाए जाते हैं, तो इससे घरेलू खर्च कम होने के साथ-साथ देश का आयात बिल भी घट सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक सफल होती है, तो इससे भारत को हर साल हजारों करोड़ रुपये की LPG लागत बचाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सूर्य नूतन पूरी तरह LPG सिलेंडर की जगह ले लेगा। इसकी शुरुआती कीमत अभी भी आम परिवारों के लिए ज्यादा मानी जा सकती है। साथ ही इसे लगाने के लिए छत पर सोलर पैनल और तकनीकी इंस्टॉलेशन की जरूरत होती है।
ग्रामीण भारत के लिए कितना उपयोगी?
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां गैस सिलेंडर की आपूर्ति मुश्किल होती है, वहां सूर्य नूतन जैसी तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। खासकर ऐसे परिवारों के लिए, जो अभी भी लकड़ी, गोबर या कोयले के चूल्हों पर निर्भर हैं। इससे धुएं से होने वाली बीमारियों में कमी आ सकती है और महिलाओं का समय भी बच सकता है।
हाल ही में कुछ राज्यों में इसके पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार आदिवासी और कमजोर आय वर्ग के परिवारों तक इसे पहुंचाने के लिए कई संस्थाएं काम कर रही हैं।
बुकिंग कैसे होगी?
फिलहाल सूर्य नूतन को सीधे ई-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदना संभव नहीं है। इसके लिए Indian Oil Corporation की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्री-बुकिंग या इंक्वायरी फॉर्म भरना पड़ता है। इसमें नाम, राज्य, जिला, परिवार का आकार और LPG उपयोग जैसी जानकारी मांगी जाती है।
इंडियन ऑयल ने अपनी वेबसाइट पर इस सिस्टम से जुड़ी जानकारी को हाल ही में अपडेट किया है, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी अब इसे अधिक गंभीरता से बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।
क्या यह भारत की रसोई का भविष्य है?
सूर्य नूतन अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन यह साफ है कि भविष्य की रसोई केवल LPG सिलेंडर पर निर्भर नहीं रहने वाली। आने वाले समय में सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक कुकिंग और हाइब्रिड सिस्टम का उपयोग तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में सूर्य नूतन जैसी तकनीकें भारतीय रसोई को अधिक सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बना सकती हैं।
महंगी गैस, बढ़ते बिजली बिल और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में सूर्य नूतन केवल एक नया चूल्हा नहीं, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह तकनीक सचमुच करोड़ों भारतीय घरों तक पहुंच पाती है या फिर फिलहाल केवल एक प्रीमियम विकल्प बनकर रह जाती है।






