
तिर्वा/उमरन, कन्नौज।
उमर्दा ब्लॉक की उमरन ग्राम पंचायत के ताहरपुर गांव में बुढ़वा मंगल के अवसर पर धार्मिक आस्था और पारंपरिक खेल संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। गांव स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर परिसर में सुंदरकांड पाठ, विशाल भंडारे और दो दिवसीय दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आयोजन में क्षेत्र के अलावा कई जिलों से आए लोगों और पहलवानों ने सहभागिता की।
संगीतमय सुंदरकांड से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर
कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक आयोजन के साथ हुई। पंडित प्रह्लाद शास्त्री और उनकी टीम ने संगीतमय सुंदरकांड पाठ प्रस्तुत किया। सुंदरकांड के दौरान हनुमान जी के भजनों और स्तुतियों से मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। बुढ़वा मंगल के अवसर पर हनुमान मंदिरों में सुंदरकांड और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की परंपरा आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिलती है।
विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
धार्मिक कार्यक्रम के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे का आयोजन एडवोकेट संजय द्विवेदी और नितिन गुप्ता की ओर से कराया गया। ग्रामीणों और दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने आयोजन में सहभागिता की।
अखाड़े में कई जिलों के पहलवानों ने आजमाए दांव
आयोजन का प्रमुख आकर्षण दो दिवसीय विशाल दंगल प्रतियोगिता रही। इसमें कई जिलों से आए पहलवानों ने हिस्सा लिया और अखाड़े में अपने दांव-पेंच का प्रदर्शन किया। दंगल देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे। धार्मिक आयोजन के साथ पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिता ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी।
स्वर्गीय साधुराम द्विवेदी की स्मृति से जुड़ी है परंपरा
आयोजकों के अनुसार ताहरपुर में आयोजित होने वाला यह दंगल पंडित स्वर्गीय साधुराम द्विवेदी की स्मृति में कई वर्षों से बुढ़वा मंगल के अवसर पर कराया जाता है। हर वर्ष इस आयोजन को राजेंद्र प्रसाद द्विवेदी की ओर से आयोजित कराया जाता है। इस परंपरा के चलते दंगल स्थानीय स्तर पर धार्मिक आयोजन के साथ जुड़ी एक पारंपरिक खेल गतिविधि के रूप में भी बना हुआ है।
दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने लिया आयोजन का आनंद
बुढ़वा मंगल के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी लोग पहुंचे। मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रम और अखाड़े में पहलवानों के बीच मुकाबले ने पूरे आयोजन को उत्सव का रूप दिया।
आयोजन में सहयोग करने वालों का जताया आभार
कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले ग्रामीणों, क्षेत्रवासियों और पुलिस प्रशासन के प्रति एडवोकेट प्रसून द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया।
आस्था और परंपरा का बना संगम
ताहरपुर का यह आयोजन एक ओर जहां बुढ़वा मंगल की धार्मिक परंपरा से जुड़ा रहा, वहीं दूसरी ओर दंगल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की पारंपरिक कुश्ती संस्कृति को भी मंच मिला। सुंदरकांड पाठ, भंडारा और दंगल ने मिलकर कार्यक्रम को धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और खेल परंपरा से जोड़ दिया।






