
कन्नौज जनपद के उमर्दा क्षेत्र में हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में चेहल्लुम (अरबईन) का पर्व श्रद्धा, सादगी और शांतिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने एक स्थान पर एकत्र होकर शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सौहार्द और अनुशासन का वातावरण देखने को मिला।
जुलूस के बजाय सामूहिक मजलिस का आयोजन
आयोजकों द्वारा इस वर्ष क्षेत्र में कोई जुलूस नहीं निकाला गया। इसके स्थान पर अकीदतमंदों ने एक स्थान पर एकत्र होकर मजलिस आयोजित की, जहां कर्बला की घटना, हज़रत इमाम हुसैन के बलिदान और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि इमाम हुसैन का जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, सत्य और इंसानियत की रक्षा का प्रतीक है।
कुरआन ख्वानी और दुआओं में शामिल हुई अवाम
कार्यक्रम के दौरान कुरआन ख्वानी की गई तथा शहीदों के उच्च दर्जे और विश्व में अमन-चैन की दुआ मांगी गई। बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों ने आयोजन में भाग लेकर एक-दूसरे के प्रति भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया।
लंगर और नियाज़ का हुआ आयोजन
चेहल्लुम के अवसर पर लंगर और नियाज़ का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी समुदायों के लोगों ने सहयोग किया। जरूरतमंदों को भोजन और पेयजल वितरित किया गया। स्थानीय नागरिकों के सहयोग से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
चेहल्लुम का धार्मिक महत्व
इस्लामी परंपरा के अनुसार चेहल्लुम (अरबईन) मोहर्रम की 10वीं तारीख (आशूरा) के 40 दिन बाद मनाया जाता है। यह दिन कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है तथा त्याग, न्याय, धैर्य और मानवता के मूल्यों की प्रेरणा देता है।






