
जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की अमृत सरोवर योजना कन्नौज जिले के कई क्षेत्रों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। लाखों रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे अनेक अमृत सरोवर अब भी अधूरे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर जल संरक्षण की व्यवस्था प्रभावी न होने से तालाब सूखे पड़े हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने संबंधित अधिकारियों को कार्यों की समीक्षा कर जल्द पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।
कई गांवों में अधूरी दिखी योजना की तस्वीर
उमर्दा विकासखंड के ठठिया, तिजलापुर, चंदौली, भदौसी, सुर्सी, बस्ता और उमरन सहित कई गांवों में अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार कुछ सरोवरों में आंशिक रूप से पानी मौजूद है, जबकि कई तालाब अब भी सूखे पड़े हैं और उनमें झाड़ियां उग आई हैं। इससे योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने रखी अपनी बात
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि योजना के निर्माण चरण में कार्य तेजी से हुआ, लेकिन बाद में रखरखाव और जल संरक्षण की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। वहीं, चंदौली गांव से जुड़े एक ग्रामीण ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर योजना में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। हालांकि, ग्राम प्रधान प्रमोद कुमार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज किया है।
प्रशासन ने दिए जांच और सुधार के संकेत
जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने अधूरे पड़े अमृत सरोवरों की स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों की समीक्षा कर शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि योजना का उद्देश्य जल संरक्षण, भूजल स्तर में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संसाधनों को सुदृढ़ करना है, इसलिए गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।
जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है योजना
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर अमृत सरोवर योजना की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देना, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन करना है।






