
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को अधिक पारदर्शी और फर्जीवाड़ा मुक्त बनाने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब योजना के तहत विवाह समारोह में शामिल होने वाले प्रत्येक वर और वधू की आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित करना और धोखाधड़ी की संभावनाओं को समाप्त करना है। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश में पहले जारी किए गए शासन स्तर के निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है।
आवेदन करने वाले परिवार समय रहते करा लें बायोमेट्रिक अपडेट
जिला समाज कल्याण अधिकारी वेद प्रकाश मिश्रा ने बताया कि जिन अभिभावकों ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन किया है, वे विवाह से पहले वर और वधू के आधार कार्ड से संबंधित बायोमेट्रिक विवरण अपडेट अवश्य करा लें। समारोह स्थल पर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही जोड़ों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी और उसके बाद ही उन्हें विवाह मंडप में प्रवेश दिया जाएगा। इससे तकनीकी समस्याओं और पहचान संबंधी विवादों से बचा जा सकेगा।
फर्जी आवेदन की घटना के बाद सख्त हुई व्यवस्था
कन्नौज में 21 मार्च को आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान एक फर्जी आवेदन का मामला सामने आया था। जांच में सामने आया कि दो बच्चों के पिता का विवाह आवेदन उसकी मौसेरी बहन के साथ कर दिया गया था। समय रहते मामला उजागर होने पर संबंधित जोड़े को मंडप में बैठने से रोक दिया गया। इस घटना के बाद योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने का निर्णय लिया।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
समाज कल्याण विभाग का मानना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन लागू होने से एक ही व्यक्ति द्वारा दोबारा लाभ लेने, फर्जी पहचान प्रस्तुत करने तथा गलत दस्तावेजों के आधार पर आवेदन करने जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी। विभाग ने सभी लाभार्थियों से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और समय रहते आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराने की अपील की है।






