
संवाद 24 फर्रुखाबाद। फर्रुखाबाद के कमालगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह सामने आई एक घटना ने लोगों को झकझोर दिया। मड़ैयन घाट पुल के पास एक चार माह की गर्भवती महिला गंगा नदी से तैरकर किनारे पहुंची। महिला की हालत बेहद खराब थी। वह बदहवास थी और उसके शरीर पर पर्याप्त कपड़े नहीं थे। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभाला और पहनने के लिए कपड़े तथा शॉल उपलब्ध कराई।
महिला ने पुलिस को दिए बयान में अपने पति और ममिया ससुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि दोनों ने पहले दुपट्टे से उसका गला घोंटने की कोशिश की और फिर उसे मृत समझकर मड़ैयन घाट पुल से गंगा में फेंक दिया। महिला के मुताबिक, नदी में गिरने के बाद उसे होश आया और उसने अपनी तथा गर्भ में पल रहे चार माह के बच्चे की जान बचाने के लिए तेज बहाव के बीच तैरकर किनारा पकड़ा। पुलिस ने महिला को सुरक्षित थाने पहुंचाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
गंगा से तैरकर किनारे पहुंची महिला
गुरुवार सुबह मड़ैयन घाट पुल के आसपास काम कर रहे लोगों ने नदी की ओर से एक महिला को बदहवास हालत में बाहर आते देखा। महिला काफी परेशान थी और मदद के लिए लोगों की ओर देख रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उसकी हालत देखकर वहां मौजूद लोग तत्काल उसकी मदद के लिए आगे आए।
महिला ने बताया कि वह गंगा में गिराए जाने के बाद किसी तरह तैरकर किनारे पहुंची है। उसके पास पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े नहीं थे। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उसे शॉल और कपड़े उपलब्ध कराए तथा घटना की सूचना पुलिस को दी।
घटना की सूचना मिलते ही यूपी-112 की टीम मौके पर पहुंची और कमालगंज पुलिस को जानकारी दी गई। इसके बाद थाना प्रभारी राम सहाय सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। महिला सिपाही कीर्ति चौधरी की देखरेख में पीड़िता को सुरक्षित थाने ले जाया गया।
पीड़िता का आरोप, हरदोई छोड़ने के बहाने घर से निकले थे
पीड़िता की पहचान फर्रुखाबाद के कायमगंज क्षेत्र के मीरगंज निवासी सुमन के रूप में बताई गई है। महिला के अनुसार वर्ष 2020 में उसकी शादी हुई थी, लेकिन पति के साथ अनबन के चलते वह पिछले करीब डेढ़ वर्ष से अलग रह रही थी। महिला का कहना है कि वह कंपिल क्षेत्र के अकबराबाद निवासी अजीत, पुत्र ओमकार, के साथ पांचाल घाट क्षेत्र में किराए के कमरे में रह रही थी। अजीत सीएनजी टैंकर चलाने का काम करता है।
सुमन के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों से उसकी तबीयत खराब चल रही थी। इसी दौरान मकान मालिक द्वारा कमरा खाली करने का दबाव बनाया जा रहा था। बुधवार शाम करीब सात बजे अजीत अपने ममिया ससुर रामू के साथ काले रंग की अपाचे मोटरसाइकिल से उसे लेकर निकला। महिला का आरोप है कि उसे बताया गया था कि उसे हरदोई में उसकी ननद के घर छोड़ा जाएगा। लेकिन रास्ते में उसे यह पता नहीं था कि उसके साथ क्या होने वाला है।
मड़ैयन घाट पुल के पास लगाया गला घोंटने का आरोप
सुमन के मुताबिक, बाइक मड़ैयन घाट पुल के पास पहुंचने के बाद अजीत और रामू ने सुनसान स्थान देखकर बाइक रोक दी। महिला का आरोप है कि दोनों ने उसके साथ मारपीट की और दुपट्टे से उसका गला घोंटने का प्रयास किया।
उसने पुलिस को बताया कि गला घोंटने के कारण वह बेहोशी की हालत में पहुंच गई थी। आरोप है कि दोनों ने उसे मृत समझ लिया और इसके बाद गंगा नदी में फेंक दिया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि अभी पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि महिला के साथ वास्तव में क्या हुआ, वह नदी तक कैसे पहुंची और उसके लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
नदी में गिरते ही लौटी चेतना, जान बचाने के लिए तैरी
पीड़िता के अनुसार, गंगा में गिरने के बाद कुछ समय बाद उसकी चेतना वापस आई। पानी के तेज बहाव और अंधेरे के बीच उसे अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। महिला ने बताया कि वह चार माह की गर्भवती है। उसने अपनी और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। उसके कपड़े पानी में भारी हो गए थे और तैरने में परेशानी हो रही थी। ऐसे में उसने कपड़े उतार दिए और नदी में तैरते हुए किनारे की ओर बढ़ती रही। काफी दूरी तक तैरने के बाद वह कमालगंज की ओर वाले किनारे तक पहुंचने में सफल हुई।
मौके पर मौजूद लोगों ने दी तत्काल मदद
गंगा से निकलकर पुल के पास पहुंची महिला की हालत देखकर वहां काम कर रहे कर्मचारियों ने तत्काल उसकी मदद की। उन्होंने महिला को ढकने के लिए शॉल और कपड़े दिए। इसके बाद यूपी-112 को सूचना दी गई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर महिला को सुरक्षा में लिया। महिला की हालत और उसके आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उसे थाने ले जाया गया, जहां पुलिस ने घटना के संबंध में जानकारी जुटानी शुरू की।
मामले में महिला की चिकित्सकीय जांच भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसके शरीर पर चोटों के निशान और गला दबाए जाने के आरोप की पुष्टि मेडिकल परीक्षण से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर हो सकती है।
गर्भ में पल रहे बच्चे की सुरक्षा भी बनी चिंता
घटना का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि महिला स्वयं के अनुसार चार माह की गर्भवती है। तेज बहाव वाली गंगा में गिरने के बाद उसका तैरकर सुरक्षित बाहर निकलना उसके लिए ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी गंभीर जोखिम वाली स्थिति थी। पुलिस जांच के साथ महिला का चिकित्सकीय परीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है, ताकि उसकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और गर्भस्थ शिशु की स्थिति का आकलन किया जा सके।
पुलिस के सामने कई सवाल, जांच से खुलेगा घटनाक्रम
घटना के बाद पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला को पुल तक कौन लेकर गया, उसके साथ वहां क्या हुआ और वह गंगा में किस तरह पहुंची। पुलिस आरोपों की पुष्टि के लिए घटनास्थल का निरीक्षण, संभावित प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ, महिला के बयान और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। यदि महिला के आरोपों के अनुरूप साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मड़ैयन घाट पुल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की उपलब्धता भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि इन बिंदुओं पर पुलिस की ओर से अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
पीड़िता के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला ने अपने पति और ममिया ससुर पर हत्या के प्रयास और गंगा में फेंकने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक इन आरोपों की पुलिस जांच पूरी नहीं हुई है। इसलिए आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पीड़िता के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि घटना वास्तव में किस प्रकार हुई।
फिलहाल पुलिस महिला की सुरक्षा और मामले की जांच पर ध्यान केंद्रित कर रही है। महिला द्वारा बताए गए घटनाक्रम की पुष्टि के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों को जुटाना जांच का अहम हिस्सा होगा।






