स्टीमर से बाढ़ प्रभावित गांव पहुंचीं डीएम, राहत कार्यों का लिया जायजा, घर गंवाने वालों को आवासीय पट्टे देने के निर्देश

संवाद 24 फर्रुखाबाद। जिले में गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों के बीच जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने बुधवार को सदर तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे डीएम स्टीमर से विकासखंड बढ़पुर क्षेत्र के दिलीप की मड़ैया और धौली की मड़ैया पहुंचीं। उन्होंने जलभराव और कटान से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के साथ ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं और तत्काल जरूरतों की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने खाद्य सामग्री, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने को कहा।

स्टीमर से गांव पहुंचीं डीएम, जलभराव और कटान का देखा असर

बाढ़ प्रभावित गांवों तक सामान्य सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होने के कारण जिलाधिकारी ने स्टीमर के माध्यम से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दिलीप की मड़ैया और धौली की मड़ैया गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में स्थित हैं और इस समय नदी के बढ़े जलस्तर तथा कटान का असर यहां के जनजीवन पर दिखाई दे रहा है।

दिलीप की मड़ैया में हाल के दिनों में गंगा के कटान से मकानों को भारी नुकसान हुआ है। जुलाई में भी यहां गंगा के तेज कटान के कारण कई मकानों के नदी में समाने की खबर सामने आई थी। उस दौरान कटान रोकने के लिए लगाए गए परकोपाइन और बालू की बोरियों के बह जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इसी पृष्ठभूमि में डीएम का मौके पर पहुंचना प्रशासन के लिए जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रामीणों से पूछा—कहां आ रही है सबसे ज्यादा परेशानी

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने बाढ़ के कारण आवागमन, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं और मकानों को हुए नुकसान के बारे में जानकारी ली।ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने बाढ़ और कटान से उत्पन्न समस्याएं रखीं। कई परिवारों के सामने घर और घरेलू सामान की सुरक्षा की चुनौती है, जबकि जलभराव के कारण सामान्य आवागमन भी प्रभावित हुआ है। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों की समस्याओं को केवल कागजी स्तर पर न रखा जाए, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति के आधार पर राहत उपलब्ध कराई जाए।

बाढ़ प्रभावित बच्चों को बांटा कुक्ड फूड

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित बच्चों को कुक्ड फूड वितरित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक भोजन और आवश्यक सामग्री नियमित रूप से पहुंचती रहे। प्रशासन का फोकस इस समय विशेष रूप से उन परिवारों पर है, जिनके घर बाढ़ के तेज बहाव या कटान की वजह से क्षतिग्रस्त हुए हैं। डीएम ने कहा कि प्रभावित लोगों को निर्धारित सरकारी सहायता उपलब्ध कराने में देरी नहीं होनी चाहिए।

कटान से घर गंवाने वालों की सूची तैयार करने के निर्देश

दिलीप की मड़ैया जैसे कटान प्रभावित क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों की है, जिनके मकान नदी की धारा में समा गए हैं या रहने योग्य नहीं रह गए हैं। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने ऐसे परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि जिन ग्रामीणों के घर बाढ़ के तेज बहाव या कटान से नष्ट हो गए हैं, उनकी पात्रता के अनुसार शासन द्वारा निर्धारित सहायता राशि उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। इससे प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

घर खोने वाले परिवारों को आवासीय पट्टे देने की तैयारी

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाढ़ और गंगा कटान से घर गंवाने वाले परिवारों के पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे परिवारों का चिन्हांकन कर आवासीय पट्टे जारी करने के लिए आवश्यक पत्रावली तैयार करने को कहा। यह निर्देश उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास अब रहने के लिए सुरक्षित आवासीय भूमि उपलब्ध नहीं है। यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें आवासीय पट्टे मिलते हैं तो भविष्य में उनके पुनर्वास का रास्ता आसान हो सकता है।

राहत कार्यों में लापरवाही पर डीएम की सख्ती

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार सक्रिय रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रभावित परिवार को जरूरी राहत और सहायता से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने, बाढ़ की स्थिति की निरंतर निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल संसाधन उपलब्ध कराने को कहा।

दिलीप की मड़ैया में पहले भी तेज कटान ने बढ़ाई थी चिंता

दिलीप की मड़ैया में गंगा कटान का संकट नया नहीं है। पिछले वर्ष भी गांव में तेज कटान के कारण कई मकान गंगा में समा गए थे। सितंबर 2025 में यहां दो दिनों के भीतर नौ मकानों के गंगा में समाने की खबर सामने आई थी। बाद में गांव के कुछ हिस्सों में दो तरफ से कटान की स्थिति भी सामने आई थी। इस वर्ष भी जुलाई में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान तेज होने और कई मकानों के नदी में समाने की खबरें सामने आईं। ऐसे में मौजूदा बाढ़ के दौरान ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।

प्रशासन के सामने राहत के साथ पुनर्वास की चुनौती

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है, लेकिन जिन परिवारों के मकान कटान में नष्ट हो चुके हैं, उनके लिए समस्या केवल कुछ दिनों की नहीं है। ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थान, आवासीय भूमि और आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। डीएम द्वारा प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने और आवासीय पट्टों की पत्रावली तैयार करने के निर्देश को इसी व्यापक चुनौती से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे राहत कार्यों के साथ दीर्घकालिक पुनर्वास की दिशा में भी कदम बढ़ने की उम्मीद है।

अधिकारियों की टीम रही मौजूद

डीएम के निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी सदर संजय कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह, तहसीलदार सदर विक्रम सिंह चौहान सहित संबंधित राजस्व एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और अब तक किए गए राहत कार्यों की जानकारी दी।

प्रशासन का भरोसा—हर प्रभावित परिवार तक पहुंचेगी मदद

निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए पूरी तत्परता से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को आवश्यक राहत और सहायता से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की चुनौती दोहरी है—एक ओर बाढ़ के बीच लोगों को सुरक्षित रखना और दूसरी ओर गंगा के कटान से घर गंवाने वाले परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करना। दिलीप की मड़ैया और धौली की मड़ैया में डीएम का स्टीमर से पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना इसी दिशा में प्रशासन की सक्रियता का संकेत है। अब प्रभावित ग्रामीणों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राहत, मुआवजे और आवासीय पट्टे की प्रक्रिया कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है।

Samvad 24 Office
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