सावन के पहले सोमवार शिवमय हुआ फर्रुखाबाद: पांडवेश्वरनाथ समेत प्रमुख शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

संवाद 24 फर्रुखाबाद। सावन मास के पहले सोमवार पर फर्रुखाबाद पूरी तरह शिवमय हो उठा। तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रेलवे रोड स्थित ऐतिहासिक श्री पांडवेश्वरनाथ मंदिर, घुमना क्षेत्र के श्री कोतवालेश्वरनाथ मंदिर, मोहल्ला अढ़तियान के शिव मंदिर तथा कंपिल स्थित प्राचीन रामेश्वरनाथ मंदिर में दिनभर “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में घंटों इंतजार करने के बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी कारण पहले सोमवार को जिले के गांवों और शहरों से हजारों श्रद्धालु सुबह होने से पहले ही शिवालयों की ओर निकल पड़े। मंदिरों के बाहर भक्ति, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

पांडवेश्वरनाथ मंदिर में सुबह चार बजे से शुरू हुई श्रद्धालुओं की आमद

रेलवे रोड स्थित श्री पांडवेश्वरनाथ मंदिर में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सूर्योदय होते-होते मंदिर परिसर पूरी तरह भर गया। सुबह नौ बजे तक मंदिर के गर्भगृह से लेकर मुख्य सड़क तक महिलाओं और पुरुषों की लंबी कतारें लग चुकी थीं। श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और पूजा की थाली लेकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई लोग घंटों तक कतार में खड़े रहने के बाद थककर सड़क किनारे बैठ गए, लेकिन भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक की आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दी। मंदिर में प्रवेश मिलने पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से शिवलिंग का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।

महाभारत काल से जुड़ी है पांडवेश्वरनाथ मंदिर की मान्यता

फर्रुखाबाद का पांडवेश्वरनाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी कारण यह मंदिर जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और सावन तथा महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

कांवड़ियों के जत्थों ने बढ़ाई धार्मिक आभा

सावन सोमवार पर विभिन्न गंगा घाटों से गंगाजल लेकर आए कांवड़ियों के जत्थे भी बड़ी संख्या में पांडवेश्वरनाथ मंदिर पहुंचे। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच शिवभक्तों ने शिवलिंग का जलाभिषेक किया। भगवा वस्त्र धारण किए कांवड़ियों की टोलियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कोतवालेश्वरनाथ और अढ़तियान शिव मंदिर में भी उमड़ी भीड़

घुमना कोतवाली के पीछे स्थित श्री कोतवालेश्वरनाथ मंदिर को आकर्षक रंग-बिरंगी झालरों और विद्युत सजावट से सजाया गया था। यहां सुबह से लेकर देर शाम तक दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। मोहल्ला अढ़तियान स्थित शिव मंदिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और संकीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने भाग लिया। सुबह लगभग दस बजे भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और आरती संपन्न हुई। इस दौरान करीब एक घंटे तक दर्शन स्थगित रखे गए। आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए पुनः मंदिर के कपाट खोल दिए गए।

आधे घंटे से लेकर दो घंटे तक करना पड़ा इंतजार

मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि भीड़ लगातार बढ़ने के कारण किसी को आधे घंटे में दर्शन हो गए, जबकि कई श्रद्धालुओं को दो घंटे तक कतार में इंतजार करना पड़ा। फतेहगढ़ क्षेत्र से करीब आठ किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था ही उन्हें इतनी लंबी दूरी तय करने की प्रेरणा देती है। उनका कहना था कि कठिनाई चाहे कितनी भी हो, भोलेनाथ के दर्शन के बाद सारी थकान दूर हो जाती है।

कंपिल के रामेश्वरनाथ मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

कंपिल कस्बे के ऐतिहासिक रामेश्वरनाथ मंदिर में भी पहले सावन सोमवार पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर शाम तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष लगातार गूंजते रहे। इसके साथ ही कपिल मुनि आश्रम और कालेश्वरनाथ मंदिर सहित क्षेत्र के अन्य शिवालयों में भी दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था रही मजबूत

भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। पांडवेश्वरनाथ मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों पर महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। रेलवे रोड पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार पहिया वाहनों को सूर्य होटल की ओर रोककर वैकल्पिक मार्गों से भेजा गया। चौक की ओर आने वाले वाहनों को भी मंदिर से लगभग 500 मीटर पहले ही डायवर्ट किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और भीड़ नियंत्रित बनी रहे।

सेवा कार्यों में भी दिखी सामाजिक सहभागिता

मंदिरों के आसपास कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शर्बत और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं। स्वयंसेवक लगातार कतारों को व्यवस्थित कराने और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे रहे। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन करने में काफी सुविधा मिली।

सावन सोमवार का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में सावन मास भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। विशेष रूप से सावन के सोमवार का व्रत और पूजा जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना जाता है।

भक्ति और अनुशासन का बना अद्भुत संगम

फर्रुखाबाद में पहले सावन सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद मंदिर समितियों, पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों के सहयोग से व्यवस्थाएं सुचारु रहीं। सुबह से देर शाम तक जलाभिषेक, भजन-कीर्तन, आरती और दर्शन का क्रम चलता रहा। पहले सावन सोमवार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि फर्रुखाबाद की धार्मिक परंपराएं आज भी उतनी ही जीवंत हैं और भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था समय के साथ और अधिक प्रगाढ़ होती जा रही है।

Samvad 24 Office
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